जमुई के सिकंदरा विधानसभा क्षेत्र के सात बार विधायक एवं पूर्व मंत्री रामेश्वर पासवान को गुरुवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। जैसे ही उनका पार्थिव शरीर पटना से सिकंदरा पहुंचा, श्रद्धांजलि देने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। उनके आवास पर अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव शरीर रखा गया, जहां हर वर्ग के लोग समर्थक ही नहीं बल्कि विपक्षी भी उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे। माहौल बेहद गमगीन था और हर आंख नम नजर आ रही थी। विधायक-जदयू जिलाध्यक्ष ने दी श्रद्धांजलि श्रद्धांजलि देने वालों में झाझा विधायक दामोदर रावत, जदयू जिलाध्यक्ष शैलेंद्र महतो, भोला खान, अनुज सिंह, अंबिका यादव समेत कई जनप्रतिनिधि शामिल रहे। वहीं प्रशासनिक स्तर पर एडीएम रविकांत सिंहा, एसडीओ सौरभ कुमार, बीडीओ अतुल प्रसाद और थानाध्यक्ष विकास कुमार सहित अन्य अधिकारियों ने भी पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव नौआडीह ले जाया गया। रास्ते भर लोग सड़क किनारे खड़े होकर अपने प्रिय नेता के अंतिम दर्शन करते रहे और भावभीनी विदाई दी। नौआडीह पहुंचने पर उन्हें राजकीय सम्मान के तहत गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, जहां पुलिस जवानों ने राइफल झुकाकर सलामी दी। अंतिम संस्कार उनकी मां के स्मारक के पास संपन्न हुआ। 92 वर्षीय रामेश्वर पासवान का जीवन सादगी, विनम्रता और जनसेवा का प्रतीक रहा। उनके निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है और लोग उन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ याद कर रहे हैं। जमुई के सिकंदरा विधानसभा क्षेत्र के सात बार विधायक एवं पूर्व मंत्री रामेश्वर पासवान को गुरुवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। जैसे ही उनका पार्थिव शरीर पटना से सिकंदरा पहुंचा, श्रद्धांजलि देने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। उनके आवास पर अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव शरीर रखा गया, जहां हर वर्ग के लोग समर्थक ही नहीं बल्कि विपक्षी भी उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे। माहौल बेहद गमगीन था और हर आंख नम नजर आ रही थी। विधायक-जदयू जिलाध्यक्ष ने दी श्रद्धांजलि श्रद्धांजलि देने वालों में झाझा विधायक दामोदर रावत, जदयू जिलाध्यक्ष शैलेंद्र महतो, भोला खान, अनुज सिंह, अंबिका यादव समेत कई जनप्रतिनिधि शामिल रहे। वहीं प्रशासनिक स्तर पर एडीएम रविकांत सिंहा, एसडीओ सौरभ कुमार, बीडीओ अतुल प्रसाद और थानाध्यक्ष विकास कुमार सहित अन्य अधिकारियों ने भी पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव नौआडीह ले जाया गया। रास्ते भर लोग सड़क किनारे खड़े होकर अपने प्रिय नेता के अंतिम दर्शन करते रहे और भावभीनी विदाई दी। नौआडीह पहुंचने पर उन्हें राजकीय सम्मान के तहत गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, जहां पुलिस जवानों ने राइफल झुकाकर सलामी दी। अंतिम संस्कार उनकी मां के स्मारक के पास संपन्न हुआ। 92 वर्षीय रामेश्वर पासवान का जीवन सादगी, विनम्रता और जनसेवा का प्रतीक रहा। उनके निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है और लोग उन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ याद कर रहे हैं।


