टेक्सटाइल हब में नई ऊर्जा नीति की दस्तक: उद्योगों को मिली बड़ी राहत

वस्त्र नगरी के कपड़ा और स्पिनिंग मिलों के लिए बिजली नीति में बड़े बदलाव सामने आए हैं। कैप्टिव पावर पॉलिसी 2026 में किए गए नवीनतम संशोधनों ने कॉरपोरेट समूहों के लिए बिजली खपत और निवेश के नए रास्ते खोल दिए हैं। उद्योग जगत इसे बिजनेस फ्रेंडली कदम मान रहा है। इससे औद्योगिक शांति और विकास को गति मिलने की उम्मीद है।

प्रमुख संशोधन और औद्योगिक प्रभाव

नई नीति में अब होल्डिंग, सहायक और फेलो सहायक कंपनियों को एक ही कैप्टिव यूजर माना जाएगा। इससे बड़े औद्योगिक समूहों को अपनी विभिन्न इकाइयों के बीच बिजली संतुलन बनाने में आसानी होगी। पहले केवल सीधे इक्विटी निवेश को ही मान्यता प्राप्त थी, लेकिन अब ग्रुप स्ट्रक्चर के माध्यम से किए गए अप्रत्यक्ष निवेश को भी स्वामित्व का हिस्सा माना जाएगा।

कैप्टिव यूजर की परिभाषा में अब ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को भी शामिल कर लिया गया है। इससे उद्योगों में बैटरी आधारित बिजली बैकअप के मॉडल्स को बढ़ावा मिलेगा। जब तक वेरिफिकेशन की प्रक्रिया लंबित है, तब तक स्व-घोषणा के आधार पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त सरचार्ज नहीं लिया जाएगा। यह उद्योगों के लिए बड़ी कैश फ्लो राहत है।

अनुपालन और सख्ती: लापरवाही पड़ेगी भारी

नीति में जहां सुविधाएं दी गई हैं, वहीं अनुशासन को लेकर सख्ती भी बढ़ाई गई है। अब उपभोग को स्वामित्व के अनुपात तक ही सीमित कर दिया गया है। इससे इसका दुरुपयोग कम होगा। हालांकि, 26 प्रतिशत या उससे अधिक शेयर रखने वाले एंकर क्लाइंट्स के लिए इसमें छूट का विकल्प दिया गया है। यदि कोई इकाई कैप्टिव स्टेटस के नियमों को पूरा करने में विफल रहती है, तो अब केवल सरचार्ज ही नहीं, बल्कि उस पर ब्याज भी वसूला जाएगा। राज्य के भीतर की परियोजनाओं के लिए राज्य नोडल एजेंसी और एक से अधिक राज्यों से जुड़ी परियोजनाओं के लिए एनएलडीसी जांच करेगी।

फायदे के साथ जोखिम भी बढेगा

केएसईएस के अनुसार ये बदलाव निवेश के प्रवेश और निकास को गतिशील बनाएंगे। जहां एक ओर लेयर्ड होल्डिंग स्ट्रक्चर से निवेश आसान होगा, वहीं दूसरी ओर अनुपालन न करने पर वित्तीय जोखिम भी बढ़ेगा। उद्योगों को अब अपनी बिजली खपत और शेयर होल्डिंग के मिलान को लेकर अधिक अनुशासित रहना होगा।

आरके जैन, महासचिव मेवाड़चैम्बर ऑफ कासर्मसएण्ड इंडस्ट्री

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