गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड अंतर्गत अटका पूर्वी पंचायत के लक्षीबागी गांव में एक भीषण अग्निकांड हुआ। यहां गन्ने की खड़ी फसल में अचानक आग लग गई, जिससे लगभग पांच एकड़ में फैली पूरी फसल जलकर राख हो गई। इस घटना में गांव के 18 किसानों को लगभग 15 लाख रुपए का भारी नुकसान हुआ है। किसानों ने बताया कि उन्होंने कर्ज और अपनी जमा पूंजी लगाकर गन्ने की खेती की थी। फसल कटाई के लिए तैयार थी, लेकिन आग लगने से उनकी सालभर की मेहनत बर्बाद हो गई। आग लगने के कारणों का अब तक स्पष्ट पता नहीं चल सका है। आग की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और बाल्टी और पंप जैसे साधनों से आग बुझाने का प्रयास किया। हालांकि, आग की तीव्रता अधिक होने के कारण उस पर काबू पाना मुश्किल हो गया। दमकल विभाग को भी सूचना दी गई, लेकिन उनके पहुंचने तक काफी नुकसान हो चुका था। घटना की जानकारी मिलने पर स्थानीय जनप्रतिनिधि टेक नारायण साव, बिहारी लाल मेहता, रंजीत मेहता, रमेश मेहता और गोबिंद सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रभावित किसानों से मुलाकात कर स्थिति का जायजा लिया और प्रशासन से जल्द सर्वे कराकर पीड़ितों को मुआवजा देने की मांग की। जनप्रतिनिधियों ने किसानों को हरसंभव सहयोग का आश्वासन भी दिया। पीड़ित किसानों ने जिला प्रशासन से आपदा राहत कोष के तहत उचित मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय पर आर्थिक सहायता नहीं मिली तो उनके लिए अगली फसल की तैयारी करना मुश्किल हो जाएगा। किसानों ने संबंधित विभाग से नुकसान का आकलन कराने और शीघ्र राहत प्रदान करने की अपील की है। ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए प्रशासन स्तर पर ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि किसानों को इस तरह की भारी क्षति का सामना न करना पड़े। गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड अंतर्गत अटका पूर्वी पंचायत के लक्षीबागी गांव में एक भीषण अग्निकांड हुआ। यहां गन्ने की खड़ी फसल में अचानक आग लग गई, जिससे लगभग पांच एकड़ में फैली पूरी फसल जलकर राख हो गई। इस घटना में गांव के 18 किसानों को लगभग 15 लाख रुपए का भारी नुकसान हुआ है। किसानों ने बताया कि उन्होंने कर्ज और अपनी जमा पूंजी लगाकर गन्ने की खेती की थी। फसल कटाई के लिए तैयार थी, लेकिन आग लगने से उनकी सालभर की मेहनत बर्बाद हो गई। आग लगने के कारणों का अब तक स्पष्ट पता नहीं चल सका है। आग की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और बाल्टी और पंप जैसे साधनों से आग बुझाने का प्रयास किया। हालांकि, आग की तीव्रता अधिक होने के कारण उस पर काबू पाना मुश्किल हो गया। दमकल विभाग को भी सूचना दी गई, लेकिन उनके पहुंचने तक काफी नुकसान हो चुका था। घटना की जानकारी मिलने पर स्थानीय जनप्रतिनिधि टेक नारायण साव, बिहारी लाल मेहता, रंजीत मेहता, रमेश मेहता और गोबिंद सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रभावित किसानों से मुलाकात कर स्थिति का जायजा लिया और प्रशासन से जल्द सर्वे कराकर पीड़ितों को मुआवजा देने की मांग की। जनप्रतिनिधियों ने किसानों को हरसंभव सहयोग का आश्वासन भी दिया। पीड़ित किसानों ने जिला प्रशासन से आपदा राहत कोष के तहत उचित मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय पर आर्थिक सहायता नहीं मिली तो उनके लिए अगली फसल की तैयारी करना मुश्किल हो जाएगा। किसानों ने संबंधित विभाग से नुकसान का आकलन कराने और शीघ्र राहत प्रदान करने की अपील की है। ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए प्रशासन स्तर पर ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि किसानों को इस तरह की भारी क्षति का सामना न करना पड़े।


