श्रेयांस पारणा समिति, बेंगलूरु की ओर से आचार्य पार्श्वचंद्र एवं डॉ. पदमचंद्रमुनि ठाणा 6 एस. एस. जैन समणी प्रमुखा डॉ. श्रीनिधिश्री ठाणा 4 समणीवृंद के सान्निध्य में अक्षय तृतीया के अवसर पर 380 वर्षीतप आराधकों का पारणा महोत्सव पैलेस ग्राउंड स्थित त्रिपुरा वासिनी के विशाल प्रांगण में संपन्न हुआ।
डॉ पदमचंद्रमुनि ने प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की सुदीर्घ तपस्या के प्रति श्रद्धा एवं अनुकरण के रूप में की जाने वाली वर्षीतप की आराधना का महत्व बताते हुए इस आराधना को जिनशासन का गौरव एवं वर्षीतप आराधकों को संघ की शान बताया। कहा कि वर्षीतप आराधक इस सुदीर्घ तप से कर्मों को क्षय करने के साथ ही जिनशासन का भी गौरव बढ़ा रहे हैं।जयधुरंधरमुनि ने अक्षय तृतीया के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान द्वारा किए गए वर्षीतप की साधना के प्रति अहोभाव रखते हुए इसे अक्षुण्ण बनाने वाले वर्षीतप के आराधक तपस्वियों ने जिनशासन की धर्म ध्वजा लहराई है। जयपुरंदरमुनि ने कहा कि तप आत्मा को इन्द्रिय विजेता बनाता है।
इस अवसर पर जय आचार्य पद प्रदान दिवस एवं आचार्य लाल स्मृति दिवस के अवसर पर आचार्य जयमल एवं आचार्य लालचंद के भी गुणों पर प्रकाश डाला गया।जैन समणी निदेशिका डॉ. सुयशनिधिश्री ने आदिनाथ भगवान के दीक्षा उपरांत 400 दिनों के पश्चात श्रेयांस राजकुमार द्वारा प्रथम पारणे का रोचक वर्णन किया। इस अवसर पर मुमुक्षु संजय पुंगलिया ने संसार की असारता का वर्णन करते हुए 29अप्रेल को आयोजित दीक्षा महोत्सव में आने का सकल संघ को आमंत्रण दिया।
समिति के चेयरमैन रमेशचंद सियाल ने स्वागत किया। उन्होंने कहा कि लगभग 380 वर्षीतप आराधकों एवं महोत्सव में सम्मिलित होने वाले 7000 से अधिक श्रद्धालुओं ने समागम कर समिति का गौरव बढ़ाया है। जे. के. महावीरचंद चोरड़िया ने आचार्य पार्श्वचंद्र एवं साधु साध्वी समणीवृंद के साथ ही कार्यक्रम के संपूर्ण लाभार्थी एवं समस्त कार्यकर्ताओं तथा महोत्सव आयोजन में सह चेयरमैन मीठालाल लोढ़ा, राजेन्द्रकुमार नाहर के सुन्दर मार्गदर्शन हेतु आभार व्यक्त किया। आचार्य से अनेक वर्षों से वर्षीतप आराधक जय धुरंधरमुनि, नौ वर्षीतप आराधिका समणी प्रमुखा डॉ. श्रीनिधि ने दसवें वर्षीतप, समणी डॉ. सुगमनिधि ने तीसरे वर्षीतप एवं अनेक वर्षीतप आराधकों ने आगामी वर्षीतप आराधना हेतु प्रत्याख्यान ग्रहण किए।इस अवसर पर समिति के सह चेयरमैन मीठालाल लोढ़ा एवं समिति सदस्य रेवंतमल नाहर, पदमचंद रातड़िया, महावीरचंद श्रीश्रीमाल, महेंद्र चोरड़िया, कोमलचंद धोका, रोशनलाल नाहर, रमेशकुमार गुगलिया, उत्तमचंद कोठारी, महेंद्र कुमार मेहता, भंवरीलाल चोरड़िया, प्रकाशचंद टोडरवाल, पन्नालाल कोठारी, गुलाबचंद पगारिया, किशोरकुमार कर्नावट, महावीरचंद लुंकड़ के साथ ही कार्यकर्ताओं की विशेष सराहनीय सेवाएं रहीं। जे.पी. पी. अहिंसा रिसर्च फाउंडेशन को तपस्वियों के एकांतर पारणा हेतु निःशुल्क स्थल उपलब्ध कराने के लिए समिति की ओर से विशेष धन्यवाद दिया गया।
प्रातः 8.30 बजे तपस्वियों की शोभा यात्रा निकाली गई। संचालन मनोहरलाल डूंगरवाल ने किया।शोभायात्रा के पूर्व इक्षुरस के संपूर्ण लाभार्थी सज्जनदेवी विजयकुमार भागचंद श्रीश्रीमाल ने काउंटर का उद्घाटन किया। पारणा स्थल पर बनाई गई नगरियों का लाभार्थियों उत्तमचंद पदमराज रातड़िया, शांतिलाल लादुलाल पिपलिया, सुरेशकुमार मेहता,मीठालाल ज्ञानेंद्र कुमार मकाणा, कांतिलाल रमेशचंद सियाल, सुजानमाल किशोर कुमार कर्णावट के साथ ही श्रेयांस पालन समिति हुब्बल्ली व मैसूरु ने किया।
बेंगलूरु, हुबल्ल्ली, मैसूरु आदि के साथ ही श्रेयांस स्थानकवासी पारणा समिति त्यागराजनगर बेंगलूरु के कार्यकर्ताओं का सहयोग रहा।


