Iran China Strategy: ईरान-अमेरिका युद्ध फिलहाल रुक गया है, लेकिन तनाव कम होने के बजाय बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए ईरान पर भारी दबाव बनाया है और नाकेबंदी की धमकी दी है। इसके जवाब में ईरान ने चीन की पुरानी रणनीति अपना ली है। बता दें कि ट्रंप की धमकी के बाद अमेरिकी युद्धपोत होर्मुज की ओर बढ़ रहे हैं। इसे बारे में जानकारी देते हुए आईआरजीसी के प्रवक्ता इब्राहित जुल्फिकार ने कहा कि हम अमेरिका से सख्ती से निपटेंगे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका जमीनी युद्ध छेड़ देता है तो हम अपने दस लाख सैनिकों को मैदान में उतार देंगे।
ईरान ने अपनाया चीन का प्लेबुक
जब अमेरिका ने चीन पर भारी टैरिफ और प्रतिबंध लगाए थे, तब चीन ने दुर्लभ खनिजों (Rare Earth Minerals) के निर्यात पर रोक लगा दी थी। इन खनिजों का 90 प्रतिशत उत्पादन चीन करता है, जो अमेरिका की इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उद्योग के लिए बेहद जरूरी हैं। इससे अमेरिका को अपना रुख नरम करना पड़ा था। अब ईरान भी ठीक यही रणनीति अपना रहा है। तेहरान होर्मुज स्ट्रेट को हथियार बना रहा है। विश्व का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी संकरे रास्ते से गुजरता है। ईरान अब तय कर रहा है कि कौन से जहाज गुजरेंगे और किन शर्तों पर। सुरक्षित मार्ग देने के बदले शुल्क वसूलने की भी तैयारी है।
ट्रंप की दोहराई पुरानी रणनीति
ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज नहीं खोला गया तो अमेरिकी नौसेना नाकेबंदी लगा देगी। कुछ महीने पहले उन्होंने चीन के खिलाफ भी इसी तरह 100 प्रतिशत टैरिफ की धमकी दी थी। लेकिन ईरान इस दबाव के सामने झुकने को तैयार नहीं है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने साफ संदेश दिया- ‘पेट्रोल की मौजूदा कीमत का आनंद लीजिए… जल्द ही 4-5 डॉलर प्रति लीटर पेट्रोल याद आएगा।’
ब्रेंट क्रूड की कीमत 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी
होर्मुज में गतिरोध के कारण वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मच गई है। ट्रंप की नाकेबंदी वाली धमकी के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 8 प्रतिशत बढ़कर 103 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर स्थिति लंबी चली तो तेल 120 डॉलर प्रति बैरल या उससे भी ऊपर जा सकता है। इससे वैश्विक मुद्रास्फीति बढ़ेगी और आम लोगों पर बोझ बढ़ेगा।
ईरान रोजाना करीब 20 लाख बैरल तेल निर्यात करता है। किसी भी रुकावट से पूरी दुनिया प्रभावित होगी।
अमेरिका पर आर्थिक दबाव बनाने की कोशिश
युद्ध शुरू होने से पहले होर्मुज को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग माना जाता था। अब ईरान ने इसका पूरा नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है। इस्लामाबाद में हुई वार्ता विफल होने के बाद स्थायी शांति की उम्मीदें अभी भी कम हैं। ईरान चीन की सफल रणनीति को दोहराते हुए अमेरिका को आर्थिक दबाव में डालने की कोशिश कर रहा है।


