दुर्ग में शुक्रवार को ऑल इंडिया बुद्धिस्ट फोरम छत्तीसगढ़ के बैनर तले सैकड़ों बौद्ध समाज के लोग कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। उन्होंने नारेबाजी करते हुए धार्मिक अधिकार, संविधान और सामाजिक अस्मिता से जुड़े मुद्दों पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टर प्रतिनिधि तहसीलदार क्षमा यदु को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सर्वोच्च न्यायालय, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग और बिहार सरकार के नाम एक ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन की प्रमुख मांग बोधगया स्थित महाबोधि महाविहार के नियंत्रण से संबंधित थी। फोरम ने बी.टी.एम.सी. एक्ट 1949 को रद्द करने और महाबोधि मंदिर का नियंत्रण बौद्धों को सौंपने की मांग की। भिलाई की अनामिका उपाध्याय के खिलाफ कार्रवाई की मांग संगठन का आरोप है कि जिस स्थान पर सिद्धार्थ गौतम बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था, वहां बौद्ध रीति-रिवाजों के अनुरूप पूजा नहीं हो रही है और ‘गैर-बौद्ध हस्तक्षेप’ बना हुआ है। प्रदर्शनकारियों ने इसे करोड़ों बौद्धों की आस्था का प्रश्न बताया। ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि बीटीएमसी एक्ट संविधान के अनुच्छेद 13 के विरुद्ध है। प्रदर्शन का दूसरा प्रमुख मुद्दा भिलाई की अनामिका उपाध्याय के खिलाफ कार्रवाई की मांग था। संगठन से जुड़े शैलेश कुमार ने आरोप लगाया कि अनामिका उपाध्याय ने डॉ. भीमराव अंबेडकर, संविधान और आरक्षण व्यवस्था के संबंध में अपमानजनक टिप्पणियां की हैं। उन्होंने अन्य धर्मों पर भी आपत्तिजनक बयान दिए हैं। शैलेश कुमार ने कहा कि ऐसी टिप्पणियां सामाजिक और धार्मिक तनाव भड़का सकती हैं, इसलिए अनामिका उपाध्याय पर धारा 152 के तहत राष्ट्रद्रोह का मामला दर्ज किया जाना चाहिए। इन मांगों ने प्रदर्शन को धार्मिक अधिकारों के साथ-साथ राजनीतिक और कानूनी विवाद के केंद्र में ला दिया। ‘देशद्रोह का मामला बनता है’, IG से भी शिकायत की तैयारी फोरम ने सिर्फ ज्ञापन देकर रुकने के संकेत नहीं दिए। संगठन ने साफ कहा कि वे पुलिस महानिरीक्षक से भी मुलाकात कर राष्ट्रद्रोह की धारा लगाने की मांग करेंगे। संगठन के कार्यकर्ताओं का कहना है कि मामला सिर्फ व्यक्तिगत बयानबाजी नहीं, बल्कि संविधान और सामाजिक सौहार्द के खिलाफ है, इसलिए कठोर कार्रवाई जरूरी है। अरविंद चौधरी और सविता बौद्ध बोले- ‘आस्था से समझौता नहीं’ संगठन से जुड़े अरविंद चौधरी और सविता बौद्ध ने कहा कि बौद्ध समाज अब अपने धार्मिक अधिकारों और सम्मान के मुद्दों पर चुप नहीं रहेगा। उनका कहना था- महाबोधि मंदिर पर बौद्धों का अधिकार सुनिश्चित किया जाए। बीटीएमसी एक्ट 1949 खत्म किया जाए। विवादित बयान देने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।


