End H1B Visa Abuse Act US: अमेरिका में भारतीय पेशेवरों और छात्रों के ‘अमेरिकन ड्रीम’ पर अब तक का सबसे बड़ा संकट मंडरा रहा है। रिपब्लिकन सांसदों के एक प्रभावशाली समूह ने “एंड एच-1बी वीजा एब्यूज एक्ट ऑफ 2026” पेश किया है, जिसे इस वीजा कार्यक्रम के अंत की शुरुआत माना जा रहा है। चलिए जानते हैं… क्या हैइस बिल में…?
क्या है नया बिल और कौन है इसके पीछे?
रिपब्लिकन सांसद एली क्रेन द्वारा पेश किए गए इस बिल का समर्थन ब्रैंडन गिल, पॉल गोसर और एंडी ओगल्स जैसे 35 कट्टरपंथी सांसदों ने किया है। इस बिल का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी श्रमिकों के हितों की रक्षा के नाम पर मौजूदा वीजा व्यवस्था को पूरी तरह से बदलना है। इसके पीछे ‘फ्रीडम कॉकस’ नामक समूह है। यह लगभग 40-45 रिपब्लिकन सांसदों का एक ऐसा गुट है जो अपनी कट्टरपंथी और समझौता न करने वाली नीतियों के लिए जाना जाता है। ये सांसद कॉरपोरेट जगत के बजाय ‘आर्थिक राष्ट्रवाद’ को प्राथमिकता देते हैं।
बिल कैसे बदल देगा अमेरिकन ड्रीम पूरा करने का रास्ताः
यह बिल महज एक सुधार नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था का ‘रीसेट’ है। अभी तक एफ1 (छात्र) वीजा से ओपीटी ट्रेनिंग और फिर एच1-बी वीजा और इसके बाद ग्रीन कार्ड के जरिए अमेरिकन ड्रीम को पूरा करने का राजमार्ग जैसा रास्ता रहा है।
तीन साल की रोक: नए एच-1बी वीजा जारी करने पर तीन साल का पूर्ण प्रतिबंध।
कोटा में भारी कटौती: वार्षिक कोटा को 65,000 से घटाकर मात्र 25,000 करना।
न्यूनतम वेतन की शर्त: लॉटरी सिस्टम खत्म कर वेतन आधारित चयन, जिसमें न्यूनतम वेतन 200,000 डॉलर (लगभग 1.89 करोड़ रुपए) सालाना तय किया गया है।
छात्रों के लिए ‘ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग’ (ओपीटी) प्रोग्राम को पूरी तरह खत्म करने का प्रस्ताव।
एच-1बी धारकों के परिजनों (एच-4 वीजा) के काम करने पर रोक और इस एच-1बी वीजा से ग्रीन कार्ड की राह को बंद करने पर जोर दिया गया है।
एजेंसियों के जरिए भी एच1बी-वीजा भर्ती पूरी तरह से बंद करने का प्रावधान है।
अचानक विरोध तेज क्यों?
इसके पीछे तीन प्रमुख कारण हैं: सांसदों का तर्क है कि विदेशी छात्रों को सोशल सिक्योरिटी टैक्स में छूट मिलने से वे अमरीकियों के मुकाबले 15.3% सस्ते पड़ते हैं। विरोधियों का मानना है कि ओपीटी जैसे प्रोग्राम कांग्रेस की मंजूरी के बिना प्रशासनिक आदेशों से बढ़ाए गए हैं।
भारत के लिए लाभ भी और नुकसान भी
नुकसान: उन हजारों छात्रों के लिए रास्ता बंद हो जाएगा जिन्होंने शिक्षा ऋण लेकर अमेरिका जाने का सपना देखा है। एंट्री-लेवल पेशेवरों के लिए 2 लाख डॉलर सालाना का वेतन पाना लगभग नामुमकिन होगा।
लाभ (संभावित): इसे ‘ब्रेन रिगेन’ के अवसर के तौर पर देखा जा रहा है। यदि शीर्ष प्रतिभा अमेरिका नहीं जा पाएगी, तो वे भारत में रहकर स्टार्टअप और रिसर्च को मजबूत करेंगे। सिलिकॉन वैली की कंपनियां अपना काम भारत (बेंगलुरु/हैदराबाद) शिफ्ट कर सकती हैं।
कानून बनने की कितनी संभावना?
हालांकि यह बिल अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन ‘फ्रीडम कॉकस’ का बढ़ता प्रभाव और अमेरिका में बढ़ता ‘एंटी-इमिग्रेशन’ माहौल इसे गंभीर खतरा बनाता है। भारतीय परिवारों को अब केवल अमेरिका के भरोसे रहने के बजाय अन्य विकल्पों पर विचार करना होगा।


