ऐसा लग रहा है जैसे हमारी पहचान ही छीन ली गई है। अगर पहचान ही नहीं रहेगी, तो हम क्या साबित करेंगे? न हम पूरी तरह मेल हैं, न फीमेल, तो हम क्या हैं? अगर कोई मुझसे पूछे कि ‘तुम क्या हो?’, तो मेरे पास कोई जवाब नहीं है। ये कहना है रायपुर के अभिनव कुमार का, जो पहले शिवानी (बदला हुआ नाम) थे। दरअसल, संसद में ट्रांसजेंडर पर्सन्स संशोधन विधेयक 2026 पास होने के बाद LGBTQ+ समुदाय के लोगों में नाराजगी है। देश भर विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। छत्तीसगढ़ में भी LGBTQ+समुदाय ने अपनी पहचान, डॉक्यूमेंट, पढ़ाई और रोजगार को लेकर चिंता जताई है। LGBTQ+ समुदाय के लोगों का कहना है कि यह कानून उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर सीधा असर डाल सकती है। अब तो सुसाइड ही रास्ता नजर आ रहा है। आखिर इस विधेयक में ऐसा क्या है, जिसका विरोध किया जा रहा है। इसे समझने के लिए दैनिक भास्कर डिजिटल की टीम ने रायपुर में LGBTQ+ समुदाय के लोगों और कानून के जानकारों से बातचीत की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… इससे पहले देखिए LGBTQ+ समुदाय के प्रदर्शन की तस्वीरें- मेडिकल जांच और सख्त नियमों से नाराजगी रायपुर में LGBTQ+ समुदाय के लोगों ने बातचीत में कहा कि पहले जहां ट्रांसजेंडरों की खुद की पहचान मान्य थी, अब सरकार ने मेडिकल जांच और सख्त नियम जोड़ दिए हैं। हमें ट्रांसजेंडर आइडेंटिटी से निकाल दिया गया है। इसके लिए फिजिकल स्क्रिनिंग की जाएगी। ये हमारी गरिमा के साथ भी खिलवाड़ है। जानिए संशोधित विधेयक में क्या है? अब जानिए लड़की से लड़का बने ट्रांसमैन की कहानी मेरा नाम अभिनव कुमार है। पहले मेरा नाम शिवानी (बदला हुआ नाम) था। मैं बिहार से भागकर रायपुर में रह रहा हूं और अभी बीएड की पढ़ाई कर रहा हूं। बचपन से ही मुझे लगता था कि मैं बाकी लड़कियों जैसा नहीं हूं। मेरे अंदर वैसे लक्षण ही नहीं थे। मुझे लड़कियों वाली चीजें पसंद नहीं थीं। मैं लड़कों की तरह खेलता था, वैसे ही सोचता था। पढ़ाई-लिखाई ठीक चल रही थी, लेकिन जैसे-जैसे बड़ा हुआ, मेरी परेशानियां भी बढ़ने लगीं। जब मेरे शरीर में बदलाव आने लगे, तभी असली संघर्ष शुरू हुआ। मैं कभी भी मानसिक रूप से यह महसूस नहीं कर पाया कि मैं उसी जेंडर का हूं, जिसमें मेरा जन्म हुआ है। मेरे अंदर वो फीलिंग कभी आई ही नहीं। घरवालों का दबाव भी बढ़ता गया। वे कहते थे कि अब बड़े हो रहे हो, लड़कियों जैसा रहो, वैसे कपड़े पहनो, वैसा व्यवहार करो। बचपन तक तो लड़कों के कपड़े पहनना सामान्य था, लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ी, मुझे रोका जाने लगा। जब मैं करीब 12 साल का था, तब शरीर में बदलाव तेज होने लगे और मैं यह सब सह नहीं पाया। उसी समय मैंने घर छोड़ने का फैसला कर लिया। बाहर की दुनिया भी आसान नहीं थी। लोग हमेशा मौके की तलाश में रहते हैं कि कैसे किसी का फायदा उठाया जाए। अभिनव ने आगे बताया कि अगर किसी को पता चल जाए कि मैं ट्रांसजेंडर हूं, तो वो परेशान करने लगते हैं। इसलिए मैंने अपनी पहचान छुपाकर रखी। कुछ लोगों को पता चला तो उन्होंने मुझे परेशान करने की कोशिश भी की। मेरे पास न परिवार का सहारा था, न कोई कानूनी या सामाजिक मदद। फिर जब नालसा जजमेंट आया और ट्रांसजेंडर प्रोटेक्शन एक्ट लागू हुआ, तब पहली बार लगा कि हमें भी पहचान मिल रही है। उस समय हमें यह अधिकार मिला कि हम खुद को ट्रांसजेंडर के रूप में पहचान सकते हैं। लेकिन अब जो नया कानून आया है, उससे ऐसा लग रहा है जैसे ट्रांसजेंडर जैसा कुछ होता ही नहीं। मैं सोचता था कि एक दिन मैं अपनी पहचान के अनुसार पूरी तरह जी पाऊंगा, ट्रांजिशन कर पाऊंगा, नौकरी करूंगा। लेकिन अब लगता है कि सब खत्म हो जाएगा। नाम लड़की का, चेहरा लड़के का…कॉलेजों ने एडमिशन से किया इंकार अभिनव ने बताया कि मैं अभी रायपुर में रहकर पढ़ाई कर रहा हूं। बहुत मुश्किल से मुझे एडमिशन मिला। मेरे दस्तावेजों में नाम लड़की का था और चेहरा लड़के का, इसी वजह से कई कॉलेजों ने मुझे सीधे एडमिशन देने से इंकार कर दिया। हर जगह यही सवाल होता था कि मुझे किस श्रेणी में रखा जाए। आखिरकार नालसा जजमेंट का हवाला देने के बाद ही रायपुर के एक कॉलेज में दाखिला मिल पाया। लेकिन अब डर है कि अगर यह नया कानून लागू हुआ, तो कहीं मुझे यहां से भी बाहर न कर दिया जाए। मेरी सबसे बड़ी समस्या मेरे डॉक्यूमेंट्स हैं। उनमें जेंडर मिसमैच है। इसी वजह से मुझे न प्राइवेट नौकरी मिलती है, न सरकारी। ऐसे में मैं क्या करूं? कहां जाऊं? अगर मैं अपनी पहचान बता दूं, तो लोग मेरा शोषण करेंगे और अगर छुपाऊं, तो जिंदगी भर डर में जीना पड़ेगा। मैं कभी-कभी मजदूरी करता हूं, क्योंकि वहां कोई पहचान नहीं पूछता। दिनभर 8-10 घंटे काम करने के बाद 200-300 रुपए मिलते हैं। उसी से मैं अपनी पढ़ाई का खर्च निकालता हूं। लाखों खर्च कर सर्जरी कराई…अब वही पहचान फिर से सवालों में अभिनव ने कहा मैंने अपनी पहचान के लिए बहुत लंबा और मुश्किल संघर्ष किया है। सर्जरी करवाने का फैसला आसान नहीं था। इसके लिए मैंने ट्यूशन पढ़ाया, छोटे-मोटे काम किए, यहां तक कि 10वीं-12वीं में मिली प्रोत्साहन राशि तक जोड़कर पैसे इकट्ठा किए। करीब एक लाख रुपए जमा करने के बाद इंदौर जाकर सर्जरी करवाई। सर्जरी के बाद पहली बार लगा कि अब मैं वही बन पाया हूं, जो मैं हमेशा से था। जैसे जिंदगी अपने सही रास्ते पर आ गई हो। लेकिन समाज आज भी मुझे वैसे स्वीकार नहीं करता। हर बार किसी न किसी तरीके से यह एहसास दिला दिया जाता है कि ‘तुम ये नहीं हो।’ पहले मेरा शरीर ही मेरे लिए सबसे बड़ा बोझ था। मैं हमेशा सोचता था कि मैं ऐसा क्यों हूं। इसी वजह से सर्जरी करवाई, ताकि मेरा शरीर मेरे दिमाग और मेरी असली पहचान के मुताबिक हो सके। लेकिन अब फिर से सब कुछ अधूरा सा लगने लगा है। भविष्य पूरी तरह अंधेरा दिख रहा है। न पढ़ाई का भरोसा है, न नौकरी का। ऐसा लग रहा है जैसे हमारी पहचान ही छीन ली गई है। अगर पहचान ही नहीं रहेगी, तो हम क्या साबित करेंगे? न हम पूरी तरह मेल हैं, न फीमेल तो हम क्या हैं? अगर कोई मुझसे पूछे कि ‘तुम क्या हो?’, तो मेरे पास कोई जवाब नहीं है। अब तो ऐसा लगने लगा है कि हमारे पास कोई रास्ता ही नहीं बचा। क्योंकि हम फिर से वैसे नहीं बन सकते, जैसे समाज हमें देखना चाहता है। हमारी पहचान, हमारा दिमाग, हमारी सोच..ये सब बदला नहीं जा सकता। ‘राशन कार्ड भी रद्द हुआ तो जिएंगे कैसे?’ रायपुर की चांद किन्नर ने कहा कि गुढ़ियारी इलाके में रहती हूं। 2026 में जो ट्रांसजेंडर संशोधन बिल पास किया गया है, हम उसका विरोध करते हैं। इस बिल के कारण हमारे आधार और राशन कार्ड तक रद्द होने का डर है। अगर ऐसा हुआ, तो हमारे पास जीने का कोई सहारा नहीं बचेगा। हम जहां भी नौकरी के लिए जाएंगे, हमें रिजेक्ट कर दिया जाएगा। ऐसे में सवाल यही है हम जिएंगे कैसे? चांद ने बताया कि मुझे बचपन से ही अलग होने का एहसास था। ये अंदर की बात है, इसे बदला नहीं जा सकता। अगर कोई कहे कि कपड़े बदल लो, तो क्या पहचान बदल जाएगी? ऐसा नहीं होता। मैं 12-13 साल की उम्र में घर छोड़कर किन्नर समाज में आ गई थी। गुरुओं के साथ रहकर मैंने जिंदगी सीखी और पढ़ाई भी की। 2014-15 में जब कानून आया था, तब लगा था कि सरकार हमें समझ रही है। हमें पहचान मिली थी। लेकिन अब 2026 के इस बिल के बाद ऐसा लग रहा है कि हमारी वही पहचान फिर से खत्म की जा रही है। आज जो कुछ भी हूं, अपनी मेहनत से हूं। लेकिन अगर मेरे दस्तावेज ही रद्द हो गए, तो मैं जिऊंगी कैसे? खाऊंगी कैसे? हमारी मांग सिर्फ इतनी है कि इस बिल को वापस लिया जाए और हमें हमारी पहचान और अधिकार लौटाए जाएं। सालों में बनाई पहचान…2 मिनट में खत्म होने का डर रायपुर की बॉबी फारिकार ने कहा कि 2026 में जो ट्रांसजेंडर बिल पास किया गया है, उसने हमारी जिंदगी को लेकर डर पैदा कर दिया है। हमें कहा जा रहा है कि हम मांग नहीं सकते, हमारे डॉक्यूमेंट्स रद्द हो सकते हैं और सर्जरी कराने वालों पर भी कार्रवाई हो सकती है। मैं 12 साल की उम्र में घर छोड़कर गुरुओं के पास आ गई थी। कई साल उनके साथ रही, फिर अपनी मेहनत से गुढ़ियारी में घर बनाया और अब वहीं रहती हूं। हम बधाई और मांगकर अपना गुजारा करते हैं। यही हमारी आजीविका है। हमारी चिंता सिर्फ अपनी नहीं है। हमारे समाज में बुजुर्ग किन्नर हैं, जो बीमार हैं और काम नहीं कर सकते। अगर ये व्यवस्था खत्म हुई, तो उनका क्या होगा? हमने अपनी जिंदगी धीरे-धीरे मेहनत से बनाई है। एक-एक चीज जोड़कर पहचान खड़ी की है। लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि इसे पलभर में खत्म किया जा रहा है। अगर यह बिल वापस नहीं लिया गया, तो हम इसके खिलाफ लड़ते रहेंगे। जरूरत पड़ी तो हम कड़ा कदम उठाने को भी मजबूर होंगे। सरकार का उद्देश्य वास्तव में उत्पीड़ित लोगों की पहचान करना इस मामले पर डॉ. भूपेंद्र करवंदे, सहायक प्राध्यापक (विधि), छत्तीसगढ़ कॉलेज, रायपुर ने कहा कि सरकार का उद्देश्य ‘वास्तव में उत्पीड़ित’ लाभार्थियों की पहचान करना है, ताकि जरूरतमंदों को उचित लाभ मिल सके। हालांकि, यह विधेयक स्व-पहचान के अधिकार पर असर डाल सकता है, क्योंकि इसमें पहचान के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट को अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। यह 2014 के NALSA फैसले के विपरीत माना जा रहा है, जिसमें स्व-पहचान को मान्यता दी गई थी। ………………….. इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… ट्रांसजेंडर अमेंडमेंट बिल-2026 के खिलाफ सड़कों पर उतरा LGBTQIA समुदाय: प्रदर्शनकारी बोले- जेंडर साबित करने कपड़े उतरवाए जाएंगे, गरिमा से समझौता नहीं, बिल वापस लो रायपुर में LGBTQIA (लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर, क्वीर, इंटरसेक्सुअल, असेक्सुअल) समुदाय ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। उन्होंने ट्रांसजेंडर पर्सन्स अमेंडमेंट बिल-2026 का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने “हमारी गरिमा हमारी लड़ाई” और “न्याय चाहिए, भेदभाव नहीं” जैसे नारे लगाए। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ भी नारेबाजी की। पढ़ें पूरी खबर…


