भीलवाड़ा जिले में बजरी खनन पर राजस्थान उच्च न्यायालय की रोक और सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बावजूद, बजरी का काला कारोबार धड़ल्ले से जारी है। हैरानी की बात यह है कि बनास नदी में फिलहाल एक भी वैध लीज नहीं है, लेकिन जिस क्षेत्र को राज्य सरकार ने अपने ही उपक्रम राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड (आरएसएमएम) को आवंटित किया है, वहीं से माफिया रोजाना सैकड़ों टन बजरी निकाल रहे हैं। पर्यावरणीय मंजूरी के अभाव में सरकारी लीज तो धरातल पर नहीं उतर पाईं, लेकिन कागजी लेटलतीफी का बजरी माफिया भरपूर फायदा उठा रहे हैं।
कागजों में उलझी लीज, खत्म हुई एलओआई की अवधि
राज्य सरकार के खान एवं पेट्रोलियम विभाग ने आकोला क्षेत्र के ग्राम सोपरा, अडसीपुरा, आकोला में बजरी खनन के लिए आरएसएमएम के पक्ष में तीन मंशा पत्र (एलओआई) जारी किए थे। 76.77, 67.70 तथा 96.99 हेक्टेयर के कुल तीन लीजें आवंटित की गई थीं। लेकिन, सरकारी उपक्रम होने के बावजूद इसे राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (सीया) जयपुर से ईसी नहीं मिल पाई है। जबकि राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से की जनसुनवाई भी हो चुकी है। अब स्थिति यह है कि महीनों बीत जाने के कारण एलओआई की 6 माह की निर्धारित अवधि भी समाप्त हो चुकी है और आरएसएमएम को मियाद बढ़ाने के लिए नए सिरे से आवेदन करना पड़ा है।
माफिया की चांदी, विभागों में ब्लेम-गेम
खान विभाग के अधिकारियों की मानें तो ईसी मिलने के बाद भी लीज चालू होने में कम से कम 4 से 5 महीने का समय लगेगा। लेकिन इस देरी के बीच माफिया सक्रिय हैं। इन तीनों आवंटित लीज क्षेत्रों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में बजरी से भरे डंपर, ट्रक और ट्रैक्टर-ट्रॉलियां बेरोकटोक निकल रही हैं। अवैध दोहन को रोकने के सवाल पर दोनों विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टाल रहे हैं।
खान विभाग का तर्क कि चूंकि यह क्षेत्र अब आरएसएमएम को आवंटित कर दिया गया है, इसलिए वहां हो रहा अवैध खनन रोकना आरएसएमएम का ही काम है। उधर आरएसएमएम कंपनी के प्रतिनिधियों का कहना है कि अवैध खनन पर कार्रवाई करना उनके अधिकार में नहीं है, यह पूरी तरह से खान विभाग की ही जिम्मेदारी है। आरएसएमएम के अधिकारियों का कहना है कि सीया से जल्द ही ईसी मिलने की संभावना है। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।


