मराठी सीख लो वरना… ‘कैसा हराया’ वाली सहर शेख पर भड़की मनसे, कूरियर की ये खास चीज

मराठी सीख लो वरना… ‘कैसा हराया’ वाली सहर शेख पर भड़की मनसे, कूरियर की ये खास चीज

महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। एक तरफ ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य के फैसले के खिलाफ रिक्षा-टैक्सी यूनियनों ने महायुति सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है। वहीं, ठाणे के मुंब्रा क्षेत्र की चर्चित एमआईएम पार्षद सहर शेख (Sahar Shaikh AIMIM) अब मराठी नहीं बोलने के कारण राज ठाकरे की पार्टी मनसे के निशाने पर आ गईं हैं।

अपनी जीत के बाद ‘कैसे हराया’ वाले डायलॉग से रातों-रात मशहूर हुई सहर शेख अब भाषा को लेकर मुश्किलों में घिर गई हैं। फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मुद्दे पर पहले से ही विवादों में घिरी एआईएमआईएम नेता अब मराठी के बजाय हिंदी बोलने के कारण एक नए विवाद के केंद्र में आ गई हैं।

मराठी में जवाब देने से किया था इनकार

हाल ही में सहर शेख अहिल्यानगर दौरे पर थीं, जहां उन्होंने अपने ऊपर लगे जाली जाति प्रमाण पत्र के आरोपों को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान कुछ पत्रकारों ने उनसे मराठी में सवाल पूछे, लेकिन उन्होंने मराठी में जवाब देने से इनकार कर दिया और हिंदी में ही अपनी बात रखी।

एमआईएम नगरसेविका (पार्षद) सहर शेख ने पत्रकारों से कहा कि वह हिंदी में बोलने में सहज हैं, हालांकि उन्हें मराठी आती है, लेकिन उनका मराठी व्याकरण कमजोर है। ऐसे में अगर वह मराठी में बोलेंगी, तो उनसे कोई ऐसी गलती हो सकती है, जिससे विवाद खड़ा हो सकता है। इस दौरान सहर ने यह भी कहा कि भाषा के संबंध में कोई किसी पर दबाव नहीं डाल सकता।

यही बात महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को नागवार गुजरी और मामला तूल पकड़ गया।

मनसे का कड़ा रुख, कहा- मराठी आनी ही चाहिए

मनसे का कहना है कि महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर सख्ती बढ़ाई जा रही है और आम लोगों से लेकर ऑटो-टैक्सी चालकों तक के लिए मराठी अनिवार्य की जा रही है। ऐसे में एक जनप्रतिनिधि होने के नाते सहर शेख को मराठी बोलनी चाहिए।

इस विवाद के बीच अहिल्यानगर की मनसे की छात्र संगठन की नेता श्रद्धा खोंडे ने कुरियर के जरिए सहर शेख को मराठी बारहखड़ी और अंकलिपि की किताबें भेजीं हैं। साथ ही उन्होंने एक महीने के भीतर मराठी सीखने और अगली प्रेस कॉन्फ्रेंस में मराठी में बोलने की चेतावनी भी दी।

‘मराठी नहीं सीखी तो हम सिखाएंगे’

मनसे नेता ने यह भी कहा कि अगर सहर शेख मराठी नहीं सीखती हैं, तो मनसे के कार्यकर्ता मुंबई जाकर उन्हें अपनी शैली में मराठी भाषा सिखाएंगे। इस बयान के बाद विवाद और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

बता दें कि इस साल जनवरी में सहर शेख ने ठाणे महानगरपालिका चुनाव (TMC) में मुंब्रा के वार्ड 30 (बी) से जीत हासिल की थी। यह क्षेत्र एनसीपी (शरद पवार गुट) के दिग्गज नेता व स्थानीय विधायक जितेंद्र आव्हाड का गढ़ माना जाता है, लेकिन सहर ने वहां उनके उम्मीदवार को करारी शिकस्त दी। शेख ने तब विजय जुलूस में आव्हाड पर ‘कैसा हराया…’ तंज कसा था। जिसके बाद उन्हें राज्यभर में पहचान मिली।

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