इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि पासपोर्ट का नवीनीकरण केवल आशंका के आधार पर नहीं रोका जा सकता।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट का नवीनीकरण कराना किसी भी नागरिक का वैध अधिकार है। इसे केवल इस भय या आशंका पर नहीं रोका जा सकता कि संबंधित व्यक्ति देश वापस नहीं लौटेगा। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव ने दिलीप की याचिका पर सुनवाई के बाद एसीजेएम अदालत के आदेश को निरस्त करते और याचिका मंजूर करते हुए दिया है।
रामपुर में दर्ज है केस
मामले के तथ्यों के अनुसार रिंकू व अन्य के खिलाफ रामपुर के कोतवाली थाने में आपराधिक मामला दर्ज है और वह इस समय सऊदी अरब में रह रहा है। उसने अपने पासपोर्ट के नवीनीकरण के लिए रामपुर की एसीजेएम अदालत में प्रार्थना पत्र दिया था, जिसे खारिज कर दिया गया। एसीजेएम अदालत का तर्क था कि प्रार्थना पत्र में पासपोर्ट की एक्सपायरी डेट और नंबर का सही विवरण नहीं दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट रिन्यू कराना एक कानूनी अधिकार है, जिसे केवल इस चिंता पर नहीं छीना जा सकता कि आरोपी वापस नहीं आएगा। याची के वकील ने कहा कि याची भारत वापस आकर अदालत की कार्यवाही में शामिल होना चाहता है, जिसके लिए उसने दूतावास के जरिए वकालतनामा भी भेजा है।
बिना देरी पासपोर्ट नवीनीकृत का आदेश कोर्ट ने क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी लखनऊ को कोई अन्य कानूनी रुकावट न होने पर बिना देरी किए पासपोर्ट नवीनीकृत करने का निर्देश दिया। साथ ही विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव मध्य पूर्व मामले को सऊदी अरब स्थित भारतीय दूतावास को इस आदेश की जानकारी देने का निर्देश दिया। साथ ही याची के विरुद्ध जारी गैर-जमानती वारंट का पालन सुनिश्चित करते हुए उसकी भारत वापसी और कोर्ट में मौजूदगी सुनिश्चित कराने को कहा है।


