उन्नाव। जनपद में आगजनी की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण और जन जागरूकता बढ़ाने के लिए अग्निशमन विभाग द्वारा ‘अग्निसचेतकों’ (फायर वॉलंटियर्स) के लिए एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक उन्नाव के निर्देशन में तथा मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। कार्यक्रम उत्तर प्रदेश सरकार एवं महानिदेशक अग्निशमन सेवा के निर्देशों के क्रम में संपन्न हुआ। प्रशिक्षण शिविर में विभिन्न क्षेत्रों से आए अग्निसचेतकों को आग लगने की स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। मुख्य अग्निशमन अधिकारी ने बताया कि आग लगने के शुरुआती 5 से 10 मिनट ‘गोल्डन टाइम’ कहलाते हैं और ये बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इस अवधि में स्थानीय स्तर पर उठाए गए सही कदम बड़ी दुर्घटनाओं और जनहानि को रोक सकते हैं। प्रशिक्षण के दौरान अग्निशमन विभाग की टीम ने आधुनिक उपकरणों का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। इसमें फायर एक्सटिंगुइशर के विभिन्न प्रकार, होज पाइप, पंपिंग सेट तथा अन्य अग्निशमन उपकरणों के संचालन की जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को स्वयं उपकरण चलाने का अभ्यास कराया गया, जिससे वे आपातकालीन स्थिति में बिना घबराए तुरंत कार्रवाई कर सकें। इसके अतिरिक्त, ठोस पदार्थ, ज्वलनशील तरल, गैस और विद्युत से लगने वाली आग के विभिन्न प्रकारों के बारे में विस्तार से समझाया गया। प्रत्येक प्रकार की आग बुझाने के अलग-अलग तरीकों और सुरक्षा मानकों की जानकारी देकर अग्निसचेतकों को जागरूक किया गया। शिविर में भीड़ नियंत्रण और सुरक्षित निकासी (इवैक्यूएशन प्लान) पर भी विशेष ध्यान दिया गया। अधिकारियों ने समझाया कि आग लगने की स्थिति में भगदड़ सबसे बड़ा खतरा होती है, इसलिए लोगों को शांत रखते हुए व्यवस्थित तरीके से बाहर निकालना आवश्यक है। अपने संबोधन में, मुख्य अग्निशमन अधिकारी ने कहा कि अग्निसचेतक समाज और अग्निशमन विभाग के बीच एक मजबूत कड़ी का काम करते हैं। ग्रामीण और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में उनकी भूमिका जीवन रक्षक के समान है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से अपने-अपने क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा के प्रति जन जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।


