कौन हैं रुबी कुमारी ठाकुर? नेपाल की सबसे कम उम्र की डिप्टी स्पीकर बनने का पूरा सफर

कौन हैं रुबी कुमारी ठाकुर? नेपाल की सबसे कम उम्र की डिप्टी स्पीकर बनने का पूरा सफर

Rubi Kumari Thakur Deputy Speaker: नेपाल की संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (HoR) की डिप्टी स्पीकर पद पर 26 वर्षीय रुबी कुमारी ठाकुर शुक्रवार को निर्वाचित हुईं। इस उपलब्धि के साथ वे नेपाल की सबसे कम उम्र की डिप्टी स्पीकर बन गई हैं। यह घटना देश की राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव का स्पष्ट संकेत दे रही है।

साधारण परिवार से संसद तक का सफर

रुबी कुमारी ठाकुर का जन्म वर्ष 2000 में धनुषा जिले के मुजेलिया गांव में एक साधारण परिवार में हुआ। उनके पिता सोगारथ ठाकुर सऊदी अरब में प्रवासी मजदूर हैं और वर्तमान में छुट्टी पर घर पर हैं। रुबी छह भाई-बहनों में से एक हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य रही है, जिसके कारण रुबी ने छोटी उम्र से ही संघर्ष देखा।

10वीं कक्षा पास करने के बाद उन्होंने धनुषा के बलारा पॉलिटेक्निक संस्थान से सिविल इंजीनियरिंग में तीन वर्षीय डिप्लोमा कोर्स पूरा किया। इसके बाद उन्होंने एक आर्किटेक्चर कंसल्टेंसी फर्म में सात महीने काम किया। वहां मिलने वाला मामूली वेतन भी वे परिवार की मदद के लिए घर भेजती थीं।

हरक साम्पाङ से प्रेरणा और राजनीतिक प्रवेश

रुबी की राजनीति में एंट्री अचानक नहीं बल्कि प्रेरणा से हुई। धरान के पूर्व मेयर हरक साम्पाङ की राजनीतिक गतिविधियां और उनकी नई पार्टी ‘श्रम संस्कृति पार्टी’ ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। वे साम्पाङ के विचारों से जुड़ीं और पार्टी की सक्रिय कार्यकर्ता बन गईं। 5 मार्च को हुए चुनाव में हरक साम्पाङ ने उन्हें मधेशी समूह से आनुपातिक प्रतिनिधित्व के तहत उम्मीदवार बनाया। इसी के माध्यम से वे संसद पहुंचीं और पार्टी की सबसे कम उम्र की सांसदों में शामिल हुईं।

डिप्टी स्पीकर चुनाव और भारी समर्थन

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के पास सदन में लगभग दो-तिहाई बहुमत होने के कारण रुबी को मजबूत समर्थन मिला। RSP और अन्य दलों के सहयोग से वे डिप्टी स्पीकर पद पर निर्वाचित हुईं।
सदन में मौजूद 256 सांसदों में से रुबी को 229 वोट मिले, जबकि राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी की सरस्वती लामा को मात्र 5 वोट मिले। 22 सांसदों ने मतदान से परहेज किया।

संवैधानिक प्रावधान और ऐतिहासिक संदर्भ

नेपाल के संविधान के अनुसार स्पीकर और डिप्टी स्पीकर में से एक महिला होना अनिवार्य है तथा दोनों अलग-अलग दलों से होने चाहिए। 4 अप्रैल को RSP के डोल प्रसाद अर्याल स्पीकर चुने गए थे। रुबी का चुनाव इस प्रावधान को पूरा करते हुए हुआ।

नई पीढ़ी का उदय

रुबी कुमारी ठाकुर का यह सफर साधारण परिवार की बेटी से संसद की उच्च पद तक पहुंचने की मिसाल है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई, आर्थिक संघर्ष और राजनीतिक जागरूकता के माध्यम से उन्होंने साबित किया कि उम्र कोई बाधा नहीं होती जब इरादे मजबूत हों।

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