भदोही पुलिस ने साइबर फ्रॉड के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपए की ठगी करने वाले एक गिरोह का खुलासा किया है। इस मामले में साइबर क्राइम थाना पुलिस ने तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। बताया जा रहा है कि गिरफ्तार किए गए आरोपी सरकारी योजनाओं और लोन दिलाने के नाम पर लोगों के साथ ठगी किया करते थे। पुलिस के मुताबिक, अब तक जांच में 10 करोड़ रुपए की ठगी किए जाने का मामला सामने आ चुका है।
ज्ञानपुर पुलिस ने दर्ज किया था मुकदमा
दरअसल, ज्ञानपुर थाना क्षेत्र के बलीपुर के रहने वाले अमन कुमार बिंद ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि परिवार में थोड़ी पैसों की दिक्कत थी और इसी के लिए वह लोन लेना चाहते थे। इसी बीच उनकी कुछ लोगों से मुलाकात हुई और उन लोगों ने उनका और उनकी बहन का खाता बैंक में खुलवा दिया। उन्होंने बताया कि इस दौरान उन लोगों ने बैंक का पासबुक, एटीएम कार्ड और खाते से लिंक मोबाइल नंबर को भी अपने पास रख लिया। पीड़ित अमन ने बताया कि जब उनसे दस्तावेज मांगने लगे तो आरोपियों ने उन्हें धमकी देना शुरू कर दिया।
इस घटना की जानकारी उन्होंने पुलिस को दी और पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी। पुलिस की जांच में सामने आया कि यह गिरोह सुनियोजित तरीके से कम पढ़े लिखे लोगों और ग्रामीण क्षेत्र के रहने वाले लोगों को अपना निशाना बनाता था। गिरोह के सदस्य लोगों को सरकारी योजनाओं और लोन दिलाने का झांसा देते थे और बैंक में खाता खुलवाकर उसके दस्तावेज अपने पास रख लेते थे। आरोपी है कि उन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए किया जाता था।
सोशल मीडिया पर साझा करते थे जानकारी
पुलिस ने बताया कि गिरोह के सदस्य व्हाट्सएप, टेलीग्राम और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए एक दूसरे से बातचीत करते थे और खातों की जानकारी साझा किया करते थे। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ठगी करने के लिए निवेश, ऑनलाइन शॉपिंग और क्रेडिट कार्ड के नाम पर मालवेयर एपीके फाइल भेजते थे और इन्हीं के जरिए पीड़ित व्यक्तियों के खाते से पैसे निकाल लिए जाते थे।
पुलिस ने इस मामले में गोपीगंज ओवर ब्रिज के पास से अंशुल मिश्रा, मोहम्मद शोएब और कपिल रावत को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से चार एंड्रॉयड फोन बरामद हुए हैं। पुलिस की छानबीन में इस बात की जानकारी हुई है कि इनमें 200 से अधिक बैंक खातों की लिस्ट थी और इन खातों के खिलाफ देश भर के विभिन्न शहरों में 500 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं।
ऐसे करते थे पैसे की निकासी
गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने बताया कि वे पैसे निकालने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करते थे। लखनऊ के मोहनलालगंज स्थित एक पेट्रोल पंप पर जाकर वहां पॉश मशीन के जरिए ट्रांजैक्शन कर कैश लिया जाता था। उन्होंने बताया कि वहां काम करने वाला व्यक्ति उनका ही आदमी था। आरोपियों के मुताबिक, पिछले साल भर में उन्होंने 10 लाख रुपए से अधिक की निकासी की है।
पुलिस ने बताया कि यह एक संगठित गिरोह है और इसमें कई लोग शामिल हैं। इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। इस मामले में जो भी आरोपी शामिल है, उन्हें भी चिन्हित कर जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।


