Cancer Drug Racket का पर्दाफाश, Delhi से चल रहा था ‘मौत’ का Network, बड़े Hospitals भी लपेटे में

Cancer Drug Racket का पर्दाफाश, Delhi से चल रहा था ‘मौत’ का Network, बड़े Hospitals भी लपेटे में
पंजाब के एक साधारण परिवार से शुरू हुई एक कहानी अब देशभर में कैंसर दवाओं के काले कारोबार की गंभीर हकीकत को सामने ला रही है। साल 2022 में चंडीगढ़ के पास रहने वाली 56 वर्षीय महिला का इलाज पीजीआईएमईआर में चल रहा था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें एक महंगी इम्यूनोथेरेपी दवा लेने की सलाह दी। यह दवा इतनी महंगी थी कि आम परिवार के लिए इसे खरीद पाना बेहद मुश्किल था।
मौजूद जानकारी के अनुसार, मरीज के परिवार ने सितंबर से दिसंबर 2022 के बीच स्थानीय मेडिकल स्टोर से करीब 16 लाख रुपये में 12 इंजेक्शन खरीदे। उन्हें लगा कि थोड़ी छूट मिल गई है, लेकिन बाद में दिल्ली पुलिस के फोन ने सब कुछ बदल दिया। जांच में सामने आया कि ये दवाएं नकली थीं और इनमें कैंसर की जगह एंटीफंगल दवा भरी गई थी।
बता दें कि यह मामला अकेला नहीं है। जांच में खुलासा हुआ है कि देश में एक संगठित गिरोह महंगी कैंसर दवाओं की नकली सप्लाई कर रहा था। यह नेटवर्क अस्पतालों, फार्मासिस्टों और बाहर के सप्लायरों के बीच फैला हुआ था, जहां असली दवाओं के खाली शीशियों को इकट्ठा कर उनमें दूसरी दवाएं भरकर दोबारा बाजार में बेचा जाता था।
गौरतलब है कि इस पूरे खेल में अस्पतालों के अंदर की सुरक्षा व्यवस्था में भी बड़ी खामियां सामने आईं। दिल्ली के एक प्रमुख कैंसर अस्पताल में काम करने वाले कुछ कर्मचारियों पर आरोप है कि वे इस्तेमाल की गई और आधी भरी दवाओं को बाहर निकालकर गिरोह तक पहुंचाते थे। जांच एजेंसियों के अनुसार, इन खाली शीशियों को 3 हजार रुपये में खरीदा जाता था, जबकि भरी हुई नकली दवा 40 से 50 हजार रुपये में बेची जाती थी।
मौजूद रिकॉर्ड बताते हैं कि पुलिस ने जब छापेमारी की तो बड़ी संख्या में खाली और भरे हुए इंजेक्शन, पैकिंग बॉक्स और अलग-अलग बैच नंबर की दवाएं बरामद कीं। इन बैच नंबरों का मिलान अस्पतालों में मरीजों को दी गई असली दवाओं से भी हुआ, जिससे शक और गहरा हो गया।
बता दें कि अस्पतालों में दवाओं के निपटान के लिए तय प्रक्रिया तो थी, लेकिन इस्तेमाल के बाद कितनी शीशियां नष्ट हुईं, इसकी सटीक गिनती का कोई सिस्टम नहीं था। यही कमजोरी इस पूरे रैकेट के लिए सबसे बड़ा मौका बन गई।
जांच के बाद कई अस्पतालों ने अपने सिस्टम में बदलाव किए हैं। अब महंगी दवाओं की तैयारी मरीज के परिजनों की मौजूदगी में की जा रही है, इस्तेमाल के बाद शीशियों को तोड़ने और रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया को सख्त किया गया है और कचरे के स्टोरेज एरिया को भी सुरक्षित किया गया है।
वहीं, एक अन्य मामले में बिहार की एक महिला, जो कैंसर से जूझ रही थी, आर्थिक तंगी के कारण सस्ती दवा ऑनलाइन खरीदने को मजबूर हुई। दो इंजेक्शन लेने के बाद उसकी हालत बिगड़ गई और सितंबर 2022 में उसकी मौत हो गई। लगभग दो साल बाद उसके परिवार को पुलिस का फोन आया, जिसमें उन्हें बताया गया कि उन्होंने जो दवा ली थी, वह संदिग्ध हो सकती है।
गौरतलब है कि भारत में नकली दवाओं का बाजार पहले से ही चिंता का विषय रहा है, लेकिन अब महंगी कैंसर दवाओं तक इसका पहुंचना बेहद खतरनाक संकेत माना जा रहा है। जांच अधिकारियों का कहना है कि आर्थिक दबाव में मरीज और उनके परिवार अक्सर सस्ते विकल्प की तलाश में रहते हैं, जिसका फायदा ऐसे गिरोह उठाते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *