उदयपुर में शिक्षकों का प्रदर्शन,छुट्टियों में कटौती मंजूर नहीं:शिक्षक नेता-रिक्त पदों और जर्जर भवनों की सुध नहीं ले रहे, भौगोलिक विषम परिस्थितियों को नजरअंदाज किया

उदयपुर में शिक्षकों का प्रदर्शन,छुट्टियों में कटौती मंजूर नहीं:शिक्षक नेता-रिक्त पदों और जर्जर भवनों की सुध नहीं ले रहे, भौगोलिक विषम परिस्थितियों को नजरअंदाज किया

उदयपुर में आज शाम को शिक्षकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। राज्य के शिक्षा विभाग की और से स्कूलों में ग्रीष्मावकाश व संस्था प्रधान अधिकृत अवकाश में की गई कटौती का विरोध किया गया। शिक्षक एक स्वर में बोले यह मंजूर नहीं है। जिला कलेक्टरी पर शिक्षकों ने प्रदर्शन करने के बाद जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल को मुख्यमंत्री के नाम सात सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। राजस्थान पंचायती राज व माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष शेरसिंह चौहान के आह्वान पर जिलाध्यक्ष उदयपुर प्रथम कमलेश शर्मा व द्वितीय अरविन्द मीणा के नेतृत्व में प्रदर्शन किया गया। शिक्षकों ने जमकर नारेबाजी करते हुए अपनी मांगे रखी और इन ​नए-नए आदेशों का विरोध किया। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिला शिक्षिकाएं भी शामिल थी। शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष शेर सिंह चौहान ने कहा कि शिक्षा विभाग द्वारा जारी शिविरा पंचांग में एक जुलाई के स्थान पर इस सत्र में 21 जून से स्कूल खोलने तथा छात्रों व शिक्षकों के ग्रीष्मावकाश एवं संस्था प्रधान का अधिकृत अवकाश में की गई कटौती के विरोध में राज्यव्यापी प्रदर्शन का ऐलान किया गया और इसी क्रम में यह आंदोलन किया गया। चौहान ने बताया कि शिक्षा विभाग ने प्रदेश की विषम भौगोलिक परिस्थितियों की अनदेखी करते हुए एक अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र प्रारंभ कर छुट्टियों में कटौती की है, जबकि विभाग गंभीरता से सरकारी विद्यालयों में वरिष्ठ अध्यापक, व्याख्याता एवं प्राचार्यों के रिक्त पदों को भरने तथा शिक्षकों की पदोन्नति और जर्जर स्कूल भवनों के सुधार पर ध्यान दिया जाता तो विद्यालय में नामांकन वृद्धि के साथ-साथ विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा का वातावरण मिल सकता था। उन्होंने बताया कि वर्तमान में स्थिति यह है कि 4 वर्ष पूर्व क्रमोन्नत उच्च माध्यमिक एवं महात्मा गांधी विद्यालयों में आज भी व्याख्याताओं एवं शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं। पदोन्नत प्रधानाचार्य एक वर्ष से पदस्थापन की प्रतीक्षा में है,आज तक ट्रांसफर पॉलिसी लागू नहीं की गई है। पिछले 12 वर्ष से तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण नहीं किए गए हैं, विद्यालयों में रिक्त पद भरने के बजाय शिक्षा विभाग शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाकर शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। शिक्षक नेताओं ने कहा कि राजस्थान जैसे विषम जलवायु वाले प्रदेश में 21 जून से विद्यालय खोलना छात्रों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। जून माह में प्रदेश के अधिकतर भूभाग पर भीषण गर्मी में 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तापमान और तेज लू के थपेड़ों के बीच विद्यार्थियों को विद्यालय बुलाना ठीक नहीं है। संगठन ने यह भी मांग रखी कि यदि सरकार 21 जून से विद्यालय संचालन पर अड़ी रहती है, तो सरकार को नन्हे-मुन्ने छात्रों को भीषण गर्मी से बचाने के व्यापक प्रबंध करने चाहिए। विद्यालयों में गर्मी से बचाव के संसाधन उपलब्ध करवाने चाहिए साथ ही शिक्षकों को प्रत्येक कैलेंडर वर्ष में घटाएं गए अवकाश के परिणाम स्वरूप न्यूनतम 30 पीएल अवकाश प्रदान किए जाएं। इस दौरान नवीन व्यास, भैरूलाल कलाल, सुभाष बिश्नोई, सोहन गरासिया, चंद्रशेखर परमार, रूपलाल मीणा, गोपी कुमावत, सीमा शर्मा, लीला प्रजापत, ईश्वर सिंह राठौड़, प्रेम बैरवा, सत्यनारायण गुर्जर, प्रेम सिंह भाटी, चेतराम मीणा,गोपाल लक्ष्यकार, हितेश लबाना, लोकेश डामोर, निकेश मीणा आदि मौजूद रहे।

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