इजराइल पर प्रतिबंध लगाने की मांग, ब्रिटेन के 75 सांसदों ने बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ खोला मोर्चा

इजराइल पर प्रतिबंध लगाने की मांग, ब्रिटेन के 75 सांसदों ने बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ खोला मोर्चा

जब दुनिया का एक बड़ा हिस्सा गाजा और लेबनान की तबाही पर चुप्पी साधे बैठा है, तब ब्रिटेन की संसद में 75 सांसदों ने मिलकर इजराइल के खिलाफ एक ऐसा कदम उठाया जो सुर्खियों में आ गया।

इन सांसदों ने मांग की है कि वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी जमीन पर कब्जे की कोशिशों को रोकने के लिए इजराइल पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाएं।

जमीन की ‘चोरी’ को सरकारी मान्यता देने पर भड़के सांसद

दरअसल, इजराइल ने हाल ही में वेस्ट बैंक की फिलिस्तीनी जमीन को ‘सरकारी जमीन’ के रूप में दर्ज करना शुरू किया है। आसान भाषा में समझें तो यह ऐसा है जैसे कोई आपके खेत पर जबरदस्ती कब्जा करे और फिर सरकारी कागजों में उसे अपने नाम करवा ले।

सांसद रिचर्ड बर्गन ने इस मुद्दे पर संसद में एक जरूरी प्रस्ताव पेश किया जिसमें इस कदम को सीधे तौर पर गैरकानूनी और फिलिस्तीनी जमीन की चोरी बताया गया। 75 सांसदों ने इस प्रस्ताव पर दस्तखत किए।

अंतरराष्ट्रीय अदालत का फैसला भी हवा में उड़ाया

जुलाई 2024 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय यानी ICJ ने साफ कहा था कि फिलिस्तीनी इलाकों में इजराइल की मौजूदगी गैरकानूनी है और इसे बिना देर किए खत्म किया जाना चाहिए।

दुनिया की सबसे बड़ी अदालत के इस फैसले के बावजूद इजराइल ने न सिर्फ कब्जा जारी रखा बल्कि अब उसे कानूनी जामा पहनाने की कोशिश भी शुरू कर दी। ब्रिटिश सांसदों ने इसी बात पर सवाल उठाया कि जब ICJ कह चुका है तो ब्रिटेन सरकार चुप क्यों है।

सांसदों की मांग- व्यापार बंद करो, यात्रा पर पाबंदी लगाओ

इन सांसदों ने ब्रिटिश सरकार से कई ठोस कदम उठाने की मांग की है। पहली मांग यह है कि वेस्ट बैंक की बस्तियों में बनने वाले सामान पर पाबंदी लगाई जाए। यानी उन इलाकों से आने वाला कोई भी माल ब्रिटेन में न बिके जो कब्जे वाली जमीन पर बसे हैं।

दूसरी मांग है कि जो लोग और संस्थाएं इस कब्जे को मजबूत करने में लगे हैं उन पर यात्रा प्रतिबंध और संपत्ति जब्ती जैसे कड़े प्रतिबंध लगाए जाएं। तीसरी मांग यह है कि ब्रिटेन किसी भी तरह की वह मदद बंद करे जो इस कब्जे को जारी रखने में काम आती है।

ब्रिटेन की सरकार क्या करेगी?

75 सांसदों का समर्थन एक बड़ी बात है लेकिन ब्रिटेन की सरकार पर इसका कितना असर पड़ेगा यह देखना बाकी है। ब्रिटेन और अमेरिका की विदेश नीति अक्सर एक दिशा में चलती है और अभी अमेरिका इजराइल के साथ खड़ा है। ऐसे में यह प्रस्ताव कानून बनेगा या बस कागजों में रहेगा, यह तो वक्त ही बताएगा।

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