6.5 लाख का स्वागत द्वार निर्माण के दौरान ढहा:अररिया में 6 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं, घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप

6.5 लाख का स्वागत द्वार निर्माण के दौरान ढहा:अररिया में 6 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं, घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप

अररिया के महादेव चौक पर नगर परिषद द्वारा 6 लाख 50 हजार रुपए की लागत से निर्माणाधीन एक स्वागत द्वार ढह गया। स्थानीय लोगों ने निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाया है। यह घटना छह दिन पहले हुई थी। प्रवेश द्वार, जिस पर “अतिथि देवो भव” लिखवाने की योजना थी, निर्माण के दौरान ही गिर गया। लोगों का कहना है कि कमजोर निर्माण के कारण यह हादसा हुआ। छह दिन बाद भी नहीं हुई कार्रवाई घटना के छह दिन बीत जाने के बाद भी विभागीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे स्थानीय लोगों में रोष है। वे इस मामले को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। नगर परिषद के उप मुख्य पार्षद गौतम साह ने बताया कि गेट पूरी तरह नहीं गिरा। बल्कि ऊपर लगा शटरिंग एजेंसी और इंजीनियर के निरीक्षण न करने तथा कमजोर खूंटे के सहारे होने के कारण ढह गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पिलर अभी भी मजबूती से खड़े हैं। मुख्य पार्षद के निर्देश पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है और निर्माण कार्य फिलहाल रोक दिया गया है। ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग यह घटना सरकारी योजनाओं में गुणवत्ता और पारदर्शिता की कमी को उजागर करती है। स्थानीय लोग भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही दोषियों पर की जाने वाली कार्रवाई स्पष्ट हो पाएगी। अररिया के महादेव चौक पर नगर परिषद द्वारा 6 लाख 50 हजार रुपए की लागत से निर्माणाधीन एक स्वागत द्वार ढह गया। स्थानीय लोगों ने निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाया है। यह घटना छह दिन पहले हुई थी। प्रवेश द्वार, जिस पर “अतिथि देवो भव” लिखवाने की योजना थी, निर्माण के दौरान ही गिर गया। लोगों का कहना है कि कमजोर निर्माण के कारण यह हादसा हुआ। छह दिन बाद भी नहीं हुई कार्रवाई घटना के छह दिन बीत जाने के बाद भी विभागीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे स्थानीय लोगों में रोष है। वे इस मामले को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। नगर परिषद के उप मुख्य पार्षद गौतम साह ने बताया कि गेट पूरी तरह नहीं गिरा। बल्कि ऊपर लगा शटरिंग एजेंसी और इंजीनियर के निरीक्षण न करने तथा कमजोर खूंटे के सहारे होने के कारण ढह गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पिलर अभी भी मजबूती से खड़े हैं। मुख्य पार्षद के निर्देश पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है और निर्माण कार्य फिलहाल रोक दिया गया है। ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग यह घटना सरकारी योजनाओं में गुणवत्ता और पारदर्शिता की कमी को उजागर करती है। स्थानीय लोग भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही दोषियों पर की जाने वाली कार्रवाई स्पष्ट हो पाएगी।  

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