फुटपाथ पर साड़ियां बेचने वाला लड़का कैसे बना हजारों करोड़ का मालिक? बॉलीवुड के ‘नंबर 1’ से है खास कनेक्शन

फुटपाथ पर साड़ियां बेचने वाला लड़का कैसे बना हजारों करोड़ का मालिक? बॉलीवुड के ‘नंबर 1’ से है खास कनेक्शन

Vashu Bhagnani Success Story: इन दिनों जैकी भगनानी अपने सिचुएशनशिप वाले कमेंट को लेकर चर्चा में हैं। आपको बता दें कि जैकी जाने माने फिल्म प्रोड्यूसर वाशु भगनानी के बेटे हैं। वही वाशु भगनानी जिन्होंने ‘कूली नंबर 1’, ‘हीरो नंबर 1’ और ‘बीवी नंबर 1’ जैसी सुपरहिट फिल्मों को प्रोड्यूस किया था। हाल ही में ‘जिंगाबाद’ पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान वाशु भगनानी ने अपने संघर्ष भरे दिनों, बिजनेस की शुरुआत और उस अहम मोड़ के बारे में खुलकर बताया, जिसने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी। अपने शुरुआती दौर को याद करते हुए उन्होंने कई दिलचस्प किस्से शेयर किए। आइए जानते हैं उन्होंने क्या कहा?

वाशु भगनानी की सफलता की कहानी उनकी जुबानी (Vashu Bhagnani Success Story)

वाशु भगनानी आज भले ही हजारों करोड़ों के मालिक हों, लेकिन उनकी सफलता का सफर बिल्कुल आसान नहीं रहा। कभी उन्होंने सड़कों पर खड़े होकर साड़ियां बेचीं, तो कभी छोटे-मोटे काम करके गुजारा किया। पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने कहा, “मैं फुटपाथ पर साड़ियां बेचा करता था। 13 साल की उम्र में, सड़क पर साड़ियां बेचने वाला एक लड़का यहां तक पहुंचा है, यह उसके लिए बहुत बड़ी बात है। यह मेरे और मेरे उनके बच्चों के लिए हमेशा यादगार रहेगा।” इसके साथ ही उन्होंने याद करते हुए कहा कि उस दौरान उनका परिवार कोलकाता में रहता था, जहां कम अवसर थे। उन्होंने कहा, “कलकत्ता में हम चार भाई थे, और वहां मौकों की थोड़ी कमी थी, इसलिए हमने सोचा कि एक भाई को दिल्ली चले जाना चाहिए।”

दिल्ली आना एक अच्छी शुरुआत साबित हुई

इसके आगे उन्होंने कहा, “जैसे ही मैं दिल्ली पहुंचा, मैंने प्रीत विहार में एक छोटा सा प्लॉट खरीदा, इसी तरह आनंद विहार और ऐसी ही दूसरी जगहों पर भी मैंने प्लॉट खरीदे, उन पर विला बनाए और उन्हें बेच दिया। फिर, शकरपुर में एक इमारत है जिसे ‘VIP बिल्डिंग’ कहते हैं- मैंने वहीं खड़े होकर चार महीने के अंदर उसे बनवा दिया। वहीं से कंस्ट्रक्शन की फील्ड में मेरी जिंदगी की शुरुआत हुई। जबकि कलकत्ता में हमारा काम कंस्ट्रक्शन का नहीं, बल्कि साड़ियों का था।”

मुंबई में किस्मत का एक नया मोड़

इसके आगे बात करते हुए उन्होंने बताया कि असल में मुंबई ही वो जगह थी जिसने उनके सफर को एक नई दिशा दी और पूरी तरह से बदल दिया। उन्होंने कहा, “फिर यह सब करते हुए, हम होली के दौरान मुंबई आए और फिर कभी दिल्ली की तरफ मुड़कर नहीं देखा।” मुंबई में किस्मत किस तरह बदली इस पर उन्होंने कहा, “यह किस्मत का खेल है, मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं बंबई (मुंबई) चला जाऊंगा। जब मैं होली के दौरान मुंबई आया, तो हम ओरिएंटल पैलेस नाम के एक होटल में रुके। फिर मैं यहीं रुक गया, एक प्लॉट खरीदा और कंस्ट्रक्शन का काम शुरू कर दिया। एक बार जब मैंने वहां शुरुआत की, तो मैंने तीन से चार सालों में 12–15 इमारतें बना दीं।”

इसके बाद ऑडियो कैसेट बनाने का काम शुरू किया और इसके बाद फिल्मी दुनिया में कदम रखा। मेरे जीवन में बड़ा मोड़ तब आया जब मैंने गोविंदा की फिल्म ‘आंखें’ देखी। उसके बाद मैंने ठान लिया कि मैं गोविंदा को साइन करूंगा। अगले ही दिन मैंने गोविंदा और डेविड को साइन कर लिया।” इसके बाद उन्होंने डेविड धवन और गोविंदा के साथ मिलकर कई सफल फिल्में बनाईं। बीते कई सालों में भगनानी ने कई तरह की फिल्में बनाई हैं। 1990 के दशक की ‘नंबर 1’ कॉमेडी फिल्मों से लेकर हाल की फिल्में जैसे ‘मिशन रानीगंज’, ‘गनपत’ और ‘बड़े मियां छोटे मियां’ तक उनकी खास फिल्मों में शामिल है।

सफलता की राह में जब लगा जोरदार झटका

साल 2002 में आई ‘ओम जय जगदीश’ से वाशु भगनानी को एक बहुत बड़ा आर्थिक झटका लगा। बता दें कि यह फिल्म एक्टर अनुपम खेर की बतौर डायरेक्टर पहली फिल्म थी। इसमें अनिल कपूर, अभिषेक बच्चन और फरदीन खान जैसे कई बड़े एक्टर्स ने अहम भूमिका निभाई थी। कुछ वक़्त पहले जैकी भगनानी ने एक इंटरव्यू में बताया था, इस फिल्म के फ्लॉप होने से उनके पापा को बहुत बड़ा झटका लगा था। मगर उन्होंने हार नहीं मानी और फिल्मों और बिजनेस के जरिए अपनी किस्मत फिर से बनाई, खासकर कंस्ट्रक्शन के क्षेत्र में, जिसे उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर UK तक फैलाया। रिपोर्ट्स की मानें तो आज की तारिख में वाशु भगनानी की टोटल नेटवर्थ 2500 करोड़ के करीब बताई गई है।

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