US Iran Talks: होर्मुज स्ट्रेट में नाकाबंदी से ईरान को 4.8 अरब डॉलर का नुकसान, पेंटागन का बड़ा दावा

US Iran Talks: होर्मुज स्ट्रेट में नाकाबंदी से ईरान को 4.8 अरब डॉलर का नुकसान, पेंटागन का बड़ा दावा

US Iran Talks: मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ रहे तनाव का सीधा असर समुद्री व्यापार मार्गों पर दिखाई दे रहा है। खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग पर स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। ईरान ने जहां एक तरह इस समुद्री मार्ग को बंद कर दिया है, वहीं अमेरिका ने भी यहां नाकाबंदी कर दी है। इसी बीच पेंटागन की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी नाकाबंदी के कारण ईरान को करीब 4.8 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है।

ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखना अमेरिका का उद्देश्य

अमेरिकी रक्षा विभाग (DOD) के आकलन के अनुसार, ओमान की खाड़ी और आसपास के समुद्री मार्गों में चल रही कार्रवाई के चलते ईरान की तेल आय पर बड़ा असर पड़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका द्वारा लागू की गई इस रणनीति का उद्देश्य ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखना है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना द्वारा लागू की गई नाकाबंदी ने ईरान के तेल निर्यात को काफी हद तक प्रभावित किया है। पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने कहा कि यह अभियान प्रतिबंधित समुद्री व्यापार और ऊर्जा निर्यात को रोकने के लिए चलाया जा रहा है।

नाकाबंदी पूरी ताकत से काम कर रही – अमेरिका

पार्नेल ने पेंटागन प्रेस सचिव जोएल वाल्डेज के बयान का हवाला देते हुए कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका की नाकाबंदी पूरी ताकत से काम कर रही है और वह प्रभाव डाल रही है जिसकी हमने योजना बनाई थी। वाल्डेज ने आगे कहा कि हम ईरानी शासन की आतंकवाद और क्षेत्रीय अस्थिरता को फंड करने की क्षमता पर गंभीर प्रहार कर रहे हैं। हमारी सशस्त्र सेनाएं इस दबाव को लगातार बनाए रखेंगी।

फ्रीडम ऑफ नेविगेशन की स्थिति बहाल होने तक नाकाबंदी जारी

बता दें कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे अहम तेल परिवहन मार्ग माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की सैन्य या राजनीतिक गतिविधि का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ता है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस मार्ग पर उनका पूरा नियंत्रण है और नाकाबंदी तब तक जारी रहेगी जब तक फ्रीडम ऑफ नेविगेशन की स्थिति बहाल नहीं हो जाती।

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव ने दिया बड़ा बयान

इसी बीच अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने भी ईरानी नेतृत्व पर तीखा हमला बोलते हुए एक बड़ा बयान दिया है। बेसेंट ने कहा कि नाली के पाइप में रहने वाले चूहों के लिए बाहरी दुनिया को समझना मुश्किल होता है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान में डॉलर की कमी, खाद्य और ईंधन की राशनिंग जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय उनके खिलाफ हो चुका है।

ईरानी दूतावास ने किया पलटवार

अमेरिकी बयानबाजी पर ईरान की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया आई है। दक्षिण अफ्रीका स्थित ईरानी दूतावास ने पलटवार करते हुए कहा कि हर कोई जानता है कि आपने और आपके बॉस ने युद्ध हार दिया है। आपकी बातें दर्द से निकली हैं, जीत से नहीं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच 13 अप्रैल को अमेरिका ने इस्लामाबाद वार्ता विफल होने के बाद ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी लागू की थी। इसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव और बयानबाजी लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता का खतरा और गहरा हो गया है।

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