मुंबई (Mumbai Metro) की बहुप्रतीक्षित वडाला-कासारवडवली मेट्रो लाइन-4 को लेकर बड़ी खबर है। पिछले कई वर्षों से अटके इस प्रोजेक्ट में अब सबसे बड़ा अड़चन दूर हो गया है। विक्रोली के लक्ष्मीनगर मेट्रो स्टेशन के लिए जरूरी जमीन का अधिग्रहण पूरा हो चुका है, जिसके बाद अब इस आखिरी स्टेशन का निर्माण जल्द शुरू होने वाला है।
84% काम पूरा, आखिरी स्टेशन का काम शुरू होने की तैयारी
एमएमआरडीए के अनुसार, 32.32 किलोमीटर लंबी इस एलिवेटेड मेट्रो लाइन पर कुल 30 स्टेशन प्रस्तावित हैं। इनमें से 29 स्टेशनों का काम पहले ही पूरा होने की कगार पर है, लेकिन लक्ष्मीनगर स्टेशन का निर्माण काम शुरू तक नहीं हुआ था। अब जमीन मिलने के बाद इस स्टेशन का काम शुरू कर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
पूरे कॉरिडोर का लगभग 84 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। ऐसे में आखिरी स्टेशन बनते ही इस रूट पर मेट्रो सेवा शुरू होने का रास्ता साफ हो जाएगा।
164 करोड़ में जमीन अधिग्रहण, वर्षों पुराना विवाद खत्म
विक्रोली पूर्व की यह जमीन गोदरेज एंड बॉयस मैन्युफैक्चरिंग कंपनी लिमिटेड की थी। 2019 से इस जमीन को लेकर बातचीत चल रही थी, लेकिन कानूनी अड़चनों के कारण प्रक्रिया बार-बार अटकती रही। 2021 में जारी नोटिस को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिससे काम रुक गया था।
अब सभी बाधाएं दूर करते हुए एमएमआरडीए ने 16,762 वर्ग मीटर जमीन करीब 164.31 करोड़ रुपये में अधिग्रहित कर ली है। इसमें से 157.7 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है और 30 मार्च 2026 को जमीन का कब्जा भी मिल गया।
तीन चरणों में शुरू होगी मेट्रो सेवा
इस पूरी मेट्रो लाइन को तीन चरणों में चालू करने की योजना है। पहले चरण में गायमुख से कडबरी जंक्शन तक 10 किलोमीटर के हिस्से पर मेट्रो शुरू की जाएगी, जिसमें 10 स्टेशन होंगे। इस सेक्शन पर ट्रायल रन भी पूरे हो चुके हैं और 6 कोच वाली ट्रेन का परीक्षण किया गया है।
दूसरे चरण में कडबरी जंक्शन से गांधी नगर तक 21.5 किलोमीटर का हिस्सा अक्टूबर 2026 तक तैयार होने की संभावना है। वहीं, अंतिम चरण में गांधी नगर से वडाला तक का काम अक्टूबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
मुंबई-ठाणे कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव
इस मेट्रो कॉरिडोर के शुरू होने से दक्षिण मुंबई और ठाणे के बीच सीधी कनेक्टिविटी स्थापित होगी। इससे यात्रा समय में 50 से 75 प्रतिशत तक की कमी आने की उम्मीद है। साथ ही शहर की सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव भी काफी हद तक कम होगा।


