कुलपति बोले, राष्ट्र की आधारशिला है नारी सशक्तिकरण:वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में नारी शक्ति वंदन कार्यक्रम में महिलाओं का सम्मान

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के योग साधना केंद्र में गुरुवार को “नारी शक्ति वंदन अधिनियम-प्रचार अभियान” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम ने नारी सशक्तिकरण के प्रति जागरूकता और प्रतिबद्धता का सशक्त संदेश दिया गया। अध्यक्षीय उद्बोधन में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि नारी शक्ति राष्ट्र की आधारशिला है और महिलाओं की सक्रिय सहभागिता के बिना लोकतंत्र की कल्पना अधूरी है। उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महिलाओं को राजनीतिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया। मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद प्रचार्या डॉ. मिथिलेश सिंह (अग्रसेन महिला पीजी कॉलेज) ने कहा कि नारी शिक्षा और आत्मनिर्भरता ही सशक्त समाज का मूल आधार है, तथा इस प्रकार के अभियान महिलाओं में आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास करते हैं। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन के संदर्भ में काशी की परंपरा का उल्लेख करते हुए ‘नमः पार्वती पतये हर-हर महादेव’ का उच्चारण किया जाता है।
महिलाओं को सिर्फ अधिकार ही नहीं मंच की जरूरत’ राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, चौकाघाट की प्राचार्या डॉ. नीलम गुप्ता ने कहा कि महिलाओं को केवल अधिकार ही नहीं, बल्कि अवसर और मंच भी मिलना आवश्यक है, ताकि वे समाज और राष्ट्र निर्माण में अपनी प्रभावी भूमिका निभा सकें। आज समाज के साथ-साथ परिवार भी महिलाओं को उचित सम्मान और महत्व देने लगा है। उन्होंने कहा कि यदि परिवार का सहयोग और प्रोत्साहन न मिला होता, तो आज वह आज चिकित्सक व प्राचार्य नहीं बन सकती थीं। । यह परिवर्तन समाज में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और उनके सशक्तिकरण का सजीव प्रमाण है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। कार्यक्रम की नोडल अधिकारी प्रो. विद्या कुमारी ने सभी के प्रति आभार जताया। संचालन डॉ श्रृंगध्रा ने किया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ सुमिता ने किया। इस दौरान प्रो दिनेश कुमार गर्ग, प्रो अमित कुमार शुक्ल, डॉ विमल कुमार त्रिपाठी आदि रहे।

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