फिजिकल हेल्थ- जवानी में मसल्स हो रहीं कमजोर:हो सकता है सार्कोपेनिया, डॉक्टर से जानें लक्षण, रिस्क फैक्टर्स और बचाव के तरीके

फिजिकल हेल्थ- जवानी में मसल्स हो रहीं कमजोर:हो सकता है सार्कोपेनिया, डॉक्टर से जानें लक्षण, रिस्क फैक्टर्स और बचाव के तरीके

फर्ज करिए, आपकी उम्र 35 साल है। सीढ़ियां चढ़ते वक्त अब पहले जैसी फुर्ती नहीं रही। थोड़ा सा वजन उठाते ही सांस फूलने लगती है। ये बदलाव शरीर के अंदर चल रही एक साइलेंट समस्या ‘सार्कोपेनिया’ का संकेत हो सकता है। आमतौर पर ये समस्या बूढ़े लोगों को होती है, लेकिन सिडेंटरी लाइफस्टाइल के कारण 30-40 की उम्र से ही ये शुरु हो सकती है। ऐसे मामलों में यह समस्या बुढ़ापे तक गंभीर हो जाती है। साल 2024 में ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ में पब्लिश की एक स्टडी के मुताबिक, भारत में 35 से 70 साल के लगभग 28% लोग सार्कोपेनिया से पीड़ित हैं। इसलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में जानेंगे कि- सवाल- सार्कोपेनिया क्या है? जवाब- सार्कोपेनिया एक मेडिकल कंडीशन है, जिसमें– सवाल- सार्कोपेनिया क्यों होता है? जवाब- सार्कोपेनिया उम्र के साथ शरीर में होने वाले कई बदलावों का नतीजा है। इसके लिए शरीर में होने वाले ये बदलाव जिम्मेदार होते हैं- सवाल- सार्कोपेनिया के लक्षण क्या हैं? जवाब- इसका असर व्यक्ति डेली लाइफ और कामकाज पर पड़ता है। इसके कारण चलने-फिरने में परेशानी होती है, बैलेंस बिगड़ने लगता है। ग्राफिक में इसके सभी लक्षण देखिए- सवाल- सार्कोपेनिया शरीर को किस तरह प्रभावित करता है? जवाब- सार्कोपेनिया का असर सिर्फ मसल्स तक सीमित नहीं रहता है। इसका असर शरीर की ताकत, बैलेंस और डेली लाइफ पर भी पड़ता है। डेली लाइफ पर असर- हेल्थ पर असर- सवाल- सार्कोपेनिया कैसे डायग्नोज होता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझते हैं- सवाल- सार्कोपेनिया के रिस्क फैक्टर्स क्या हैं? जवाब- सार्कोपेनिया अचानक होने वाली बीमारी नहीं है। इसके लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं। कुछ खराब आदतें और हेल्थ कंडीशंस इसका जोखिम बढ़ा सकती हैं। ग्राफिक में इसके प्रमुख रिस्क फैक्टर्स देखिए- सवाल- किन लोगों को सार्कोपेनिया का रिस्क ज्यादा है? जवाब- यह समस्या किसी भी वयस्क को हो सकती है, लेकिन कुछ लोगों को इसका जोखिम ज्यादा होता है। ग्राफिक से समझते हैं- सवाल- क्या महिलाओं में मेनोपॉज के बाद सार्कोपेनिया का रिस्क बढ़ जाता है? जवाब- हां, मेनोपॉज के बाद हॉर्मोनल बदलाव के कारण इसका रिस्क बढ़ जाता है। पॉइंटर्स से इसके सभी कारण समझते हैं- सवाल- क्या डाइट से सार्कोपेनिया के रिस्क को कम किया जा सकता है? जवाब- हां, हेल्दी और संतुलित डाइट (आहार) की मदद से सार्कोपेनिया का रिस्क काफी हद तक कम किया जा सकता है। ‘जर्नल ऑफ फूड बायोकेमेस्ट्री’ के मुताबिक, बैलेंस्ड डाइट मांसपेशियों को हेल्दी बनाए रखने में मदद करती है। जरूरी न्यूट्रिएंट्स उनकी कार्यक्षमता सुधारने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। ग्राफिक में देखिए कि हेल्दी मसल्स के लिए क्या खाना चाहिए- सवाल- सार्कोपेनिया से कैसे बचें? जवाब- सार्कोपेनिया से बचाव के लिए नियमित एक्सरसाइज और हेल्दी डाइट का कॉम्बिनेशन फायदेमंद माना जाता है। ग्राफिक में देखिए सार्कोपेनिया से बचाव के टिप्स- समय पर पहचान और लाइफस्टाइल में जरूरी बदलावों से मसल्स की कमजोरी को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है। उम्र बढ़ना तय है, लेकिन मसल्स को मजबूत बनाए रखना काफी हद तक हमारी लाइफस्टाइल चॉइस पर निर्भर करता है। …………………………………. ये खबर भी पढ़ें… फिजिकल हेल्थ- हर रात सिर्फ 11 मिनट ज्यादा सोएं:10% घटेगा हार्ट अटैक का रिस्क, स्टडी में खुलासा, हेल्दी हार्ट के गोल्डन रूल्स मार्च 2026 में ‘यूरोपियन जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी’ में एक स्टडी पब्लिश हुई। इसके मुताबिक, रोज 11 मिनट ज्यादा नींद और 5 मिनट एक्स्ट्रा एक्सरसाइज से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम 10% तक कम हो सकता है। पूरी खबर पढ़ें…

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