जसवंतपुरा में पिछले 48 घंटों से एक बाघ की मौजूदगी से ग्रामीण दहशत में थे। बाघ ने गांव की सीमा पर एक पड़िया (भैंस का बच्चा) का शिकार किया था, जिससे उसकी उपस्थिति की पुष्टि हुई। यह घटना 12 अप्रैल की है, जब ग्रामीणों ने बीट गार्ड को बाघ द्वारा शिकार किए जाने की सूचना दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और बाघ की पुष्टि होने पर तुरंत घेराबंदी शुरू कर दी गई, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। 13 अप्रैल को बाघ को जंगल में वापस भेजने के लिए हाथियों की मदद ली गई, लेकिन घनी झाड़ियों के कारण यह प्रयास सफल नहीं हो सका। बाघ उसी क्षेत्र में बना रहा। वनकर्मियों ने पूरी रात टॉर्च की रोशनी में बाघ की गतिविधियों पर नजर रखी। बाघ अब जंगल में लौट चुका है पन्ना टाइगर रिजर्व के सहायक क्षेत्र संचालक बीके पटेल ने बताया कि मंगलवार को तीन हाथियों की सहायता से एक बार फिर बड़ा तलाशी अभियान चलाया गया। इस दौरान टीम को बाघ के पंजों के निशान (पगमार्क) मिले, जो जंगल की गहराई की ओर जा रहे थे। इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि बाघ अब जंगल में लौट चुका है। पटेल ने यह भी बताया कि जिस पशुपालक की पड़िया का शिकार हुआ है, उससे वन विभाग ने मुआवजे के लिए आवेदन ले लिया है। मुआवजे की राशि जल्द ही उसके खाते में जमा कर दी जाएगी। हालांकि बाघ के जंगल में लौटने के संकेत मिले हैं, वन विभाग ने ग्रामीणों को अकेले या सुनसान इलाकों में न जाने की सलाह दी है। एहतियात के तौर पर वन विभाग का अमला अभी भी इलाके में तैनात है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो।


