जोधपुर। बिलाड़ा कृषि मंडी में इन दिनों असामान्य सन्नाटा देखने को मिल रहा है। जीरा और सौंफ के गिरते दामों ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता और निर्यात में आई कमी का सीधा असर स्थानीय मंडियों पर पड़ा है, जिसके चलते पिछले 15 दिनों में जीरे के भाव करीब 4 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक टूट गए हैं।
आमतौर पर अप्रैल महीने में बिलाड़ा, जैतारण, सोजत, पीपाड़ और रायपुर क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज लेकर मंडी पहुंचते हैं, लेकिन इस बार स्थिति उलट है। किसान मंडी आने से बच रहे हैं और केवल फोन पर भाव पूछकर ही संतोष कर रहे हैं। अधिकांश किसान अपनी उपज को रोककर बेहतर दाम मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

सौंफ के भाव भी 3 हजार गिरे
व्यापारियों के अनुसार, गुजरात की ऊंझा मंडी के बड़े खरीदारों ने हाल के दिनों में खरीद कम कर दी है, जिससे राजस्थान की मंडियों में मांग कमजोर पड़ गई है। इसका सीधा असर जीरे और सौंफ दोनों के दामों पर पड़ा है। सौंफ के भाव भी करीब 3 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक नीचे आ गए हैं।
आगे भी गिरावट की आशंका
मंडी व्यापारी धर्माराम जाजावत के मुताबिक, अप्रैल की शुरुआत में जीरा जहां लगभग 27 हजार रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा था, वहीं अब इसके दाम घटकर 20 से 23 हजार रुपए प्रति क्विंटल के बीच आ गए हैं। यदि बाजार की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो आगे और गिरावट की आशंका बनी हुई है।
जीरा की बंपर पैदावार
इस बार बंपर पैदावार भी कीमतों में गिरावट का बड़ा कारण बनी है। व्यापार संघ के सचिव जितेंद्र सागर का कहना है कि पिछले साल जीरे के दाम 35 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गए थे, जिससे उत्साहित होकर किसानों ने इस बार बड़े पैमाने पर बुवाई की। राजस्थान के साथ अन्य राज्यों में भी अच्छी पैदावार होने से बाजार में आपूर्ति बढ़ गई, जिससे कीमतों पर दबाव बना।
मंडी से किसान बना रहे दूरी
मंडी अध्यक्ष महावीरचंद भंडारी का कहना है कि भाव गिरने के कारण किसान फिलहाल मंडी से दूरी बनाए हुए हैं। वहीं, व्यापारी महेंद्र सिंह राठौड़ का मानना है कि जैसे ही दामों में सुधार होगा, मंडी में फिर से रौनक लौट आएगी। किसान बाबूलाल राठौड़ ने भी निराशा जताते हुए कहा कि इस बार जीरे के भाव ने उनकी उम्मीदों को झटका दिया है।


