दिल्ली में हाल ही में हुई एसी ब्लास्ट की घटना ने एक बार फिर एयर कंडिशनर के सुरक्षित उपयोग को लेकर लोगों को चिंता में डाल दिया है। इस हादसे के बाद उपभोक्ता अब केवल खरीददारी तक सीमित नहीं रहकर इसके सुरक्षित संचालन, मेंटेनेंस और संभावित जोखिमों को समझने में अधिक रुचि दिखा रहे हैं। उपभोक्ता व्यवहार में यह बदलाव बताता है कि लोग अब तकनीक के प्रति अधिक जिम्मेदार और जागरूक हो रहे हैं। इसी बढ़ती चिंता को देखते हुए सैमसंग के झारखंड सर्विस हेड राजेश कुमार ने एसी के सुरक्षित उपयोग से जुड़े महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। बताया कि एसी ब्लास्ट या स्पार्किंग की घटनाएं आमतौर पर गलत इंस्टॉलेशन, अनियमित मेंटेनेंस और लापरवाही से उपयोग के कारण होती हैं। इन्हें सही देखभाल व मेंटेनेंस से काफी हद तक रोका जा सकता है। सही उपयोग से बढ़ेगी एसी की उम्र एसी का इस्तेमाल सही तरीके से करना उसकी परफॉर्मेंस और सुरक्षा दोनों के लिए जरूरी है। उपयोग के बाद एसी को ठीक से बंद करना चाहिए। बेहतर एफिशिएंसी और बिजली बचत के लिए एसी को 24 डिग्री सेल्सियस पर चलाना उपयुक्त माना जाता है। कमरे के साइज अनुसार ही एसी का चयन करें, क्योंकि गलत क्षमता का एसी मशीन पर अतिरिक्त दबाव डालता है। आग-शॉर्ट सर्किट से बचने के आसान उपाय अगर शॉर्ट सर्किट की स्थिति बने तो एसी से तुरंत दूर हो जाएं और पानी का उपयोग बिल्कुल न करें, बल्कि फायर एक्सटिंग्विशर का प्रयोग करें। एसी के नीचे टीवी या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण नहीं रखने चाहिए, क्योंकि पानी की बूंदें या नमी गिरने से नुकसान हो सकता है। आउटडोर यूनिट (कंप्रेसर) को हमेशा छायादार जगह पर रखें, ताकि वह ज्यादा गर्म न हो। एसी के इंस्टॉलेशन में लापरवाही न की जाए एसी का पावर केबल कभी भी ज्वाइंट नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे स्पार्किंग और शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ जाता है। एसी की क्षमता (टन) के अनुसार सही एमएम का वायर इस्तेमाल करना जरूरी है, ताकि ओवरलोडिंग और वायर हीटिंग न हो। प्लग पॉइंट पर हमेशा एमसीबी (मिनी सर्किट ब्रेकर) लगवाएं। वोल्टेज उतार-चढ़ाव से बचाव के लिए स्टेबलाइजर लगाना भी जरूरी है। मेंटेनेंस में ढिलाई की तो बढ़ेगा खतरा एसी की नियमित देखभाल उसकी सुरक्षा और बेहतर प्रदर्शन के लिए जरूरी है। हर 4 से 6 महीने के भीतर सर्विसिंग करानी चाहिए, ताकि मशीन सही तरीके से काम करती रहे। सर्विसिंग हमेशा प्रशिक्षित और अधिकृत इंजीनियर से ही कराएं। इसके अलावा एसी में केवल कंपनी के ओरिजिनल पार्ट्स का ही उपयोग करें, ताकि किसी तरह का तकनीकी जोखिम न हो।


