स्वच्छता सर्वे को लेकर 15 अप्रैल के बाद केंद्रीय टीम आएगी। नगर निगम सभी तय घटकों पर बेहतर काम कर रहा है। चक बैरिया में लीगेसी वेस्ट का निस्तारण तेजी से किया जा रहा है, ताकि बेहतर अंक मिलें। -यशपाल मीणा, नगर आयुक्त स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26 की प्रक्रिया में अहम बदलाव हुआ है। अब शहर के लोगों से ऑनलाइन फीडबैक नहीं लिया जाएगा। 15 अप्रैल के बाद केंद्रीय टीम पटना आएगी। वार्डों में जाकर सीधे लोगों से साफ-सफाई की जानकारी लेगी। टीम यहां कम से कम 7 दिनों तक रहेगी। नागरिकों से सीधी बातचीत के बाद सिटीजन फीडबैक की पूरी रिपोर्ट बनेगी। पिछले साल फीडबैक देने के लिए लोगों को क्यूआर कोड स्कैन करना था। स्वच्छता सर्वे में इस बार 12,500 अंकों के आधार पर शहरों में साफ-सफाई का मूल्यांकन होगा। इसमें कचरा प्रबंधन, दृश्य स्वच्छता, अपशिष्ट जल प्रबंधन, शिकायत निवारण और जनभागीदारी शामिल हैं। मुख्य तौर पर करीब 1500 अंक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए मिलेंगे। इसमें बेहतर नंबर के लिए पटना नगर निगम चक बैरिया के लीगेसी वेस्ट निपटारे पर फोकस कर रहा है। करीब 27 एकड़ की लीगेसी वेस्ट को निपटाया गया है। दो एजेंसियों के प्रोसेसिंग प्लांट की लगातार निगरानी की जा रही है। कचरा उठाव पर 1500 अंक कूड़ा अलग करना, उसका उठाव और परिवहन व्यवस्था को लेकर 1500 अंक दिए जाएंगे। नगर निगम ने सभी प्रतिष्ठानों के लिए आदेश जारी किया है। जहां से ज्यादा कचरा निकलता है, उन्हें उसे अलग-अलग करके निपटारा करना होगा। घरेलू कचरा भी अलग करके देना है। वैसे इसमें अक्सर लापरवाही होती है। ऐसे में कचरा वर्गीकरण पर अभी से ही ध्यान देने की जरूरत है। जनता से सीधी बात के कारण और फायदे 5 पॉइंट में जानें फीडबैक का महत्व बढ़ा: स्वच्छता सर्वे में इस बार फीडबैक के अंक 500 से बढ़ाकर 1000 किए गए हैं। रैंकिंग में इसका महत्व दोगुना हो गया है। जमीनी हकीकत: कागजी दावों के बजाय यह जानना कि क्या वास्तव में रोज डोर-टू-डोर कचरा उठाया जा रहा है। सूखे व गीले कचरे को अलग किया जा रहा है। नागरिक भागीदारी: स्वच्छता के प्रति नागरिकों की आदतों में सुधार लाने के लिए सीधे जागरूक करना और उनकी राय जानना। सही समस्याएं पता चलेंगी: फीडबैक को अधिक प्रभावी व व्यापक बनाने के लिए प्रत्यक्ष संवाद होगा। लोगों की परेशानी का स्पष्ट पता चल सकेगा। कचरा मुक्त शहर: शौचालयों के सही उपयोग और सार्वजनिक स्थानों की सफाई को सुनिश्चित करने के लिए लोगों से सीधी प्रतिक्रिया ली जा रही है। निगम प्रशासन घालमेल नहीं कर सकेगा। इस तरह से बढ़ेगी स्वच्छता नालों की सफाई के लिए टीमें: नगर निगम ने शहर के प्रमुख नालों और ड्रेनेज की सफाई के लिए विशेष टीमें बनाई हैं। जनवरी अंत तक सभी बड़े नालों की एक बार सफाई हो गई है। अब दूसरे चरण की नाला उड़ाही चल रही है। जनभागीदारी और सख्त नियम: स्वच्छता सर्वे को लेकर निगम प्रशासन जनभागीदारी और नियमों के सख्त पालन पर जोर दे रहा है। सार्वजनिक स्थानों पर खुले में थूकने पर 500 रुपये जुर्माना लगेगा। नियम तोड़ने वालों की तस्वीरें शहर में सार्वजनिक स्क्रीन पर दिखाई जाएंगी, ताकि नागरिकों में जिम्मेदारी और नियम पालन की भावना विकसित हो। कूड़ा पॉइंट को हटाना: पटना नगर निगम इस बार गार्बेज फ्री सिटी श्रेणी में शहर को 5 स्टार रेटिंग दिलाना चाहता है। इसके लिए पिछली बार करीब 650 कूड़ा पॉइंट को हटाया गया था। इसे लगातार बेहतर रखने पर फोकस किया जा रहा है। यह है कमजोर पक्ष जर्जर गाड़ियों से कचरा उठाव: कचरा प्रबंधन के लिए गीला, सूखा व हानिकारक कूड़ा अलग-अलग उठाना जरूरी है। जबकि शहर के वार्डों में यह पूरी तरह से नहीं हो रहा है। इसकी मुख्य वजह जर्जर गाड़ियों से कचरा उठाना है। सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रभावी रोक नहीं: शहर में प्लास्टिक कचरा सबसे बड़ी मुसीबत है। सिंगल यूज प्लास्टिक बैन है, लेकिन नगर निगम की तरफ से कार्रवाई नहीं होने से यह रोक प्रभावी नहीं है। दुकानदार से लेकर आम लोग सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल कर रहे हैं। 10 मानकों पर मिलेंगे नंबर दर्शनीय स्वच्छता: 1500 कूड़ा वर्गीकरण, संग्रहण एवं परिवहन: 1500 ठोस अपशिष्ट प्रबंधन: 1500 स्वच्छता तक पहुंच: 1500 प्रयुक्त जल प्रबंधन: 1000 गाद-कीचड़ की सफाई के लिए मशीनीकरण: 1500 स्वच्छता की दिशा में विभिन्न प्रयास: 1500 शहर में जरूरी सेवाओं की स्थिति: 1000 सफाई कर्मचारियों का समग्र कल्याण: 500 नागरिक प्रतिक्रिया और शिकायत निवारण: 1000 स्वच्छता सर्वे को लेकर 15 अप्रैल के बाद केंद्रीय टीम आएगी। नगर निगम सभी तय घटकों पर बेहतर काम कर रहा है। चक बैरिया में लीगेसी वेस्ट का निस्तारण तेजी से किया जा रहा है, ताकि बेहतर अंक मिलें। -यशपाल मीणा, नगर आयुक्त स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26 की प्रक्रिया में अहम बदलाव हुआ है। अब शहर के लोगों से ऑनलाइन फीडबैक नहीं लिया जाएगा। 15 अप्रैल के बाद केंद्रीय टीम पटना आएगी। वार्डों में जाकर सीधे लोगों से साफ-सफाई की जानकारी लेगी। टीम यहां कम से कम 7 दिनों तक रहेगी। नागरिकों से सीधी बातचीत के बाद सिटीजन फीडबैक की पूरी रिपोर्ट बनेगी। पिछले साल फीडबैक देने के लिए लोगों को क्यूआर कोड स्कैन करना था। स्वच्छता सर्वे में इस बार 12,500 अंकों के आधार पर शहरों में साफ-सफाई का मूल्यांकन होगा। इसमें कचरा प्रबंधन, दृश्य स्वच्छता, अपशिष्ट जल प्रबंधन, शिकायत निवारण और जनभागीदारी शामिल हैं। मुख्य तौर पर करीब 1500 अंक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए मिलेंगे। इसमें बेहतर नंबर के लिए पटना नगर निगम चक बैरिया के लीगेसी वेस्ट निपटारे पर फोकस कर रहा है। करीब 27 एकड़ की लीगेसी वेस्ट को निपटाया गया है। दो एजेंसियों के प्रोसेसिंग प्लांट की लगातार निगरानी की जा रही है। कचरा उठाव पर 1500 अंक कूड़ा अलग करना, उसका उठाव और परिवहन व्यवस्था को लेकर 1500 अंक दिए जाएंगे। नगर निगम ने सभी प्रतिष्ठानों के लिए आदेश जारी किया है। जहां से ज्यादा कचरा निकलता है, उन्हें उसे अलग-अलग करके निपटारा करना होगा। घरेलू कचरा भी अलग करके देना है। वैसे इसमें अक्सर लापरवाही होती है। ऐसे में कचरा वर्गीकरण पर अभी से ही ध्यान देने की जरूरत है। जनता से सीधी बात के कारण और फायदे 5 पॉइंट में जानें फीडबैक का महत्व बढ़ा: स्वच्छता सर्वे में इस बार फीडबैक के अंक 500 से बढ़ाकर 1000 किए गए हैं। रैंकिंग में इसका महत्व दोगुना हो गया है। जमीनी हकीकत: कागजी दावों के बजाय यह जानना कि क्या वास्तव में रोज डोर-टू-डोर कचरा उठाया जा रहा है। सूखे व गीले कचरे को अलग किया जा रहा है। नागरिक भागीदारी: स्वच्छता के प्रति नागरिकों की आदतों में सुधार लाने के लिए सीधे जागरूक करना और उनकी राय जानना। सही समस्याएं पता चलेंगी: फीडबैक को अधिक प्रभावी व व्यापक बनाने के लिए प्रत्यक्ष संवाद होगा। लोगों की परेशानी का स्पष्ट पता चल सकेगा। कचरा मुक्त शहर: शौचालयों के सही उपयोग और सार्वजनिक स्थानों की सफाई को सुनिश्चित करने के लिए लोगों से सीधी प्रतिक्रिया ली जा रही है। निगम प्रशासन घालमेल नहीं कर सकेगा। इस तरह से बढ़ेगी स्वच्छता नालों की सफाई के लिए टीमें: नगर निगम ने शहर के प्रमुख नालों और ड्रेनेज की सफाई के लिए विशेष टीमें बनाई हैं। जनवरी अंत तक सभी बड़े नालों की एक बार सफाई हो गई है। अब दूसरे चरण की नाला उड़ाही चल रही है। जनभागीदारी और सख्त नियम: स्वच्छता सर्वे को लेकर निगम प्रशासन जनभागीदारी और नियमों के सख्त पालन पर जोर दे रहा है। सार्वजनिक स्थानों पर खुले में थूकने पर 500 रुपये जुर्माना लगेगा। नियम तोड़ने वालों की तस्वीरें शहर में सार्वजनिक स्क्रीन पर दिखाई जाएंगी, ताकि नागरिकों में जिम्मेदारी और नियम पालन की भावना विकसित हो। कूड़ा पॉइंट को हटाना: पटना नगर निगम इस बार गार्बेज फ्री सिटी श्रेणी में शहर को 5 स्टार रेटिंग दिलाना चाहता है। इसके लिए पिछली बार करीब 650 कूड़ा पॉइंट को हटाया गया था। इसे लगातार बेहतर रखने पर फोकस किया जा रहा है। यह है कमजोर पक्ष जर्जर गाड़ियों से कचरा उठाव: कचरा प्रबंधन के लिए गीला, सूखा व हानिकारक कूड़ा अलग-अलग उठाना जरूरी है। जबकि शहर के वार्डों में यह पूरी तरह से नहीं हो रहा है। इसकी मुख्य वजह जर्जर गाड़ियों से कचरा उठाना है। सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रभावी रोक नहीं: शहर में प्लास्टिक कचरा सबसे बड़ी मुसीबत है। सिंगल यूज प्लास्टिक बैन है, लेकिन नगर निगम की तरफ से कार्रवाई नहीं होने से यह रोक प्रभावी नहीं है। दुकानदार से लेकर आम लोग सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल कर रहे हैं। 10 मानकों पर मिलेंगे नंबर दर्शनीय स्वच्छता: 1500 कूड़ा वर्गीकरण, संग्रहण एवं परिवहन: 1500 ठोस अपशिष्ट प्रबंधन: 1500 स्वच्छता तक पहुंच: 1500 प्रयुक्त जल प्रबंधन: 1000 गाद-कीचड़ की सफाई के लिए मशीनीकरण: 1500 स्वच्छता की दिशा में विभिन्न प्रयास: 1500 शहर में जरूरी सेवाओं की स्थिति: 1000 सफाई कर्मचारियों का समग्र कल्याण: 500 नागरिक प्रतिक्रिया और शिकायत निवारण: 1000


