Plastic Free Health Challenge: सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक, हम प्लास्टिक से घिरे हुए हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह प्लास्टिक सिर्फ कचरा ही नहीं फैला रहा, बल्कि हमारे खून और अंगों तक पहुंच चुका है? हालिया शोध बताते हैं कि प्लास्टिक से निकलने वाले केमिकल्स (जैसे BPA और Phthalates) हमारे शरीर के नेचुरल सिस्टम को खराब कर रहे हैं। आइए डॉ तरंग कृष्णा से समझते है इस 14 दिन के प्लास्टिक छोड़ने के चैलेंज को।
1. पहले 3 दिन शरीर से टॉक्सिन्स निकलेंगे
जैसे ही आप प्लास्टिक की बोतलों से पानी पीना बंद करते हैं, शरीर में नए रसायनों का प्रवेश रुक जाता है। पहले तीन दिनों में आपकी किडनी और लिवर खून में मौजूद पुराने टॉक्सिन्स को फिल्टर करके बाहर निकालना शुरू कर देते हैं। आप खुद को पहले से हल्का महसूस करने लगते हैं।
2. 7वें दिन तक हार्मोन्स संतुलित-
प्लास्टिक के केमिकल्स हमारे शरीर के एंडोक्राइन सिस्टम को बिगाड़ देते हैं, जिससे तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ता है। एक हफ्ते तक प्लास्टिक मुक्त रहने पर शरीर का हार्मोनल लेवल स्थिर होने लगता है। महिलाओं में पीसीओडी (PCOD) और पुरुषों में थायराइड जैसी समस्याओं के रिस्क कम होने लगते हैं।
3. 10वें दिन पाचन में सुधार-
प्लास्टिक के डिब्बों में गर्म खाना खाने से निकलने वाले केमिकल्स पेट की लाइनिंग को नुकसान पहुंचाते हैं। 10 दिन तक कांच या स्टील के बर्तनों का उपयोग करने से पाचन तंत्र की सूजन (Inflammation) कम हो जाती है। इससे गैस और एसिडिटी की समस्या में राहत मिलती है और मेटाबॉलिज्म तेज होता है।
4. 12वें दिन त्वचा पर दिखेगी कुदरती चमक-
जब शरीर के अंदर प्लास्टिक के जहरीले कण कम होते हैं, तो इसका सीधा असर आपकी स्किन पर दिखता है। खून साफ होने से चेहरे के मुहांसे कम होने लगते हैं और त्वचा में एक नई चमक (Glow) नजर आने लगती है। आपकी नींद की क्वालिटी भी पहले से बेहतर हो जाती है।
5. 14वां दिन रीसेट मोड-
दो हफ्ते पूरे होते-होते आपका शरीर ‘क्लीन मोड’ पर आ जाता है। रिसर्च के अनुसार, 14 दिन का ब्रेक शरीर में बीपीए (BPA) के स्तर को काफी हद तक कम कर देता है। अब आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) संक्रमणों से लड़ने के लिए ज्यादा मजबूत हो चुकी होती है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


