‘हमारा सोना हमें वापस दो…’, भारत क्यों मांग रहा है इंग्लैंड से गोल्ड?

‘हमारा सोना हमें वापस दो…’, भारत क्यों मांग रहा है इंग्लैंड से गोल्ड?

India Gold Reserve: दुनिया के कई देश अपना सोना अपने देश में नहीं रखते। वे ट्रेड में सहूलियत और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अपना सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड या फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क जैसे बैंकों में रखते हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से दुनिया के कई देश चुपचाप अपना सोना वापस घर ला रहे हैं। वजह साफ है- जब हालात बिगड़ते हैं, तो असली ताकत उसी के पास होती है, जिसके पास उसका सोना सुरक्षित रखा हो। भारत इस दौड़ में सबसे आगे निकलता दिख रहा है।

भारत क्यों तेजी से वापस ला रहा अपना सोना?

पिछले कुछ सालों में भारत ने अपने गोल्ड रिजर्व को देश के भीतर लाने की रफ्तार काफी बढ़ा दी है। भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अब करीब 77 फीसदी सोना देश में ही रखा गया है। यानि लगभग 680 टन सोना भारत में है, जबकि बाकी हिस्सा अभी भी इंग्लैंड और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के पास रखा हुआ है। खास बात यह है कि सिर्फ 6 महीने में ही 100 टन से ज्यादा सोना वापस लाया गया है।

भरोसे का सवाल

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जिस तरह कई देशों की संपत्तियों पर रोक लगी, उसने दुनिया को सोचने पर मजबूर कर दिया। अब सवाल उठ रहा है कि अगर आपका सोना विदेश में है, तो असल में वह कितना आपका है? यही वजह है कि भारत समेत कई देश अब “अपने हाथ में अपना सोना” रखने की रणनीति पर चल रहे हैं। पहले माना जाता था कि विकसित देशों के वॉल्ट सबसे सुरक्षित हैं। अब सोच बदल रही है।

सोना बन रहा सुरक्षा कवच

पहले सोना सिर्फ खजाने का हिस्सा माना जाता था। अब इसे आर्थिक सुरक्षा का हथियार समझा जा रहा है। भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी भी बढ़कर करीब 16.7 फीसदी हो गई है। यानी साफ है कि देश अब सोने पर ज्यादा भरोसा कर रहा है।

लंदन-न्यूयॉर्क का दबदबा

सालों से दुनिया का सोना लंदन और न्यूयॉर्क में रखा जाता रहा है। न्यूयॉर्क में लाखों गोल्ड बार रखे हैं। वहीं, बैंक ऑफ इंग्लैंड दर्जनों देशों का सोना संभालता है। यहां से ट्रेडिंग और ट्रांजैक्शन करना आसान होता है। लेकिन अब कहानी बदल रही है। पहले जहां सुरक्षा सबसे बड़ा फैक्टर था, अब राजनीति भी उतनी ही अहम हो गई है।

दुनियाभर में बदल रही रणनीति

भारत अकेला नहीं है। कई देश धीरे-धीरे अपना सोना वापस ला रहे हैं। फ्रांस ने अपना सोना पेरिस शिफ्ट किया है। जर्मनी ने भी कुछ हिस्सा वापस लिया है, लेकिन अभी भी विदेश में रखा है। पोलैंड संतुलन बना रहा है। कुछ देश में, कुछ बाहर। वहीं, चेक गणराज्य अभी भी विदेश में रखने को ही बेहतर मानता है। यानि हर देश अपने हिसाब से जोखिम और फायदे को तौल रहा है। भारत ने पूरी तरह विदेश से नाता नहीं तोड़ा है। कुछ सोना अभी भी बाहर रखा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर आसानी से ट्रेडिंग हो सके। लेकिन धीरे-धीरे फोकस साफ है। ज्यादातर सोना अपने पास रखना।

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