लखनऊ कैसरबाग स्थित बायोस्कोप ने अड्डेबाज़ी के अंतर्गत पंचतंत्र अनसेंसर्ड के साथ एक रोचक कहानी-वाचन और प्रदर्शन का आयोजन किया। जिसमें वेलेंटीना त्रिवेदी और नितिन सुखीजा ने अहम भूमिका निभाई ।इस प्रस्तुति में पंचतंत्र को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया, जो लगभग 300 ईसा पूर्व विष्णु शर्मा द्वारा रचित प्राचीन भारतीय कथाओं का संग्रह है। आज भले ही इन्हें बच्चों की कहानियों के रूप में जाना जाता हो, लेकिन मूल रूप से पंचतंत्र नीति, आचरण, राज्यकौशल और मानवीय व्यवहार की गहरी समझ प्रदान करने के लिए रचा गया था। वेलेंटीना त्रिवेदी ने कहा ये कहानियाँ केवल पशु कथाएँ नहीं हैं। इन्हें राजकुमारों को शिक्षित करने और जीवन के विभिन्न पहलुओं से जुड़ा ज्ञान देने के लिए लिखा गया था।आज कई लोग यह भी नहीं जानते कि ये कहानियाँ पंचतंत्र का ही हिस्सा हैं। भारत में कहानियों का एक भंडार है ऐसी कहानियाँ जिनका ज्ञान शाश्वत है। ये कहानियां किसी खजाने से कम नहीं। इन कहानियों को संजोना हमारी जिम्मेदारी है। नितिन सुखीजा ने सत्र की शुरुआत राजा अमर सिंह और उनके तीन मूर्ख पुत्रों की कहानी से की, जिससे पंचतंत्र की उत्पत्ति का संदर्भ स्थापित हुआ। उन्होंने बताया कि कैसे एक चिंतित राजा अपने पुत्रों के लिए शिक्षक की तलाश में था, और तब विष्णु शर्मा ने यह चुनौती स्वीकार की, यह वचन देते हुए कि वे छह महीनों में राजकुमारों को योग्य और बुद्धिमान शासक बना देंगे। कहानी-वाचन आगे मित्र भेद जैसे प्रसिद्ध खंडों के माध्यम से आगे बढ़ा, जिसमें इन कथाओं की परतदार संरचना, हास्य और नैतिक जटिलता को उभारा गया। दर्शकों ने इन शास्त्रीय कथाओं की गहराई से जुड़ाव महसूस किया।


