चिंतपूर्णी कार हादसे में दिव्यांग-अजन्मे बच्चों ने खोया पिता:टायर फटा, कार अनियंत्रित हुई, 180 फीट गहरी खाई में गिरी, दो की जान गई

चिंतपूर्णी कार हादसे में दिव्यांग-अजन्मे बच्चों ने खोया पिता:टायर फटा, कार अनियंत्रित हुई, 180 फीट गहरी खाई में गिरी, दो की जान गई

हिमाचल प्रदेश के चिंतपूर्णी में भरवई के पास एक कार दुर्घटनाग्रस्त होकर 180 फीट गहरी खाई में गिरी। इस घटना में लुधियाना की एक बेटी, दिव्यांग बेटे व एक अजन्मे बच्चे ने अपने पिता को खो दिया। कार दुर्घटना इतनी खतरनाक थी कि लुधियाना के पंकू की पहचान भी कार के नंबर से हुई। वहीं कार में बैठे दूसरा व्यक्ति पूरी तरह से जल गया और उसकी अभी तक पहचान नहीं हो पाई। उधर, पुलिस टायर फटने को कार दुर्घटना का कारण मान रही है। पुलिस के अनुसार कार ढलान पर थी और अचानक टायर फटा जिससे कार अनियंत्रित हो गई और 180 फीट गहरी खाई में गिर गई। इस दुर्घटना में कार ड्राइवर रजनीश उर्फ पंकू और एक अन्य की मौत हो गई। पंकू का शव आधा जला हुआ था जबकि दूसरे का शव पूरी तरह से जल गया। पंकू की पहचान भी उसकी कार के नंबर से हुई और दूसरे की अभी तक पहचान नहीं हो सकी। पंकू की दो बच्चे हैं। एक बेटा और बेटी हैं। बेटा दिव्यांग है और वो चल फिर नहीं सकता। वहीं उसकी पत्नी छह महीने की गर्भवती है। पंकू अपने आने वाले बच्चे को लेकर बेहद उत्साहित था। परिजनों के मुताबिक 26 मई को पंकू का जन्म दिन भी था। टायर फटने से बेकाबू हुई कार उना के एसपी संजीव कुमार भाटिया की माने तो 29 अप्रैल को हुए इस हादसे का खौफनाक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। आशंका जताई जा रही है कि कार का टायर अचानक फट गया जिससे पंकू ने नियंत्रण खो दिया। कार सीधे खाई में जा गिरी और उसमें जोरदार धमाका हो गया। आग इतनी भयंकर थी कि पंकू और उसके दोस्त को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला और दोनों जिंदा जल गए। पंकू का शव तो घर पहुंच गया और उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया लेकिन उसके साथ गए दूसरे युवक का शव बुरी तरह झुलस जाने के कारण अब तक उसकी स्पष्ट पहचान नहीं हो पाई है। पुलिस प्रशासन दूसरे मृतक की शिनाख्त के प्रयास कर रहा है। पंकू के घर से निकलने से लेकर मौत की सूचना तक क्या क्या हुआ जानिए… ओला चलाकर करता था गुजारा परिवार मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा का रहने वाला यह परिवार लुधियाना के गोपाल नगर (टिब्बा रोड) पर रहता है भाई ने बताया की हम नीचे रहते है और छोटा भाई पहली मंजिल पर रहता है। पंकू की पत्नी भी हिमाचल के कांगड़ा की ही रहने वाली है। घर में पंकू के पिता (फैक्ट्री में दर्जी), मां, बड़ा भाई पिंकी (फैक्ट्री वर्कर), भाभी और पिंकी की दो बेटियां हैं। घर की तीनों महिलाएं (मां, भाभी और पत्नी) गृहिणी हैं। पंकू पेशे से टैक्सी ड्राइवर था और ओला में दूसरी गाड़ी चलाकर परिवार का पेट पालता था। जिस स्विफ्ट कार में यह हादसा हुआ, वह उसने 6 महीने पहले ही अपने शौक और निजी इस्तेमाल के लिए खरीदी थी। 26 मई को था जन्मदिन, पत्नी है 6 महीने की गर्भवती परिवार वाले पंकू के जन्मदिन (26 मई) की तैयारियों के बारे में सोच ही रहे थे कि अचानक यह मनहूस खबर आ गई। पंकू की पत्नी 6 महीने की गर्भवती है और उसे इस हालत में यह गहरा सदमा लगा है। उनका 4 साल का एक बेटा है जो जन्म से ही पैरालाइज्ड (दिव्यांग) है और हमेशा घर पर ही रहता है। इसके अलावा एक 6 साल की बेटी भी है। पंकू की मौत ने इन मासूमों के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए छीन लिया है।

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