लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के इंदौर और सागर सेतु संभाग में टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी सामने आई है। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि नियमों में बदलाव कर ठेकेदारों का चयन किया गया। इंदौर में 30 करोड़ का टेंडर ऐसी फर्म को दिया गया, जिसके पास जरूरी मशीनें नहीं थीं। वहीं सागर में अधूरा काम पूरा बताने वाली कंपनी को ठेका दे दिया गया। दोनों मामलों की जांच एमपीआरडीसी के अधिकारियों की समिति ने की। मार्च 2026 में रिपोर्ट सौंपी गई। इसमें इंदौर और सागर के एक्जीक्यूटिव इंजीनियरों को जिम्मेदार ठहराते हुए कार्रवाई की सिफारिश की गई है। साथ ही दोनों टेंडर निरस्त कर नई शर्तों के साथ दोबारा प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है।
पहला मामला: 30 करोड़ का टेंडर नियमों के खिलाफ दिया खंडवा के ओंकारेश्वर में कावेरी नदी पर पैदल पुल निर्माण का काम 30 करोड़ रुपए का था। इसमें तीन कंपनियों ने हिस्सा लिया। तकनीकी बिड के दौरान गुजरात और हरियाणा की कंपनियों को बिना क्लेरिफिकेशन मांगे अपात्र कर दिया गया। भोपाल की मेसर्स राजेश शर्मा इंफ्रास्ट्रक्चर को योग्य घोषित कर दिया गया। जबकि फर्म के पास 40 टन क्रेन और बूम प्लेसर जैसे जरूरी उपकरण नहीं थे। सॉइल कम्पेक्टर भी तय सीमा से पुराना था। इसके बावजूद टेंडर दे दिया गया। दूसरा मामला: अधूरा काम पूरा दिखाकर मिला ठेका सागर सेतु संभाग के 7.87 करोड़ का काम रामराजा कंस्ट्रक्शन को दिया गया। यह काम एक्जीक्यूटिव इंजीनियर नवीन मल्होत्रा देख रहे थे। इस काम के लिए 4 फर्म आई थीं। इनमें से दो को शर्त पूरी नहीं करने के कारण तकनीकी बिड में शामिल नहीं किया। वहीं रामराजा कंपनी को चुना गया, जबकि उनके द्वारा जिस काम को पूरा बताया गया, वह अधूरा ही था। इसके लिए एक्जीक्यूटिव इंजीनियर मल्होत्रा को जिम्मेदार बताया गया। जिम्मेदारी तय, कार्रवाई की सिफारिश
जांच रिपोर्ट में इंदौर की ईई गुरनीत कौर भाटिया और सागर के ईई नवीन मल्होत्रा को जिम्मेदार ठहराया गया है। रिपोर्ट में अनुशासनात्मक कार्रवाई और टेंडर निरस्त करने की सिफारिश की गई है। मैंने जांच रिपोर्ट नहीं देखी जिस टेंडर की आप बात कर रहे हैं, उसमें सभी काम नियमानुसार हुए हैं। आप जिस जांच रिपोर्ट की बात कर रहे हैं, वह मैंने नहीं देखी। मुझे उसकी कोई जानकारी नहीं है।
-गुरनीत कौर भाटिया, एक्जीक्यूटिव इंजीनियर, इंदौर सेतु संभाग
टायपिंग एरर था उस मामले में कोई गड़बड़ी नहीं हुई। कुछ टायपिंग एरर था। जिसकी वजह से ऐसा लगा। हमने पूर्ण काम ही पूर्ण बताया है। इस संबंध में लिखित में जवाब दे दिया है।
-नवीन मल्होत्रा, एक्जीक्यूटिव इंजीनियर, सागर सेतु संभाग


