किशनगंज सदर थाना क्षेत्र के बेलवा स्थित सूफिया चैरिटेबल ट्रस्ट के नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। सोमवार शाम एक मरीज की मौत के बाद यह मामला उजागर हुआ। परिजनों ने इलाज के नाम पर मरीजों के साथ मारपीट और अवैध उगाही का आरोप लगाया है। जांच में पता चला कि केंद्र में 30 मरीज भर्ती थे, लेकिन यहां कोई डॉक्टर, काउंसलर या प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद नहीं था। यह केंद्र बिना पंजीकरण और कमर्शियल परमिशन के चलाया जा रहा था, जबकि नशा मुक्ति केंद्र के लिए व्यावसायिक अनुमति अनिवार्य है। भवन भी आवासीय था। सोमवार शाम केंद्र में भर्ती एक मरीज की मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि मरीज के साथ मारपीट की गई थी। मौत के बाद मामले को पंचायत के माध्यम से दबाने का प्रयास किया गया, लेकिन मालदा जिला पदाधिकारी के संज्ञान में आने पर सिविल सर्जन ने जांच के आदेश दिए। किशनगंज सदर पीएचसी की प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने केंद्र का निरीक्षण किया और अपनी रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताएं पाईं। रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र में न तो डॉक्टर, न योग्य काउंसलर और न ही प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ उपलब्ध था। बेड चार्ज के नाम पर रकम वसूली सूत्रों के मुताबिक, यहां ‘इलाज’ के नाम पर केवल खाना-पूरी की जा रही थी और बेड चार्ज के नाम पर मोटी रकम वसूली जा रही थी। कई परिजनों ने बताया कि भर्ती होने के बावजूद मरीज नशा नहीं छोड़ पा रहे थे। मरीजों के साथ मारपीट और अनुचित व्यवहार के भी आरोप लगे हैं। केंद्र में पर्याप्त जगह, रोशनी या बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव था। अनीता कंबर नाम की महिला इस केंद्र को संचालित कर रही है। विभागीय नियमों का पालन तो दूर, यहां पंजीकरण तक नहीं है। बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार, नशा मुक्ति केंद्र संचालित करने के लिए अनिवार्य रूप से पंजीकरण, योग्य डॉक्टर, काउंसलर, प्रशिक्षित स्टाफ और कमर्शियल भवन की अनुमति जरूरी है। मरीजों से लिए जाते थे ज्यादे रुपये लेकिन सूफिया चैरिटेबल ट्रस्ट का यह केंद्र इन सभी मानकों पर खरा नहीं उतरता। जांच टीम ने पाया कि मरीजों से भारी भरकम राशि ली जा रही थी, जबकि इलाज नाममात्र का था। स्थानीय स्तर पर यह केंद्र लंबे समय से चल रहा था, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई सख्ती नहीं बरती गई। केंद्र को तुरंत सील करने की मांग अब मरीज की मौत के बाद मामला सुर्खियों में आने पर जांच शुरू हुई है। स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को अब इस केंद्र के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि अन्य मरीजों की जान को खतरा न रहे।परिजनों की मांग है कि केंद्र को तुरंत सील किया जाए, दोषियों पर मुकदमा दर्ज हो और मृतक के परिवार को न्याय मिले। साथ ही अन्य भर्ती मरीजों को सुरक्षित स्थानांतरित किया जाए। यह मामला किशनगंज जिले में नशा मुक्ति केंद्रों की व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है। क्या इलाज के नाम पर मरीजों का शोषण आम बात बन गई है? प्रशासन अब कितनी जल्दी कार्रवाई करता है, यह देखना बाकी है। किशनगंज सदर थाना क्षेत्र के बेलवा स्थित सूफिया चैरिटेबल ट्रस्ट के नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। सोमवार शाम एक मरीज की मौत के बाद यह मामला उजागर हुआ। परिजनों ने इलाज के नाम पर मरीजों के साथ मारपीट और अवैध उगाही का आरोप लगाया है। जांच में पता चला कि केंद्र में 30 मरीज भर्ती थे, लेकिन यहां कोई डॉक्टर, काउंसलर या प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद नहीं था। यह केंद्र बिना पंजीकरण और कमर्शियल परमिशन के चलाया जा रहा था, जबकि नशा मुक्ति केंद्र के लिए व्यावसायिक अनुमति अनिवार्य है। भवन भी आवासीय था। सोमवार शाम केंद्र में भर्ती एक मरीज की मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि मरीज के साथ मारपीट की गई थी। मौत के बाद मामले को पंचायत के माध्यम से दबाने का प्रयास किया गया, लेकिन मालदा जिला पदाधिकारी के संज्ञान में आने पर सिविल सर्जन ने जांच के आदेश दिए। किशनगंज सदर पीएचसी की प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने केंद्र का निरीक्षण किया और अपनी रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताएं पाईं। रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र में न तो डॉक्टर, न योग्य काउंसलर और न ही प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ उपलब्ध था। बेड चार्ज के नाम पर रकम वसूली सूत्रों के मुताबिक, यहां ‘इलाज’ के नाम पर केवल खाना-पूरी की जा रही थी और बेड चार्ज के नाम पर मोटी रकम वसूली जा रही थी। कई परिजनों ने बताया कि भर्ती होने के बावजूद मरीज नशा नहीं छोड़ पा रहे थे। मरीजों के साथ मारपीट और अनुचित व्यवहार के भी आरोप लगे हैं। केंद्र में पर्याप्त जगह, रोशनी या बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव था। अनीता कंबर नाम की महिला इस केंद्र को संचालित कर रही है। विभागीय नियमों का पालन तो दूर, यहां पंजीकरण तक नहीं है। बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार, नशा मुक्ति केंद्र संचालित करने के लिए अनिवार्य रूप से पंजीकरण, योग्य डॉक्टर, काउंसलर, प्रशिक्षित स्टाफ और कमर्शियल भवन की अनुमति जरूरी है। मरीजों से लिए जाते थे ज्यादे रुपये लेकिन सूफिया चैरिटेबल ट्रस्ट का यह केंद्र इन सभी मानकों पर खरा नहीं उतरता। जांच टीम ने पाया कि मरीजों से भारी भरकम राशि ली जा रही थी, जबकि इलाज नाममात्र का था। स्थानीय स्तर पर यह केंद्र लंबे समय से चल रहा था, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई सख्ती नहीं बरती गई। केंद्र को तुरंत सील करने की मांग अब मरीज की मौत के बाद मामला सुर्खियों में आने पर जांच शुरू हुई है। स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को अब इस केंद्र के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि अन्य मरीजों की जान को खतरा न रहे।परिजनों की मांग है कि केंद्र को तुरंत सील किया जाए, दोषियों पर मुकदमा दर्ज हो और मृतक के परिवार को न्याय मिले। साथ ही अन्य भर्ती मरीजों को सुरक्षित स्थानांतरित किया जाए। यह मामला किशनगंज जिले में नशा मुक्ति केंद्रों की व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है। क्या इलाज के नाम पर मरीजों का शोषण आम बात बन गई है? प्रशासन अब कितनी जल्दी कार्रवाई करता है, यह देखना बाकी है।


