अयोध्या में शैंपू- बॉडीवॉश खरीद प्रक्रिया की जांच होगी:इनका उपयोग बेड सोर जैसे गंभीर मरीजों पर शोध के लिए होना था

अयोध्या में शैंपू- बॉडीवॉश खरीद प्रक्रिया की जांच होगी:इनका उपयोग बेड सोर जैसे गंभीर मरीजों पर शोध के लिए होना था

अयोध्या के दशरथ मेडकिल कालेज में 20 लाख के शैंपू और बॉडीवॉश एक्सयापर हो गए हैं।खरीद के बाद इनका लाभ रोगियों को मिला ही नहीं।यह एक कोने में रखा रह गया।यह प्रकरण सामने आने के बाद अब इसकी खरीद प्रक्रिया और दोषियों की जांच की जाएगी। डा. दिनेश सिंह मार्तोलिया वर्तमान समय में मेडिकल कालेज के प्राचार्य हैं।इससे पहले इस पद पर डाक्टर सत्यजीत वर्मा थे। उनके कार्यकाल में 20 लाख के शैंपू और बॉडीवॉश खरीदे जाने और इसका उपयोग न होने का मामला सामने आया है।इसके बाद खलबली मची हुई है। इस बीच एक तथ्य यह सामने आया कि है बेड सोर के मरीजों पर को साफ सुथरा रख कर उनके जीवन की रक्षा के लिए शैंपू और बॉडीवॉश मंगाया गया था।अलग-अलग मरीजों पर शैंपू और बॉडीवॉश लगाकर इस विषय पर शोध किया जाना था कि मरीजों के लिए उपयुक्त क्या है। इसको खरीद किए जाने के समय के तत्कलीन प्राचार्य डाक्टर सत्यजीत वर्मा 16 जनवरी 2026 को ट्रासफर होने के बाद चले गए।इसके बाद से इसका उपयोग किसलिए नहीं किया गया।क्या गंभीर मरीज अस्पताल में आ नहीं रहे हैं। या उनको इस चीजों की सुविधाएं दी ही नहीं जा रही है। खरीद प्रक्रिया में इनके सहमति मिली थी
इमरजेंसी ट्रामा इंचार्ज, प्रभारी अधिकारी सेंट्रल स्टोर, क्रय अधिकारी जेम बायर, वित्त नियंत्रक और प्राचार्य क्रय प्रक्रिया में शामिल रहे। सितंबर में सामान पहुंचा गोदाम, 7 माह बाद रोगी आज भी अनजान
प्रभारी अधिकारी केंद्रीय भंडार की तरफ से नौ सितंबर 2025 को प्रमाणित किया गया है कि बीजक में दर्शाया गया सामान गिनती में सही मिला। इसके बाद से वह गोदाम की शोभा बढ़ा रहा है। जिनके लिए खरीदा गया, उन्हें आज भी इसका लाभ नहीं मिल रहा। मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. दिनेश सिंह मार्तोलिया के अनुसार गोदाम में शैंपू और बॉडीवॉश जरूर रखे हैं। इतनी बड़ी मात्रा किसलिए खरीदी गई, इसकी जानकारी ली जाएगी। अगर जरूरत नहीं है तो खरीदा किसके लिए गया, इसके लिए कमेटी गठित कर क्रय प्रक्रिया की जांच कराई जाएगी।
बताते चले कि सरकारी धन की बर्बादी के राज धीरे-धीरे सामने आते जा रहे हैं। अब 20 लाख रुपये की लागत से वाटरलेस शैंपू व बॉडीवॉश खरीद का प्रकरण सामने आया है। इनकी खरीद तत्कालीन प्राचार्य डा. सत्यजीत वर्मा की तरफ से की गई थी। बताया जा रहा है कि बावजूद इसके तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य और क्रय अधिकारी ने दवाएं खरीदना उचित नहीं समझा। खरीद के बाद भी रोगियों को शैंपू व बॉडीवॉश का लाभ तक नहीं मिला। यह गोदाम में ही डंप रहते हुए एक्सपायर हो गए। फरवरी 2025 में ट्रामा सेंटर इंचार्ज ने एक डिमांड लेटर प्राचार्य को दिया था, जिसमें मेडिकल कालेज दर्शननगर के विभिन्न विभागों में गंभीर मरीजों के सुचारू रूप से उपचार के लिए विभिन्न सामग्री की तत्काल आवश्यकता दिखाई गई। इस डिमांड में एक-दो नहीं, सीधे दो हजार पीस सिर्फ वाटरलेस बॉडीवॉश 100 एमएल तथा दो हजार 200 पीस वाटरलेस शैंपू 100 एमएल खरीदा गया।
सिर्फ पांच दिन बाद 27 फरवरी को कलेंस्टा इंटरनेशनल कंपनी से क्रय करने के लिए जेम पोर्टल पर प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई, जिसमें वाटरलेस बॉडीवॉश प्रति पीस 499 रुपये और शैंपू 449 रुपये की दर से चार हजार 200 पीस की खरीद की गई। इसकी कीमत कुल 19 लाख 76 हजार रुपये हुई, जिसका भुगतान धनराशि आवंटन मानक मद-20, सहायता अनुदान सामान्य गैर वेतन से किया गया। इन्हें आज भी गोदाम के एक कोने में छिपा कर रखा गया है। हास्यास्पद तो यह है कि यह अनावश्यक खरीद तब की गई, जब दवाओं के लिए मेडिकल कालेज में आने वाले रोगी परेशान थे, वह महंगे दामों पर मेडिकल स्टोरों पर खरीदने को मजबूर थे।

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