CBSE New Rules 2026 : देश के शिक्षा ढ़ाचे में बड़े बदलाव के लिए लाई गई नई शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के तहत अब स्कूल शिक्षा में सुधार की दिशा में कदम तेज हो गए हैं। इसी कड़ी में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के एक सीनियर अधिकारी के अनुसार, सत्र 2026-27 से नया पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। इसते तहत कक्षा 6 और कक्षा 9 के लिए लिए बड़े बदलाव किए गए हैं।
यह पूरा बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा (NCF) के दिशा-निर्देशों के तहत किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य शिक्षा को अधिक लचीला, कौशल आधारित और छात्र-केंद्रित बनाना है। CBSE के इस कदम से स्कूलों में मल्टीलिंगुअल एजुकेशन और विषय आधारित विशेषज्ञता को बढ़ावा मिलेगा।
मल्टीलिंगुअल एजुकेशन को बढ़ावा
नई शिक्षा नीति के मुताबिक, कक्षा 6 से छात्रों के लिए तीसरी भाषा पढ़ना अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा (NCF) की सिफारिशों पर आधारित है, जिसमें R1, R2 और R3 के रूप में तीन भाषाओं को संरचित किया गया है। दरअसल इससे पहले कक्षा 6 से लेकर 10 तक छात्र केवल दो भाषा ही पढ़ते थे , लेकिन अब नई नीति के तहत तीन भाषाएं सिखाई जाएंगी।
इसमें पहली दो भाषाएं भारतीय मूल की होना जरूरी है। यानी कोई भी क्षेत्रीय भाषा जैसे तमिल, मराठी, पंजाबी आदि इस कदम का उद्देश्य छात्रों में भाषाई विविधता को बढ़ावा देना है। देश की सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है। इसके अलावा तीसरी कोई भी विदेशी भाषा जैसे कि फ्रेंच, जर्मन हो सकती है। इससे छात्र न केवल अपनी मातृभाषा बल्कि अन्य भारतीय भाषाओं को भी बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।
विषय के लिए स्टैंडर्ड और एडवांस विकल्प
दूसरी तरफ CBSE ने कक्षा 9 से मैथ्स और साइंस विषयों में दो स्तर की पढ़ाई शुरू करने का फैसला किया है। इसमें एक स्टैंडर्ड लेवल होगा जो सभी छात्रों के लिए अनिवार्य रहेगा, जबकि दूसरा एडवांस लेवल ऑप्शनल होगा। इसका मकसद छात्रों की अलग-अलग सीखने की क्षमता और रुचि के अनुसार विकल्प देना है। जो छात्र इन विषयों में गहराई से पढ़ना चाहते हैं, वे एडवांस कोर्स चुन सकते हैं, जबकि बाकी छात्र बेसिक समझ के साथ स्टैंडर्ड लेवल पूरा कर सकेंगे।


