बिहार के सरकारी स्कूलों में ‘नो एज-गैप’ मॉडल लागू…अब उम्र से तय की जाएगी बच्चों की क्लास

बिहार के सरकारी स्कूलों में ‘नो एज-गैप’ मॉडल लागू…अब उम्र से तय की जाएगी बच्चों की क्लास

बिहार के सरकारी स्कूलों में अब एडमिशन का आधार उम्र होगा, न कि अभिभावक या शिक्षक की इच्छा। नई व्यवस्था में कक्षा 1 में न्यूनतम आयु 5 वर्ष और 12वीं में अधिकतम आयु 19 वर्ष तय की गई है। इसका उद्देश्य कक्षाओं में ‘एज-गैप’ खत्म करना और सीखने की गुणवत्ता सुधारना है। अब तक टार्गेट पूरा करने के दबाव में किसी भी उम्र के बच्चों को किसी भी कक्षा में नामांकित कर दिया जाता था। ग्रामीण क्षेत्रों में 10-12 वर्ष के बच्चे भी शुरुआती कक्षाओं में पढ़ते थे, जिससे उनकी सीखने की गति प्रभावित होती थी। नई व्यवस्था में उम्र के अनुरूप ही कक्षा तय होगी। अधिक उम्र वाले कमजोर छात्रों को पीछे नहीं रोका जाएगा, बल्कि उन्हें अगली कक्षा में एडमिशन मिलेगा। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने बताया कि उम्र के मुताबिक दाखिले से बच्चों को पढ़ाने और सीखने, दोनों में आसानी होगी। उम्र तय होने के 5 बड़े फायदे
एकरूपता: सभी स्कूलों में एक उम्र के छात्र एक साथ पढ़ेंगे, कक्षा में संतुलन बनेगा।मेंटल ग्रोथ: उम्र के अनुसार पाठ्यक्रम से बच्चों की समझ और सीखने की क्षमता बढ़ेगी।ट्रांसफर में आसानी: दूसरे स्कूल या राज्य में दाखिले के समय उम्र-कक्षा का मिलान आसान होगा।टीचिंग क्वालिटी: शिक्षक समान स्तर के बच्चों को पढ़ा सकेंगे, समझाने में ज्यादा आसानी होगी। एडमिशन का नया नियम }मनमानी पर लगेगी रोक बिहार के सरकारी स्कूलों में अब एडमिशन का आधार उम्र होगा, न कि अभिभावक या शिक्षक की इच्छा। नई व्यवस्था में कक्षा 1 में न्यूनतम आयु 5 वर्ष और 12वीं में अधिकतम आयु 19 वर्ष तय की गई है। इसका उद्देश्य कक्षाओं में ‘एज-गैप’ खत्म करना और सीखने की गुणवत्ता सुधारना है। अब तक टार्गेट पूरा करने के दबाव में किसी भी उम्र के बच्चों को किसी भी कक्षा में नामांकित कर दिया जाता था। ग्रामीण क्षेत्रों में 10-12 वर्ष के बच्चे भी शुरुआती कक्षाओं में पढ़ते थे, जिससे उनकी सीखने की गति प्रभावित होती थी। नई व्यवस्था में उम्र के अनुरूप ही कक्षा तय होगी। अधिक उम्र वाले कमजोर छात्रों को पीछे नहीं रोका जाएगा, बल्कि उन्हें अगली कक्षा में एडमिशन मिलेगा। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने बताया कि उम्र के मुताबिक दाखिले से बच्चों को पढ़ाने और सीखने, दोनों में आसानी होगी। उम्र तय होने के 5 बड़े फायदे
एकरूपता: सभी स्कूलों में एक उम्र के छात्र एक साथ पढ़ेंगे, कक्षा में संतुलन बनेगा।मेंटल ग्रोथ: उम्र के अनुसार पाठ्यक्रम से बच्चों की समझ और सीखने की क्षमता बढ़ेगी।ट्रांसफर में आसानी: दूसरे स्कूल या राज्य में दाखिले के समय उम्र-कक्षा का मिलान आसान होगा।टीचिंग क्वालिटी: शिक्षक समान स्तर के बच्चों को पढ़ा सकेंगे, समझाने में ज्यादा आसानी होगी। एडमिशन का नया नियम }मनमानी पर लगेगी रोक  

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