पटना में औषधि नियंत्रण प्रशासन ने नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। सोमवार को बायपास थाना क्षेत्र के रानीगंज स्थित एक गोदाम (ओम लॉजिस्टिक) से भारी मात्रा में नशीले इंजेक्शन जब्त किए गए। अधिकारियों ने 39 कार्टन में रखे करीब 78 हजार नशीले इंजेक्शन बरामद किए। इस मामले में 7 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है, जिनमें से 4 आरोपियों को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया। औषधि नियंत्रण प्रशासन के अधिकारी जितेंद्र कुमार ने बताया कि उन्हें गुप्त सूचना मिली थी। जानकारी के अनुसार, एक पिकअप वाहन से नशीले इंजेक्शन की बड़ी खेप शहर में लाई जा रही थी। सूचना मिलते ही टीम ने पिकअप वाहन को रोका और शुरुआती खेप बरामद की। पकड़े गए आरोपियों की निशानदेही पर रानीगंज इलाके के गोदाम पर छापेमारी की गई। गोदाम की तलाशी के दौरान हुई जब्ती सोमवार सुबह करीब 11 बजे गोदाम की तलाशी ली गई। इस दौरान भारी मात्रा में इंजेक्शन के कार्टन मिले। अधिकारियों के अनुसार, कुल 39 कार्टन में लगभग 78 हजार इंजेक्शन थे, जिनकी कीमत लाखों रुपये आंकी गई है। औषधि नियंत्रण प्रशासन ने इसे अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई बताया है। जांच में पता चला है कि जब्त किए गए इंजेक्शन का उत्पादन ‘नारोडियन फार्मासिस्ट’ नामक कंपनी ने किया था। इसकी मार्केटिंग ‘क्विक फार्मा’ एजेंसी के माध्यम से की जा रही थी। दोनों कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। अधिकारियों ने इसे जांच का महत्वपूर्ण पहलू बताया। दो मुख्य आरोपियों को बताया जा रहा मास्टरमाइंड इस पूरे नेटवर्क के पीछे रवि और नीरज नामक दो मुख्य आरोपियों को मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि यह नेटवर्क केवल बिहार तक सीमित नहीं है। नशीले पदार्थों की तस्करी कई अन्य राज्यों से भी की जा रही थी, जिन्हें यहां खपाने की योजना थी। एनडीपीएस एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज औषधि नियंत्रण प्रशासन के अनुसार, यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय हो सकता है और मेडिकल सप्लाई के नाम पर अवैध रूप से नशीले इंजेक्शन की आपूर्ति कर रहा था। ऐसे इंजेक्शन का इस्तेमाल अक्सर नशे के लिए किया जाता है, जिससे युवाओं में लत और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा होती हैं। इस मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके। कार्रवाई में औषधि नियंत्रण प्रशासन के अधिकारियों जसवंत कुमार, श्वेता कुमारी और अन्य टीम के सदस्य शामिल रहे। इसके अलावा बायपास थाना और बहादुरपुर थाना की पुलिस ने भी संयुक्त रूप से इस ऑपरेशन को सफल बनाया।
प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में इस तरह के अभियान और तेज किए जाएंगे। फिलहाल नशे के सौदागरों के खिलाफ अभियान लगातार जारी है। पटना में औषधि नियंत्रण प्रशासन ने नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। सोमवार को बायपास थाना क्षेत्र के रानीगंज स्थित एक गोदाम (ओम लॉजिस्टिक) से भारी मात्रा में नशीले इंजेक्शन जब्त किए गए। अधिकारियों ने 39 कार्टन में रखे करीब 78 हजार नशीले इंजेक्शन बरामद किए। इस मामले में 7 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है, जिनमें से 4 आरोपियों को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया। औषधि नियंत्रण प्रशासन के अधिकारी जितेंद्र कुमार ने बताया कि उन्हें गुप्त सूचना मिली थी। जानकारी के अनुसार, एक पिकअप वाहन से नशीले इंजेक्शन की बड़ी खेप शहर में लाई जा रही थी। सूचना मिलते ही टीम ने पिकअप वाहन को रोका और शुरुआती खेप बरामद की। पकड़े गए आरोपियों की निशानदेही पर रानीगंज इलाके के गोदाम पर छापेमारी की गई। गोदाम की तलाशी के दौरान हुई जब्ती सोमवार सुबह करीब 11 बजे गोदाम की तलाशी ली गई। इस दौरान भारी मात्रा में इंजेक्शन के कार्टन मिले। अधिकारियों के अनुसार, कुल 39 कार्टन में लगभग 78 हजार इंजेक्शन थे, जिनकी कीमत लाखों रुपये आंकी गई है। औषधि नियंत्रण प्रशासन ने इसे अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई बताया है। जांच में पता चला है कि जब्त किए गए इंजेक्शन का उत्पादन ‘नारोडियन फार्मासिस्ट’ नामक कंपनी ने किया था। इसकी मार्केटिंग ‘क्विक फार्मा’ एजेंसी के माध्यम से की जा रही थी। दोनों कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। अधिकारियों ने इसे जांच का महत्वपूर्ण पहलू बताया। दो मुख्य आरोपियों को बताया जा रहा मास्टरमाइंड इस पूरे नेटवर्क के पीछे रवि और नीरज नामक दो मुख्य आरोपियों को मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि यह नेटवर्क केवल बिहार तक सीमित नहीं है। नशीले पदार्थों की तस्करी कई अन्य राज्यों से भी की जा रही थी, जिन्हें यहां खपाने की योजना थी। एनडीपीएस एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज औषधि नियंत्रण प्रशासन के अनुसार, यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय हो सकता है और मेडिकल सप्लाई के नाम पर अवैध रूप से नशीले इंजेक्शन की आपूर्ति कर रहा था। ऐसे इंजेक्शन का इस्तेमाल अक्सर नशे के लिए किया जाता है, जिससे युवाओं में लत और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा होती हैं। इस मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके। कार्रवाई में औषधि नियंत्रण प्रशासन के अधिकारियों जसवंत कुमार, श्वेता कुमारी और अन्य टीम के सदस्य शामिल रहे। इसके अलावा बायपास थाना और बहादुरपुर थाना की पुलिस ने भी संयुक्त रूप से इस ऑपरेशन को सफल बनाया।
प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में इस तरह के अभियान और तेज किए जाएंगे। फिलहाल नशे के सौदागरों के खिलाफ अभियान लगातार जारी है।


