पटना में गुरुवार को जन सुराज ने पार्टी कार्यालय में पीसी की। जिसमें बिहार सरकार की आर्थिक पर सवाल उठाए। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार वित्तीय कुप्रबंधन के कारण कर्ज में फंसती जा रही है। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। प्रदेश प्रवक्ता विवेक कुमार ने कहा कि बिहार सरकार एक बार फिर लगभग 12,000 करोड़ रुपए का नया कर्ज लेने की तैयारी कर रही है। उन्होंने बताया कि राज्य पहले से ही करीब 3.70 लाख करोड़ रुपए के कर्ज से दबा हुआ है। ऐसे में नया कर्ज राज्य की आर्थिक स्थिति को और कमजोर करेगा। विवेक कुमार ने आरोप लगाया कि सरकार ने बिना किसी ठोस वित्तीय योजना के चुनाव के दौरान कई लोकलुभावन वादे किए। इनमें मुफ्त बिजली, आर्थिक सहायता और वेतन वृद्धि जैसी घोषणाएं शामिल थीं। उन्होंने कहा कि इन वादों को पूरा करने के लिए सरकार ने संसाधनों का सही प्रबंधन नहीं किया, जिससे आज राज्य आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। 100 करोड़ सिर्फ ब्याज में खर्च होने का दावा जन सुराज नेताओं ने दावा किया कि बिहार पर कुल कर्ज अब करीब 4 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। इस पर सरकार को हर साल लगभग 40 हजार करोड़ रुपए ब्याज के रूप में चुकाने पड़ रहे हैं। इसका मतलब है कि प्रतिदिन करीब 100 करोड़ रुपए सिर्फ ब्याज भुगतान में खर्च हो रहे हैं, जिससे विकास कार्यों के लिए संसाधन सीमित हो गए हैं।
फिस्कल डेफिसिट को लेकर भी जताई चिंता प्रवक्ता ने कहा कि राज्य का फिस्कल डेफिसिट लगभग 12 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो सुरक्षित सीमा से काफी अधिक है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वास्तविक स्थिति को छुपाते हुए सब कुछ सामान्य दिखाने की कोशिश कर रही है, जबकि जमीनी हकीकत इससे अलग है।
कर्मचारियों और योजनाओं पर पड़ रहा असर उन्होंने आगे कहा कि आर्थिक संकट के चलते राज्य के कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है। साथ ही, छात्रों और लाभुकों को मिलने वाली विभिन्न योजनाओं की राशि भी समय पर जारी नहीं हो रही है। इससे शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। गरीब और कमजोर वर्गों पर सबसे ज्यादा असर पार्टी के वरिष्ठ नेता कैप्टन राजीव ने कहा कि वित्तीय कुप्रबंधन का सबसे ज्यादा असर गरीब, वृद्ध, दिव्यांग और जरूरतमंद नागरिकों पर पड़ रहा है। ये वर्ग पूरी तरह सरकारी योजनाओं पर निर्भर हैं, लेकिन योजनाएं ही ठप होती जा रही हैं। कैप्टन राजीव ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार का खजाना लगभग खाली हो चुका है और अब वह केंद्रीय सहायता पर निर्भर हो गई है। उन्होंने कहा कि आकस्मिक निधि का उपयोग भी सही तरीके से नहीं किया गया और चुनावी लाभ के लिए संसाधनों का दुरुपयोग हुआ।
विकास और रोजगार पर संकट के संकेत जन सुराज नेताओं ने चेतावनी दी कि वित्तीय संकट का असर राज्य के विकास कार्यों और रोजगार सृजन पर साफ दिखाई दे रहा है। अगर यही स्थिति बनी रही तो बेरोजगारी, अपराध और अराजकता में बढ़ोतरी हो सकती है। पार्टी ने सरकार से मांग की कि वह राज्य की वास्तविक वित्तीय स्थिति को जनता के सामने रखे और कर्ज पर निर्भरता कम करने के लिए ठोस आर्थिक नीति बनाए। पटना में गुरुवार को जन सुराज ने पार्टी कार्यालय में पीसी की। जिसमें बिहार सरकार की आर्थिक पर सवाल उठाए। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार वित्तीय कुप्रबंधन के कारण कर्ज में फंसती जा रही है। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। प्रदेश प्रवक्ता विवेक कुमार ने कहा कि बिहार सरकार एक बार फिर लगभग 12,000 करोड़ रुपए का नया कर्ज लेने की तैयारी कर रही है। उन्होंने बताया कि राज्य पहले से ही करीब 3.70 लाख करोड़ रुपए के कर्ज से दबा हुआ है। ऐसे में नया कर्ज राज्य की आर्थिक स्थिति को और कमजोर करेगा। विवेक कुमार ने आरोप लगाया कि सरकार ने बिना किसी ठोस वित्तीय योजना के चुनाव के दौरान कई लोकलुभावन वादे किए। इनमें मुफ्त बिजली, आर्थिक सहायता और वेतन वृद्धि जैसी घोषणाएं शामिल थीं। उन्होंने कहा कि इन वादों को पूरा करने के लिए सरकार ने संसाधनों का सही प्रबंधन नहीं किया, जिससे आज राज्य आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। 100 करोड़ सिर्फ ब्याज में खर्च होने का दावा जन सुराज नेताओं ने दावा किया कि बिहार पर कुल कर्ज अब करीब 4 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। इस पर सरकार को हर साल लगभग 40 हजार करोड़ रुपए ब्याज के रूप में चुकाने पड़ रहे हैं। इसका मतलब है कि प्रतिदिन करीब 100 करोड़ रुपए सिर्फ ब्याज भुगतान में खर्च हो रहे हैं, जिससे विकास कार्यों के लिए संसाधन सीमित हो गए हैं।
फिस्कल डेफिसिट को लेकर भी जताई चिंता प्रवक्ता ने कहा कि राज्य का फिस्कल डेफिसिट लगभग 12 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो सुरक्षित सीमा से काफी अधिक है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वास्तविक स्थिति को छुपाते हुए सब कुछ सामान्य दिखाने की कोशिश कर रही है, जबकि जमीनी हकीकत इससे अलग है।
कर्मचारियों और योजनाओं पर पड़ रहा असर उन्होंने आगे कहा कि आर्थिक संकट के चलते राज्य के कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है। साथ ही, छात्रों और लाभुकों को मिलने वाली विभिन्न योजनाओं की राशि भी समय पर जारी नहीं हो रही है। इससे शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। गरीब और कमजोर वर्गों पर सबसे ज्यादा असर पार्टी के वरिष्ठ नेता कैप्टन राजीव ने कहा कि वित्तीय कुप्रबंधन का सबसे ज्यादा असर गरीब, वृद्ध, दिव्यांग और जरूरतमंद नागरिकों पर पड़ रहा है। ये वर्ग पूरी तरह सरकारी योजनाओं पर निर्भर हैं, लेकिन योजनाएं ही ठप होती जा रही हैं। कैप्टन राजीव ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार का खजाना लगभग खाली हो चुका है और अब वह केंद्रीय सहायता पर निर्भर हो गई है। उन्होंने कहा कि आकस्मिक निधि का उपयोग भी सही तरीके से नहीं किया गया और चुनावी लाभ के लिए संसाधनों का दुरुपयोग हुआ।
विकास और रोजगार पर संकट के संकेत जन सुराज नेताओं ने चेतावनी दी कि वित्तीय संकट का असर राज्य के विकास कार्यों और रोजगार सृजन पर साफ दिखाई दे रहा है। अगर यही स्थिति बनी रही तो बेरोजगारी, अपराध और अराजकता में बढ़ोतरी हो सकती है। पार्टी ने सरकार से मांग की कि वह राज्य की वास्तविक वित्तीय स्थिति को जनता के सामने रखे और कर्ज पर निर्भरता कम करने के लिए ठोस आर्थिक नीति बनाए।


