अररिया जिले में निजी विद्यालयों द्वारा अभिभावकों को किताबों, ड्रेस और अन्य शैक्षणिक सामग्रियों की खरीद के लिए किसी विशेष दुकान से बाध्य करने की प्रथा पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी विनोद दूहन ने स्पष्ट किया कि निजी स्कूलों की गतिविधियों पर प्रशासन की पैनी नजर है और अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। जिलाधिकारी विनोद दूहन ने बताया कि सभी निजी विद्यालयों को अपनी वेबसाइट और सूचना पट्ट (नोटिस बोर्ड) पर किताबों, यूनिफॉर्म और अन्य आवश्यक सामग्रियों की पूरी सूची अनिवार्य रूप से जारी करनी होगी। किसी भी दुकान से किताब खरीद सकेंगे पेरेंट्स अभिभावक अपनी सुविधा और बजट के अनुसार इन सामग्रियों को कहीं से भी खरीद सकेंगे। किसी भी विद्यालय को अभिभावकों को किसी खास दुकान या स्थान से सामग्री खरीदने के लिए बाध्य करने की अनुमति नहीं होगी।डीएम ने चेतावनी दी कि यदि कोई विद्यालय इस नियम का उल्लंघन करता है या अभिभावकों पर विशेष दुकान से खरीदारी का दबाव बनाता है, तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में संबंधित स्कूल प्रबंधन के खिलाफ त्वरित और कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। जिलाधिकारी विनोद दूहन ने अररिया के सभी जिलेवासियों, विशेषकर अभिभावकों से अपील की है कि यदि किसी निजी विद्यालय द्वारा इस प्रकार की कोई शिकायत या अनियमितता सामने आए, तो वे तुरंत जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय में शिकायत दर्ज कराएं। शिकायत मिलने पर होगी त्वरित कार्रवाई शिकायत मिलने पर प्रशासन द्वारा त्वरित जांच और उचित कार्रवाई की जाएगी। यह कदम अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से बचाने और निजी स्कूलों में पारदर्शिता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कई अभिभावक लंबे समय से शिकायत करते रहे हैं कि स्कूल प्रबंधन महंगी किताबें और ड्रेस केवल अपनी सुझाई दुकानों से ही खरीदने को मजबूर करते हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। जिला प्रशासन का यह निर्देश राज्य सरकार की शिक्षा नीति के अनुरूप है, जिसमें अभिभावकों के अधिकारों को प्राथमिकता दी गई है। डीएम विनोद दूहन ने सभी निजी विद्यालयों को नियमों का पालन सुनिश्चित करने की चेतावनी दी है, अन्यथा उन्हें परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। अररिया जिले में निजी विद्यालयों द्वारा अभिभावकों को किताबों, ड्रेस और अन्य शैक्षणिक सामग्रियों की खरीद के लिए किसी विशेष दुकान से बाध्य करने की प्रथा पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी विनोद दूहन ने स्पष्ट किया कि निजी स्कूलों की गतिविधियों पर प्रशासन की पैनी नजर है और अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। जिलाधिकारी विनोद दूहन ने बताया कि सभी निजी विद्यालयों को अपनी वेबसाइट और सूचना पट्ट (नोटिस बोर्ड) पर किताबों, यूनिफॉर्म और अन्य आवश्यक सामग्रियों की पूरी सूची अनिवार्य रूप से जारी करनी होगी। किसी भी दुकान से किताब खरीद सकेंगे पेरेंट्स अभिभावक अपनी सुविधा और बजट के अनुसार इन सामग्रियों को कहीं से भी खरीद सकेंगे। किसी भी विद्यालय को अभिभावकों को किसी खास दुकान या स्थान से सामग्री खरीदने के लिए बाध्य करने की अनुमति नहीं होगी।डीएम ने चेतावनी दी कि यदि कोई विद्यालय इस नियम का उल्लंघन करता है या अभिभावकों पर विशेष दुकान से खरीदारी का दबाव बनाता है, तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में संबंधित स्कूल प्रबंधन के खिलाफ त्वरित और कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। जिलाधिकारी विनोद दूहन ने अररिया के सभी जिलेवासियों, विशेषकर अभिभावकों से अपील की है कि यदि किसी निजी विद्यालय द्वारा इस प्रकार की कोई शिकायत या अनियमितता सामने आए, तो वे तुरंत जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय में शिकायत दर्ज कराएं। शिकायत मिलने पर होगी त्वरित कार्रवाई शिकायत मिलने पर प्रशासन द्वारा त्वरित जांच और उचित कार्रवाई की जाएगी। यह कदम अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से बचाने और निजी स्कूलों में पारदर्शिता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कई अभिभावक लंबे समय से शिकायत करते रहे हैं कि स्कूल प्रबंधन महंगी किताबें और ड्रेस केवल अपनी सुझाई दुकानों से ही खरीदने को मजबूर करते हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। जिला प्रशासन का यह निर्देश राज्य सरकार की शिक्षा नीति के अनुरूप है, जिसमें अभिभावकों के अधिकारों को प्राथमिकता दी गई है। डीएम विनोद दूहन ने सभी निजी विद्यालयों को नियमों का पालन सुनिश्चित करने की चेतावनी दी है, अन्यथा उन्हें परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।


