Pre-Monsoon Rain: वैश्विक महंगाई और भू-राजनीतिक तनाव के बीच अगर भारत की अर्थव्यवस्था को कोई राहत दे सकता है, तो वो है अच्छी बारिश। इस बार मानसून से पहले ही ऐसे संकेत मिल रहे हैं, जो किसानों से लेकर बाजार तक सबके लिए राहत की खबर बन सकते हैं। मानसून (Monsoon) समय से पहले दस्तक दे सकता है। भारत मौसम विभाग यानी India Meteorological Department का कहना है कि इस साल मई में सामान्य से ज्यादा बारिश (Pre-Monsoon) हो सकती है। इतना ही नहीं, दक्षिण-पश्चिम मानसून 15 से 20 मई के बीच अंडमान-निकोबार पहुंच सकता है। अगर ऐसा होता है, तो खेती की तैयारी समय से पहले शुरू हो जाएगी और किसानों को बड़ा फायदा मिलेगा।
अच्छी बारिश मतलब खेतों में हरियाली और जेब में पैसा
अच्छी बारिश हुई तो किसान खुश और किसान खुश तो बाजार भी खुश। अच्छे मानसून से खेतों में फसल बेहतर होगी। ग्रामीण इलाकों में आमदनी बढ़ेगी। अच्छे मानसून से खाने-पीने की चीजें सस्ती हो सकती हैं। महंगाई घटेगी, लोगों की जेब में पैसा आएगा तो खपत भी बढ़ेगी, जिससे देश की इकोनॉमी को फायदा होगा। भारत की जीडीपी में खेती का योगदान करीब 15-16 फीसदी है और लगभग आधी आबादी इसी पर निर्भर है। इकोनॉमी को सपोर्ट मिलेगा तो शेयर बाजार में भी निवेश बढ़ेगा। ऐसे में मानसून की एक अच्छी शुरुआत पूरी अर्थव्यवस्था को सहारा दे सकती है।
GDP ग्रोथ को मिल सकता है बूस्ट
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर मानसून अच्छा रहा, तो देश की आर्थिक विकास दर में 0.2% से 0.4% तक की बढ़त हो सकती है। अभी FY27 के लिए ग्रोथ का अनुमान 6.5% से 6.8% के बीच है। ऐसे में अच्छी बारिश इस आंकड़े को और मजबूत कर सकती है।

GDP के सामने हैं ये चुनौतियां
जहां एक तरफ अच्छी बारिश की उम्मीद है, वहीं दूसरी तरफ कुछ चिंताएं भी हैं। पश्चिम एशिया के तनाव से महंगाई बढ़ रही है। खाने-पीने और एनर्जी की कीमतें ऊपर जा रही हैं। मार्च में रिटेल महंगाई बढ़कर 3.4% हो गई है। यानी बारिश राहत दे सकती है, लेकिन बाहरी हालात अभी भी चुनौती बने हुए हैं।
खरीफ की फसलों के लिए सुनहरा मौका
अगर मई में बारिश ज्यादा होती है, तो इसका सीधा फायदा खरीफ की फसलों को मिलेगा। मिट्टी में नमी बढ़ेगी। बुवाई जल्दी शुरू होगी। इससे दाल और तिलहन की खेती बढ़ सकती है। साथ ही सिंचाई का खर्च भी कम होगा और भूजल पर निर्भरता घटेगी।

गांवों से बढ़ेगी मांग
अच्छे मानसून का असर सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रहता। ट्रैक्टर और दोपहिया वाहनों की बिक्री बढ़ती है। FMCG कंपनियों की डिमांड बढ़ती है और ग्रामीण बाजार में तेजी आती है। अनुमान है कि इस साल ग्रामीण मांग 6-7% तक बढ़ सकती है।
अभी पूरी तस्वीर साफ नहीं
मानसून को लेकर मई के लिए अच्छी खबर है, लेकिन पूरे मानसून को लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं है। पहले के अनुमान के मुताबिक इस साल मानसून सामान्य से थोड़ा कम यानी करीब 92% रह सकता है। साथ ही अल नीनो का खतरा भी बना हुआ है, जो बारिश को कमजोर कर सकता है।


