खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ED) का डायरेक्टर बताकर भोजपुर के DM तनय सुल्तानिया से ठगी की कोशिश करने वाले अभिषेक अग्रवाल का मॉडस ऑपरेंडी सामने आया है। वो अधिकारियों को अपने झांसे में लेने के लिए खुद को सीनियर IAS का साला बताता था। लग्जरी गाड़ियों में बैठकर अफसरों से मिलने जाता था और उन्हें महंगे गिफ्ट भी देता था। भोजपुर के डीएम से ठगी की कोशिश से पहले अभिषेक ने खुद को पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजय करोल बताकर 2022 में तत्कालीन डीजीपी एसके सिंघल को झांसे में लिया था। अभिषेक अग्रवाल तत्कालीन DGP एसके सिंघल को वाट्सऐप कॉल करता था। डीजीपी फोन उठाते ही उसे सर-सर बोलते थे। अभिषेक इतना शातिर था कि उसने डीजीपी को 40 से 50 बार कॉल किया, लेकिन सिंघल को पता तक नहीं चला। अभिषेक पटना के बुद्धा कॉलोनी के रहने वाला है। उसने एमबीए की पढ़ाई की है। अभिषेक से करीब 2.61 लाख रुपए कैश और मोबाइल बरामद हुआ है। पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है, जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। अभिषेक अग्रवाल कैसे अफसरों से दोस्ती करता था? ठगी के अलावा अभिषेक क्या करता था? भोजपुर के डीएम को कैसे और कब अभिषेक ने कॉल किया था? आखिर अभिषेक का काला चिट्ठा कैसे सामने आया? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। सबसे पहले जानिए कैसे अफसरों से दोस्ती करता था अभिषेक अभिषेक अग्रवाल ठगी के अलावा पेशे से टाइल्स कारोबारी था। जब पहली बार किसी अधिकारी को कॉल करता था तो उनकी खूब प्रशंसा करता था, अधिकारियों को ईमानदार बताता था। फिर धीरे-धीरे उनके करीब आ जाता था। जब अधिकारी अभिषेक से कंफर्टेबल हो जाता था तो वो महंगे टाइल्स, इटालियन मार्बल लेकर अफसरों घर पहुंच जाता था और अपने खर्च से उनके घरों में टाइल्स मार्बल लगवा देता था। इसके अलावा अभिषेक अग्रवाल IAS, IPS, जज और नेताओं के पास पहुंचने के लिए अपनी बड़ी गाड़ी और महंगे गिफ्ट देता था। गृह मंत्री का पीएस बनकर भी अफसरों को फोन करता था एक अधिकारी के मुताबिक, अभिषेक कई बार गृह मंत्री का पर्सनल सेक्रेटरी बनकर भी अफसरों को कॉल करता था। इसके अलावा, अफसरों को झांसे में लेने के लिए सोशल मीडिया का भी यूज करता था। बड़े-बड़े अधिकारियों, नेताओं के साथ फोटो क्लिक कराकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करता था, ताकि कोई उसे सोशल मीडिया पर सर्च करे तो लगे कि उसकी पहुंचे बड़े लोगों तक है। अभिषेक साल 2022 में जब तत्कालीन डीजीपी एसके सिंघल को कॉल करता था, तो उसने खुद को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजय करोल साबित करने के लिए वाट्सएप डीपी और ट्रू कॉलर पर उनकी तस्वीर लगाई थी, ताकि DGP को लगे कि वो मुख्य न्यायाधीश संजय करोल है। डीजीपी पर नाराज होकर धौंस दिखाता था अभिषेक पूछताछ में अभिषेक ने बताया था कि कई बार उसने डीजीपी पर नाराज होकर धौंस दिखाया था। उसके बाद अवैध शराब के मामले में डीजीपी ने आईपीएस अफसर आदित्य कुमार क्लीनचिट दिया गया था। अभिषेक ने ठगी के लिए तत्कालीन DGP संजीव कुमार सिंघल की तस्वीर और नाम का यूज किया था। उसने अपने एक वॉट्सऐप अकाउंट की डीपी पर DGP की तस्वीर लगाई थी। इसके बाद इस नंबर से उसने कई पुलिस अफसरों को मैसेज भी किया था। डीजीपी की तस्वीर देखकर अफसरों को भी लगता था कि ये नंबर एसके सिंघल का ही है। अभिषेक अपनी पहुंच तत्कालीन बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तार किशोर प्रसाद तक भी बताता था और कहता था कि वे उनके पड़ोसी हैं। 17 साल के लड़के से खुली थी अभिषेक की पूरी कहानी पटना के दीवान मोहल्ला झाऊगंज के रहने वाले 17 साल के राहुल कुमार के घर की स्थिति ठीक नहीं थी। उसके पिता शत्रुघ्न ठाकुर को साल 2015 में लकवा मार गया था, जिसके बाद से राहुल की मां मोहल्ले में ही लोगों के घर चौका बर्तन करती थी। लेकिन इतनी कमाई नहीं होती थी कि घर ठीक से चल पाए। इसलिए राहुल ने घर की आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा के सीएसपी में काम करने लगा। साथ ही पार्ट टाइम में मुर्गन कम्युनिकेशन मोबाइल की दुकान पर भी बैठने लगा। एक दिन अचानक राहुल के मोबाइल पर बिहार के आर्थिक अपराध इकाई की ओर से कॉल आया। राहुल ने अपना नाम और पता बताया। जब EOU के अफसरों ने राहुल से पूछताछ कि तो उसने बताया कि मेरे नाम से दो सिमकार्ड अलॉट हैं, लेकिन दोनों सिमकार्ड मेरे पास नहीं है। इसके बाद EOU के अफसरों ने उसे बताया कि तुम्हारे नंबर से किसी ने खुद को पटना हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस बताते हुए डीजीपी को फोन किया था। राहुल ने EOU के अफसरों को बताया कि मैं गौरव राज की मोबाइल दुकान पर पार्ट टाइम जॉब करता हूं। गौरव ने मेरे आधार कार्ड को लिंक करके अंगूठा का निशान लिया था, लेकिन सिमकार्ड नहीं दिया था। गौरव ने राहुल को बताया कि सिम एक्टिवेट नहीं हो सका है। राहुल ने EOU अधिकारियों से कहा कि ऐसा गौरव दो से तीन बार कर चुका है। राहुल को लेकर गौरव के पास पहुंचे EOU के अफसर राहुल से मिली जानकारी के बाद EOU की टीम उसे साथ लेकर गौरव के पास पहुंची। गौरव ने एक दूसरे लड़के शुभम का नाम बताया। गौरव ने बताया कि मैंने 5000 के एवज में शुभम को दो सिमकार्ड दिए थे। इसके बाद EOU के अफसर राहुल और गौरव को लेकर शुभम के पास पहुंचे। शुभम ने बताया कि मैं बोरिंग रोड स्थित रमेश जायसवाल की मोबाइल शॉप में काम करता हूं। रमेश ने ही मुझसे दो सिमकार्ड की मांग की थी। तब मैंने 5000 रुपए देकर गौरव राज से सिम मांगा था। गौरव, राहुल के आधार कार्ड का यूज कर सिमकार्ड निकाला था। तीनों लड़कों से पूछताछ के बाद EOU के अफसर रंजन जायसवाल तक पहुंची। यहां रंजन जायसवाल ने बताया कि अभिषेक अग्रवाल मेरे रेग्यूलर कस्टमर हैं। अभिषेक ने ही दो सिम के साथ दो मोबाइल देने को बोला था। उन्होंने कहा था कि सिम किसी और के नाम से निकलवा कर देना। किसी सीनियर पुलिस अधिकारी को देना है। राहुल, गौरव, शुभम, रंजन को लेकर EOU के अफसर पटना के बोरिंग रोड नागेश्वर कॉलोनी के निलय अपार्टमेंट में रहने वाले अभिषेक अग्रवाल के पास पहुंची। पहले तो अभिषेक अग्रवाल ने आनाकानी की। लेकिन जब EOU की टीम ने सख्ती दिखाई तो अभिषेक टूट गया। उसने बताया कि आईपीएस अधिकारी आदित्य कुमार से उसकी पुरानी दोस्ती है, उसे केस से बचाने के लिए ही पूरी कहानी रची थी। खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ED) का डायरेक्टर बताकर भोजपुर के DM तनय सुल्तानिया से ठगी की कोशिश करने वाले अभिषेक अग्रवाल का मॉडस ऑपरेंडी सामने आया है। वो अधिकारियों को अपने झांसे में लेने के लिए खुद को सीनियर IAS का साला बताता था। लग्जरी गाड़ियों में बैठकर अफसरों से मिलने जाता था और उन्हें महंगे गिफ्ट भी देता था। भोजपुर के डीएम से ठगी की कोशिश से पहले अभिषेक ने खुद को पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजय करोल बताकर 2022 में तत्कालीन डीजीपी एसके सिंघल को झांसे में लिया था। अभिषेक अग्रवाल तत्कालीन DGP एसके सिंघल को वाट्सऐप कॉल करता था। डीजीपी फोन उठाते ही उसे सर-सर बोलते थे। अभिषेक इतना शातिर था कि उसने डीजीपी को 40 से 50 बार कॉल किया, लेकिन सिंघल को पता तक नहीं चला। अभिषेक पटना के बुद्धा कॉलोनी के रहने वाला है। उसने एमबीए की पढ़ाई की है। अभिषेक से करीब 2.61 लाख रुपए कैश और मोबाइल बरामद हुआ है। पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है, जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। अभिषेक अग्रवाल कैसे अफसरों से दोस्ती करता था? ठगी के अलावा अभिषेक क्या करता था? भोजपुर के डीएम को कैसे और कब अभिषेक ने कॉल किया था? आखिर अभिषेक का काला चिट्ठा कैसे सामने आया? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। सबसे पहले जानिए कैसे अफसरों से दोस्ती करता था अभिषेक अभिषेक अग्रवाल ठगी के अलावा पेशे से टाइल्स कारोबारी था। जब पहली बार किसी अधिकारी को कॉल करता था तो उनकी खूब प्रशंसा करता था, अधिकारियों को ईमानदार बताता था। फिर धीरे-धीरे उनके करीब आ जाता था। जब अधिकारी अभिषेक से कंफर्टेबल हो जाता था तो वो महंगे टाइल्स, इटालियन मार्बल लेकर अफसरों घर पहुंच जाता था और अपने खर्च से उनके घरों में टाइल्स मार्बल लगवा देता था। इसके अलावा अभिषेक अग्रवाल IAS, IPS, जज और नेताओं के पास पहुंचने के लिए अपनी बड़ी गाड़ी और महंगे गिफ्ट देता था। गृह मंत्री का पीएस बनकर भी अफसरों को फोन करता था एक अधिकारी के मुताबिक, अभिषेक कई बार गृह मंत्री का पर्सनल सेक्रेटरी बनकर भी अफसरों को कॉल करता था। इसके अलावा, अफसरों को झांसे में लेने के लिए सोशल मीडिया का भी यूज करता था। बड़े-बड़े अधिकारियों, नेताओं के साथ फोटो क्लिक कराकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करता था, ताकि कोई उसे सोशल मीडिया पर सर्च करे तो लगे कि उसकी पहुंचे बड़े लोगों तक है। अभिषेक साल 2022 में जब तत्कालीन डीजीपी एसके सिंघल को कॉल करता था, तो उसने खुद को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजय करोल साबित करने के लिए वाट्सएप डीपी और ट्रू कॉलर पर उनकी तस्वीर लगाई थी, ताकि DGP को लगे कि वो मुख्य न्यायाधीश संजय करोल है। डीजीपी पर नाराज होकर धौंस दिखाता था अभिषेक पूछताछ में अभिषेक ने बताया था कि कई बार उसने डीजीपी पर नाराज होकर धौंस दिखाया था। उसके बाद अवैध शराब के मामले में डीजीपी ने आईपीएस अफसर आदित्य कुमार क्लीनचिट दिया गया था। अभिषेक ने ठगी के लिए तत्कालीन DGP संजीव कुमार सिंघल की तस्वीर और नाम का यूज किया था। उसने अपने एक वॉट्सऐप अकाउंट की डीपी पर DGP की तस्वीर लगाई थी। इसके बाद इस नंबर से उसने कई पुलिस अफसरों को मैसेज भी किया था। डीजीपी की तस्वीर देखकर अफसरों को भी लगता था कि ये नंबर एसके सिंघल का ही है। अभिषेक अपनी पहुंच तत्कालीन बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तार किशोर प्रसाद तक भी बताता था और कहता था कि वे उनके पड़ोसी हैं। 17 साल के लड़के से खुली थी अभिषेक की पूरी कहानी पटना के दीवान मोहल्ला झाऊगंज के रहने वाले 17 साल के राहुल कुमार के घर की स्थिति ठीक नहीं थी। उसके पिता शत्रुघ्न ठाकुर को साल 2015 में लकवा मार गया था, जिसके बाद से राहुल की मां मोहल्ले में ही लोगों के घर चौका बर्तन करती थी। लेकिन इतनी कमाई नहीं होती थी कि घर ठीक से चल पाए। इसलिए राहुल ने घर की आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा के सीएसपी में काम करने लगा। साथ ही पार्ट टाइम में मुर्गन कम्युनिकेशन मोबाइल की दुकान पर भी बैठने लगा। एक दिन अचानक राहुल के मोबाइल पर बिहार के आर्थिक अपराध इकाई की ओर से कॉल आया। राहुल ने अपना नाम और पता बताया। जब EOU के अफसरों ने राहुल से पूछताछ कि तो उसने बताया कि मेरे नाम से दो सिमकार्ड अलॉट हैं, लेकिन दोनों सिमकार्ड मेरे पास नहीं है। इसके बाद EOU के अफसरों ने उसे बताया कि तुम्हारे नंबर से किसी ने खुद को पटना हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस बताते हुए डीजीपी को फोन किया था। राहुल ने EOU के अफसरों को बताया कि मैं गौरव राज की मोबाइल दुकान पर पार्ट टाइम जॉब करता हूं। गौरव ने मेरे आधार कार्ड को लिंक करके अंगूठा का निशान लिया था, लेकिन सिमकार्ड नहीं दिया था। गौरव ने राहुल को बताया कि सिम एक्टिवेट नहीं हो सका है। राहुल ने EOU अधिकारियों से कहा कि ऐसा गौरव दो से तीन बार कर चुका है। राहुल को लेकर गौरव के पास पहुंचे EOU के अफसर राहुल से मिली जानकारी के बाद EOU की टीम उसे साथ लेकर गौरव के पास पहुंची। गौरव ने एक दूसरे लड़के शुभम का नाम बताया। गौरव ने बताया कि मैंने 5000 के एवज में शुभम को दो सिमकार्ड दिए थे। इसके बाद EOU के अफसर राहुल और गौरव को लेकर शुभम के पास पहुंचे। शुभम ने बताया कि मैं बोरिंग रोड स्थित रमेश जायसवाल की मोबाइल शॉप में काम करता हूं। रमेश ने ही मुझसे दो सिमकार्ड की मांग की थी। तब मैंने 5000 रुपए देकर गौरव राज से सिम मांगा था। गौरव, राहुल के आधार कार्ड का यूज कर सिमकार्ड निकाला था। तीनों लड़कों से पूछताछ के बाद EOU के अफसर रंजन जायसवाल तक पहुंची। यहां रंजन जायसवाल ने बताया कि अभिषेक अग्रवाल मेरे रेग्यूलर कस्टमर हैं। अभिषेक ने ही दो सिम के साथ दो मोबाइल देने को बोला था। उन्होंने कहा था कि सिम किसी और के नाम से निकलवा कर देना। किसी सीनियर पुलिस अधिकारी को देना है। राहुल, गौरव, शुभम, रंजन को लेकर EOU के अफसर पटना के बोरिंग रोड नागेश्वर कॉलोनी के निलय अपार्टमेंट में रहने वाले अभिषेक अग्रवाल के पास पहुंची। पहले तो अभिषेक अग्रवाल ने आनाकानी की। लेकिन जब EOU की टीम ने सख्ती दिखाई तो अभिषेक टूट गया। उसने बताया कि आईपीएस अधिकारी आदित्य कुमार से उसकी पुरानी दोस्ती है, उसे केस से बचाने के लिए ही पूरी कहानी रची थी।


