पाकिस्तान (Pakistan) में गरीबी बहुत तेज़ी से बढ़ रही है। देश की एक प्रमुख थिंक टैंक सोशल पॉलिसी एंड डेवलपमेंट सेंटर की हाल में जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में गरीबी की दर बढ़कर 43.5% हो गई है। यानी पाकिस्तान की लगभग आधी आबादी गरीब है। यह आंकड़ा पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (पीबीएस) और प्लानिंग कमीशन द्वारा दिए गए आधिकारिक 28.9% के अनुमान से काफी ज़्यादा है। दोनों के बीच 14.6% का बड़ा अंतर है।
शहरी इलाकों में तेज़ी से बढ़ी गरीबी
चौंकाने वाले खुलासे में एसपीडीसी की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2018-19 में जहाँ गरीबी की दर 36.6% थी, वह 2024-25 में बढ़कर 43.5% पहुंच गई है। इस दौरान करीब 2.7 करोड़ अतिरिक्त लोग गरीबी रेखा के नीचे धकेल दिए गए हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि शहरी इलाकों में गरीबी का बढ़ना ग्रामीण क्षेत्रों से भी तेज़ रहा है।
शहरों में गांवों से बदतर हालात
शहरी गरीबी 2018-19 के 32.1% से बढ़कर 42.1% हो गई, जबकि ग्रामीण गरीबी 39.3% से 44.3% तक पहुंच गई। यानी शहरों में रहने वाले लोगों की हालत ग्रामीण इलाकों से भी बदतर हो गई है। आमतौर पर विकासशील देशों में गरीबी ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा मानी जाती है, लेकिन पाकिस्तान में उलटा है। गांवों के मुकाबले शहरों में गरीबी ज़्यादा तेज़ी से बढ़ी है, जो चिंताजनक है।
आधिकारिक आंकड़ों पर सवाल
एसपीडीसी ने साफ कहा है कि सरकार के आंकड़े वास्तविकता से काफी दूर हैं। पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स ‘कॉस्ट ऑफ बेसिक नीड्स’ तरीके का इस्तेमाल करता है, जिसमें पुरानी गरीबी रेखा को कंज़्यूमर प्राइस इंडेक्स (सीपीआई) से अपडेट किया जाता है। लेकिन एसपीडीसी का कहना है कि यह तरीका निम्न आय वाले परिवारों की असल ज़रूरतों को नज़रअंदाज़ कर देता है। इसमें स्वास्थ्य सेवाएं, साफ पानी और अन्य जरूरी खर्चों को पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता।


