केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर में विकास कार्यों की समीक्षा बैठक की। इस दौरान सांसद भरत सिंह कुशवाहा की अनुपस्थिति चर्चा का विषय रही। कलेक्ट्रेट में आयोजित इस बैठक में सिंधिया ने करोड़ों रुपए के प्रोजेक्ट्स का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाई और ग्वालियर को विकासशील नगर बनाने पर जोर दिया। बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने विशेष रूप से ग्वालियर की सड़कों की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सड़कों के लिए एक बड़ी योजना है, जिसमें कुल 294 सड़कों को लाल, पीली और हरी श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया था। इन 294 सड़कों में से 109 सड़कें डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड में आती हैं। इनमें से लगभग 53 सड़कें (31 और 22) डिफेक्ट श्रेणी में थीं। यह आंकड़ा 3 अक्टूबर 2025 का था, जिसे अधिकारियों को जांचने के लिए दिया गया था। सिंधिया ने कहा कि 6 अप्रैल 2026 तक, यानी लगभग छह महीने बाद, 31 बदतर सड़कों में से 30 ठीक हो चुकी हैं, जबकि एक सड़क अभी बाकी है। सीवर लाइन डालने से क्षतिग्रस्त हुई 22 सड़कों में से 14 ठीक हो गई हैं और 8 अभी शेष हैं। कुल मिलाकर, 53 डिफेक्टेड सड़कों में से 44 ठीक हो चुकी हैं और केवल 9 सड़कें बची हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह 294 सड़कों की योजना का पहला चरण है। ग्वालियर में सीवर लाइन बनी बड़ी समस्या आखिरी मुद्दा सीवर लाइन का रहा, जो ग्वालियर के लिए बड़ी समस्या बन गई है। इस पर प्रभारी मंत्री और ऊर्जा मंत्री ने निर्णय लिया है कि ऊर्जा मंत्री की अध्यक्षता में सभी वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों, कलेक्टर और कमिश्नर के साथ बैठक कर एक स्पष्ट नीति तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार और सभी जनप्रतिनिधि ग्वालियर के विकास और प्रगति के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। शहर को आने वाले समय में विकासशील, प्रगतिशील और औद्योगिक केंद्र बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, इस दौरान सबसे ज्यादा चर्चा सांसद भरत सिंह कुशवाहा के बैठक में शामिल न होने को लेकर रही, जिसे लेकर सियासी हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं।


