मुजफ्फरपुर में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ दिए गए कथित आपत्तिजनक बयान के विरोध में तिलक मैदान स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय के बाहर आयोजित किया गया। कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का पुतला भी फूंका। विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष अरविंद कुमार मुकुल ने किया। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष अरविंद कुमार मुकुल ने हिमंता बिस्वा सरमा के बयान को संघ और भाजपा की दलित विरोधी मानसिकता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे का राजनीतिक अनुभव हिमंता सरमा की उम्र से भी अधिक है। मुकुल ने इस टिप्पणी को निंदनीय बताते हुए इसे भारतीय राजनीति के गिरते स्तर का सूचक करार दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए वहीं, जिला प्रवक्ता समीर कुमार ने इस मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इतने गंभीर और अपमानजनक बयान के बाद भी प्रधानमंत्री की चुप्पी कई संदेह पैदा करती है। समीर कुमार ने पूछा कि क्या इसे दलितों, शोषितों और वंचित वर्गों के प्रति सरकार की उदासीनता माना जाए। उन्होंने मांग की कि यदि भाजपा इस बयान से सहमत नहीं है, तो असम के मुख्यमंत्री पर अब तक कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। बड़ी संख्या में मौजूद रहे कार्यकर्ता: पुतला दहन कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मुजफ्फरपुर में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ दिए गए कथित आपत्तिजनक बयान के विरोध में तिलक मैदान स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय के बाहर आयोजित किया गया। कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का पुतला भी फूंका। विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष अरविंद कुमार मुकुल ने किया। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष अरविंद कुमार मुकुल ने हिमंता बिस्वा सरमा के बयान को संघ और भाजपा की दलित विरोधी मानसिकता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे का राजनीतिक अनुभव हिमंता सरमा की उम्र से भी अधिक है। मुकुल ने इस टिप्पणी को निंदनीय बताते हुए इसे भारतीय राजनीति के गिरते स्तर का सूचक करार दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए वहीं, जिला प्रवक्ता समीर कुमार ने इस मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इतने गंभीर और अपमानजनक बयान के बाद भी प्रधानमंत्री की चुप्पी कई संदेह पैदा करती है। समीर कुमार ने पूछा कि क्या इसे दलितों, शोषितों और वंचित वर्गों के प्रति सरकार की उदासीनता माना जाए। उन्होंने मांग की कि यदि भाजपा इस बयान से सहमत नहीं है, तो असम के मुख्यमंत्री पर अब तक कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। बड़ी संख्या में मौजूद रहे कार्यकर्ता: पुतला दहन कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।


