फर्जी नाम से दर्ज एससी/एसटी केस में कार्रवाई रोकी:मऊ में दर्ज हुआ था केस, गांव में उस नाम की कोई महिला ही नहीं

फर्जी नाम से दर्ज एससी/एसटी केस में कार्रवाई रोकी:मऊ में दर्ज हुआ था केस, गांव में उस नाम की कोई महिला ही नहीं

इलाहबाद हाईकोर्ट ने मऊ जिले के मोहम्मदाबाद गोहना थाने से जुड़े एससी/एसटी एक्ट के मामले में आरोपियों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। ​यह आदेश न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह ने ब्रजराज निषाद व चार अन्य की अपील पर उनके अधिवक्ता को सुनकर दिया है। मोहम्मदाबाद गोहना थाने का केस अपीलार्थियों के विरुद्ध मोहम्मदाबाद गोहना थाने में आईपीसी की धारा 323, 34, 379, 504, 506 और एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(डीए) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में अपीलार्थियों को सम्मन जारी किया था, जिसे याचिका में चुनौती दी गई है। गांव में इस नाम की कोई महिला नहीं ​अपीलार्थियों के अधिवक्ता ने अपनी बहस में कहा कि एफआईआर कलावती के नाम से दर्ज कराई गई है जबकि गांव में इस नाम का कोई रहता ही नहीं है। उन्होंने कहा कि वास्तव में यह शिकायत लालती ने फर्जी नाम से दर्ज कराई है। उन्होंने यह भी कहा कि अपीलार्थी संख्या दो से पांच अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं और उनके पास वैध प्रमाण पत्र हैं।
कानूनन एससी समुदाय के व्यक्तियों के विरुद्ध एससी एसटी एक्ट लागू नहीं हो सकता। अधिवक्ता ने यह भी दलील दी कि मूल विवाद दीवानी प्रकृति का है, जिसे केवल परेशान करने के उद्देश्य से आपराधिक मामला बनाया गया है। ​सुनवाई के बाद कोर्ट ने लालती को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय देते हुए अगली सुनवाई के लिए 24 अप्रैल की तारीख लगा दी। साथ ही तब तक अपीलकर्ताओं के विरुद्ध इस मामले के संबंध में कोई भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *