प्रयागराज में मिड-टर्म सिंपोजियम की शुरूआत:ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों का कम बजट उपचार पर विशेष जोर, मरीजों के लिए सस्ते इम्प्लांट की चर्चा

प्रयागराज में मिड-टर्म सिंपोजियम की शुरूआत:ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों का कम बजट उपचार पर विशेष जोर, मरीजों के लिए सस्ते इम्प्लांट की चर्चा

प्रयागराज में आयोजित एमटीएस सेंट्रल जोन मिड-टर्म सिंपोजियम (MTS CEZCON 2026) के पहले दिन यानी शनिवार को देश भर से आए ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों ने चोट उपचार की कम लागत वाली नई तकनीकों पर चर्चा की। आयोजन सचिव डॉ. पीयूष मिश्रा ने बताया कि पटना, मुंबई, बनारस, कानपुर जैसे स्थानों से विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। प्रमुख चर्चित विषय
पटना के एक डॉक्टर ने पतले ‘जेस फिक्सेटर’ से कोहनी की जटिल चोटों के सफल उपचार के परिणाम दिखाए। मुंबई के डॉ. तन्ना ने सर्जरी फेल होने से बचाव के उपाय और 87 वर्षीय मरीजों के अनुभव साझा किए, ताकि रोगी को पूर्ण लाभ मिले। बनारस के डॉ. अमित जायसवाल ने रोबोटिक सर्जरी की तुलना पारंपरिक विधियों से की, जिसमें सटीकता और लाभ स्पष्ट हुए। कानपुर के डॉ. राघवेंद्र त्रिपाठी ने बच्चों के उपचार पर चर्चा की; डॉ. भुवन सिंह ने पतले तार से कॉलर बोन फिक्सेशन (‘टेंस फिक्स’) बताया। कम बजट उपचार पर फोकस
पांच राज्यों (झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार आदि) के गरीब मरीजों के लिए कम लागत वाले इम्प्लांट पर विशेष जोर रहा। विशेषज्ञों ने दिखाया कि सस्ते इम्प्लांट से भी हाई-एंड परिणाम संभव हैं, जिसकी सराहना हुई। डॉ. अमूल सिंह ने जेस फिक्सेटर, डॉ. अजीत सहगल ने कम कीमत वाली ‘HTO’ प्लेट (पेटेंट प्राप्त) से घुटने की सर्जरी से बचाव के तरीके बताए। सेरेब्रल पाल्सी पर चर्चा
बच्चों में सेरेब्रल पाल्सी के उपचार पर डॉ. पीयूष मिश्रा ने बताया कि पहले कारणों का आकलन आवश्यक है। फिजियोथेरेपी, ग्रेडेड एक्सरसाइज से मसल्स को मजबूत किया जाता है, ताकि बच्चे आत्मनिर्भर बनें। कभी छोटी सर्जरी जैसे टेंडन रिलीज भी जरूरी होती है।

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