5 महीने से भटक रही विधवा को मिली राहत, खबर छपने के तुरंत बाद जारी हुई 25 लाख की ग्रेच्युटी और पेंशन

5 महीने से भटक रही विधवा को मिली राहत, खबर छपने के तुरंत बाद जारी हुई 25 लाख की ग्रेच्युटी और पेंशन

ऑन ड्यूटी जान गंवाने वाले शिक्षक की पेंशन के लिए पिछले 5 महीने से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही विधवा चंचल कंवर को आखिर न्याय मिल गया है। राजस्थान पत्रिका की ओर से मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद शिक्षा विभाग और पेंशन विभाग हरकत में आए और महज कुछ ही घंटों में महिला की पेंशन और ग्रेच्युटी के आदेश जारी कर दिए गए। राजस्थान पत्रिका ने मंगलवार के अंक में ‘ऑन ड्यूटी’ जान गंवाने वाले शिक्षक की पेंशन अटकी ” शीर्षक से खबर प्रकाशित कर प्रशासन को जगाने का प्रयास किया था।

यों हुई त्वरित कार्रवाई

करेड़ा तहसील के बड्डू निवासी चंचल कंवर ने अपनी व्यथा राजस्थान पत्रिका को पत्र के माध्यम से बताई थी। पत्रिका ने बिना देरी किए यह मामला तत्काल जिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय) प्रारम्भिक, राजेन्द्र गग्गड़ के संज्ञान में लाया। गग्गड़ ने मामले की गंभीरता और विधवा की पीड़ा को समझते हुए तुरंत सीबीईओ करेड़ा को पत्र लिखकर तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की। साथ ही, अजमेर पेंशन विभाग से पेंशन जारी करने का आग्रह किया। पेंशन विभाग ने भी संवेदनशीलता दिखाते हुए त्वरित कार्रवाई की और चंचल कंवर का फैमिली पेंशन किट जारी कर दिया।

क्या है पूरा मामला

अजीत सिंह चुण्डावत पीटीआई राउप्रावि मेवासा में कार्यरत थे। 4 नवम्बर 2025 को खेलकूद प्रतियोगिता से लोटते समय एक दुर्घटना में उनका आकस्मिक निधन हो गया। पति के निधन के बाद से ही उनकी पत्नी चंचल कंवर पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य भुगतानों के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रही थीं, लेकिन तकनीकी खामियों का हवाला देकर उन्हें परेशान किया जा रहा था।

अब यह मिली है राहत

चंचल कंवर के पक्ष में 25 लाख रुपए की ग्रेच्युटी का भुगतान आदेश जारी कर दिया गया है। उन्हें 38,850 रुपए प्रतिमाह की एनहांस्ड पेंशन स्वीकृत की गई है, जो 4 नवम्बर 2035 तक देय होगी। इसके बाद 23,310 रुपए प्रतिमाह पारिवारिक पेंशन मिलेगी। पेंशन प्रारम्भ होने की तिथि 5 नवम्बर 2025 तय की गई है। इससे उन्हें पिछले 5 महीनों का एरियर भी एक साथ मिल सकेगा।

संवेदनशीलता की जीत

यह प्रकरण इस बात का उदाहरण है कि यदि अधिकारी संवेदनशीलता दिखाएं तो कोई भी सरकारी काम, सॉफ्टवेयर या सिस्टम की खामियों का मोहताज नहीं रह सकता। राजस्थान पत्रिका की पहल पर जिस मुस्तैदी से डीईओ राजेन्द्र गग्गड़ और पेंशन विभाग ने काम किया, उसने एक बेसहारा परिवार को उसका हक दिलाया है। परिवार के सदस्यों ने इस त्वरित समाधान के लिए राजस्थान पत्रिका और गग्गड व पेंशन विभाग के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया है।

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