भाजपा ने पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव में खाता खोलने के बाद दूसरे ही चुनाव में सत्ता हासिल कर ली है। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस ने भी ऐसा किया था, लेकिन उसे सिंगूर के रूप में एक मुद्दा हाथ लग गया था। भाजपा ने अपनी रणनीति के दम पर टीएमसी से सत्ता छीनी है।
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पश्चिम बंगाल में भी सरकार बनाने जा रही है। यह पार्टी के लिए एक पुराना सपना सच और दर्द दूर होने जैसा है। यह दर्द एक बार अटल बिहारी वाजपेयी ने भी बयान किया था। उन्होंने अपने सहयोगियों से कहा था कि देश के तमाम हिस्सों में पैठ बना रही बीजेपी को बंगाल में कदम नहीं रख पाते देखना बड़ा दुखदायी है।
बंगाल से पार्टी की दूरी वाजपेयी को शायद इसलिए भी दर्द देती होगी क्योंकि भारतीय जन संघ की स्थापना करने वाले श्यामा प्रसाद मुखर्जी मूलतः पश्चिम बंगाल के ही थे। 1980 में बीजेपी का जन्म जन संघ के गर्भ से ही हुआ था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) भी बांग्ला अस्मिता और पहचान के प्रतीकों को शुरू से महत्व देता आ रहा था। फिर भी, बीजेपी बंगाल में कदम नहीं रख पा रही थी।
बीजेपी का जन्म 1980 में हुआ। उसे चुनावी राजनीति में जमीन 1990 के दशक से मिलनी शुरू हुई। इससे पहले राम मंदिर (अयोध्या) के रूप में उसने एक मुद्दा पकड़ा और उग्र हिंदुत्ववादी पार्टी की छवि बनाई। इस छवि के साथ उसे कामयाबी तो मिली, लेकिन उसका विस्तार उस रफ्तार से नहीं हुआ, जिससे उसे उम्मीद रही होगी या अब हो रहा है। एक समय वाजपेयी ने खुद कहा था कि भाजपा को दूसरी पार्टियां अछूत समझती हैं।
1996 में 13 दिन की सरकार से इस्तीफा देने से पहले लोक सभा में वाजपेयी ने कहा था कि सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बावजूद अन्य पार्टियां अछूत मान कर भाजपा से गठबंधन करने से इनकार कर रही हैं। तब वाजपेयी ने यह भी कहा था कि ऐसा ज्यादा समय तक नहीं चलेगा और पार्टी आगे बढ़ेगी। वाजपेयी की बात सच भी साबित हुई। भाजपा फिर सत्ता में आई और वाजपेयी ही उस सरकार के मुखिया बने। फिर भी, भाजपा का वैसा विस्तार नहीं हुआ। 2004 में केंद्र से भी उसकी सत्ता चली गई और दस साल बाद ही लौटी। इस बीच भाजपा को काफी बदलना पड़ा। कुछ तो हालात के मद्देनजर और कुछ आगे बढ़ने की अपनी रणनीति के तहत।
बंगाल में कब कैसे बदली सत्ता
| चुनाव वर्ष | पहला दल (सीटें) | दूसरा दल (सीटें) | तीसरा दल (सीटें) | चौथा दल (सीटें) | अन्य | कुल सीटें |
| 1952 | INC (150) |
CPI (28) |
KMPP (15) |
AIFB (11) |
34 | 238 |
| 1957 | INC (152) |
CPI (46) |
PSP (21) |
AIFB (8) |
25 | 252 |
| 1962 | INC (157) |
CPI (50) |
AIFB (13) |
RSP (9) |
23 | 252 |
| 1967 | INC (127) |
CPI(M) (43) |
BC (34) |
CPI (16) |
60 | 280 |
| 1969 | CPI(M) (80) |
INC (55) |
BC (33) |
CPI (30) |
82 | 280 |
| 1971 | CPI(M) (113) |
INC(R) (105) |
CPI (13) |
SUCI (7) |
56 | 280 |
| 1972 | INC(R) (216) |
CPI (35) |
CPI(M) (14) |
RSP (3) |
26 | 280 |
| 1977 | CPI(M) (178) |
JP (29) |
AIFB (25) |
INC(R) (20) |
42 | 294 |
| 1982 | CPI(M) (174) |
INC(I) (49) |
AIFB (28) |
RSP (19) |
24 | 294 |
| 1987 | CPI(M) (187) |
INC(I) (40) |
AIFB (26) |
RSP (18) |
23 | 294 |
| 1991 | CPI(M) (182) |
INC (43) |
AIFB (29) |
RSP (18) |
22 | 294 |
| 1996 | CPI(M) (153) |
INC (82) |
AIFB (21) |
RSP (18) |
20 | 294 |
| 2001 | CPI(M) (143) |
AITC (60) |
INC (26) |
AIFB (25) |
40 | 294 |
| 2006 | CPI(M) (176) |
AITC (30) |
AIFB (23) |
INC (21) |
44 | 294 |
| 2011 | AITC (184) |
INC (42) |
CPI(M) (40) |
AIFB (11) |
17 | 294 |
| 2016 | AITC (211) |
INC (44) |
CPI(M) (26) |
BJP (3) |
10 | 294 |
| 2021 | AITC (215) |
BJP (77) |
ISF (1) |
GJM (1) |
0 | 294 |
बंगाल की बात करें तो भाजपा के जन्म से पहले ही वहां कांग्रेस का किला ढह चुका था। बंगाल वामपंथी गढ़ बन चुका था। 1977 में बंगाल में जो वामपंथी शासन कायम हुआ वह 2006 तक हिल नहीं पाया। इस बीच बीजेपी केंद्र और अपने जनाधार या मजबूत संभावनाओं वाले राज्यों में पैर जमाने की कोशिश करती रही। व्यावहारिक रूप से बंगाल उसकी प्राथमिकता सूची में आने की स्थिति में नहीं था।
एक कारण यह भी था कि बंगाल का किला भेदना बीजेपी के लिए आसान नहीं था। विचारधारा के आधार पर बंगाल के मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करना बहुत टेढ़ी खीर था। इसलिए बीजेपी ने वहां जमीन बनाने पर ताकत नहीं लगाई।
2011 में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को एक ऐसा मुद्दा (सिंगूर) मिला, जिसे भुना कर ममता बनर्जी ने वामपंथियों का किला ढहाने में कामयाबी पाई। इस बीच 2014 में बीजेपी के दिन भी पलटे। फिर बीजेपी भी बदली। पार्टी चलाने-बढ़ाने, चुनाव लड़ने, प्रचार करने का तरीका बदला और बीजेपी का विस्तार शुरू हुआ। बदले माहौल में बीजेपी ने बंगाल पर भी ध्यान देना शुरू किया और तीसरे चुनाव (2016, 2021, 2026) में ही पासा पलट दिया।



INC (150)
CPI (28)
KMPP (15)
AIFB (11)
PSP (21)
INC(R) (105)