झालावाड़ के खानपुर कस्बे में शनिवार को सर्व माली समाज द्वारा महात्मा ज्योतिराव फुले की 199वीं जयंती मनाई गई। इस अवसर पर अटरू रोड स्थित ब्रह्माणी माता मंदिर परिसर से दहीखेड़ा चौराहे तक एक विशाल वाहन रैली निकाली गई।
कार्यक्रम की शुरुआत ब्रह्माणी माता मंदिर से महात्मा फुले के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। महात्मा फुले का चित्र एक सजी-धजी बग्गी में सजाया गया था, जिसके साथ सैकड़ों मोटरसाइकिलों का काफिला कस्बे के मुख्य मार्गों से गुजरा। रैली का जगह-जगह पुष्पवर्षा और ठंडे पानी से स्वागत किया गया। दहीखेड़ा चौराहे पर क्षेत्रीय विधायक सुरेश गुर्जर ने भी पुष्पवर्षा कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद दोपहर में एक सभा का आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने महात्मा फुले के जीवन, विचारों और सामाजिक योगदान पर प्रकाश डाला।
वक्ताओं ने बताया कि 11 अप्रैल 1827 को पुणे में जन्मे महात्मा ज्योतिबा फुले ने महिला शिक्षा, दलित उत्थान और जाति प्रथा के उन्मूलन के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उन्होंने 1848 में बालिकाओं के लिए पहला स्कूल खोला, जिसमें उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले की महत्वपूर्ण भूमिका रही। साल 1873 में उन्होंने सत्यशोधक समाज की स्थापना की और अपनी कृति ‘गुलामगिरी’ के माध्यम से जाति व्यवस्था पर प्रहार किया। रैली के दौरान खानपुर पुलिस बल सुरक्षा व्यवस्था के लिए जगह-जगह तैनात रहा, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। अंत में मौजूद लोगों ने महात्मा फुले के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।


