दौसा में फर्जी सिलिकोसिस सर्टिफिकेट जारी करने वाले 3 डॉक्टरों और 1 रेडियोग्राफर को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस खेल में शामिल अभी और डॉक्टरों पर शिकंजा कसना बाकी है। इन डॉक्टरों ने 1500 से ज्यादा मरीजों को फर्जी सिलिकोसिस पीड़ितों के सर्टिफिकेट जारी किए थे। यह पूरा खेल सिलिकोसिस मरीजों को मिलने वाले 3 लाख रुपए की मदद के लिए खेला गया। दलालों के जरिए पैसों का लेनदेन होता था। डॉक्टरों को कितना कमीशन मिलता था, इसका खुलासा पुलिस पूछताछ में होगा। करीब 3 साल पुराने इस मामले में गठित जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में मिलीभगत का पूरा खुलासा किया था। बताया था कि किस तरह से डॉक्टरों ने गड़बडियां कीं? जो वास्तव में सिलिकोसिस से पीड़ित मरीज थे, उनको रिजेक्ट कर दिया गया। जांच रिपोर्ट में तब क्या-क्या सच सामने आया था। पढ़िए इस रिपोर्ट में… मुकदमे के 2 साल बाद गिरफ्तारियां
30 मार्च को दौसा जिला अस्पताल में कार्यरत रहे चेस्ट-टीबी कनिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. मनोज ऊंचवाल, प्रमुख विशेषज्ञ मेडिसिन डॉ. डीएन शर्मा और रेडियोग्राफर मनोहर लाल को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद 31 मार्च को कनिष्ठ विशेषज्ञ मेडिसिन डॉ. प्रेम कुमार मीना की भी गिरफ्तारी हुई थी। ये गिरफ्तारियां मुकदमे के 2 साल बाद हुई हैं। दौसा में 29 जनवरी 2024 को फर्जी सिलिकोसिस सर्टिफिकेट के मामले में कुल 22 लोगों (इनमें 9 डॉक्टर, बाकी रेडियोग्राफर और अन्य स्टाफ) के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। सबसे ज्यादा 13 लोग दौसा के थे। बाकी अलग-अलग जिलों के। जांच प्रभावित नहीं हो, इसलिए सभी को एपीओ कर दिया गया था। दौसा में अचानक बढ़े केस से हुआ शक स्वास्थ्य विभाग और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने ऑडिट की तो सामने आया कि साल 2023 में प्रदेशभर में अचानक सिलिकोसिस के मामले बढ़ने लगे। जिलेवार रिपोर्ट में दौसा एकमात्र ऐसा जिला था जहां अचानक से केस कई गुना बढ़े थे। पूरे प्रदेश के मामलों के 46 फीसदी केस यहीं से थे। आमतौर पर जहां सिलिकोसिस मरीजों का आंकड़ा कुछ सौ में रहता था, नवंबर 2022 से सितंबर 2023 के बीच यह संख्या हजारों में चली गई। सिलिकोसिस मरीजों की एंट्री ‘राज सिलिकोसिस पोर्टल’ पर होती है। वर्ष 2023 में दौसा में 2 हजार 464 मरीजों को सिलिकोसिस मरीजों का रिकॉर्ड सामने आया। इतनी संख्या देख अधिकारियों को गड़बड़ी की आशंका हुई। स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डॉ. रवि प्रकाश शर्मा ने बताया मामले की जांच के लिए अक्टूबर 2023 में SMS मेडिकल कॉलेज के तीन डॉक्टर्स की रेडियोग्राफ रिव्यू कमेटी का गठन किया गया। कमेटी में वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. सी.पी. स्वर्णकार, डॉ. सुनील जाखड़ और डॉ. पंकज निथारवाल को शामिल किया गया। कमेटी को ‘राज सिलिकोसिस पोर्टल’ पर दौसा बोर्ड द्वारा प्रमाणित 2 हजार 464 मामलों की बारीकी से समीक्षा करने का जिम्मा सौंपा गया था। कमेटी ने अपनी जांच में 60 फीसदी से अधिक मामले फर्जी पाए थे। चौंकाने वाले आंकड़े- सच और झूठ का खेल कमेटी ने एक-एक कर सभी 2 हजार 464 मरीजों के एक्स-रे और दस्तावेजों की समीक्षा की। दरअसल, कोई मरीज सिलिकोसिस पीड़ित है या नहीं, इसमें एक्सरे जांच महत्वपूर्ण होती है। प्रमाण के तौर पर ‘राज सिलिकोसिस पोर्टल’ पर मरीज का एक्सरे अपलोड करना अनिवार्य होता है। कमेटी ने 65 इंच के हाई-डेफिनिशन मॉनिटर पर सभी मरीजों के एक्सरे की बारीकी से जांच की। जो परिणाम सामने आए, वो चौंकाने वाले थे। कमेटी ने नवंबर 2023 में अपनी जांच रिपोर्ट में कुल 2 हजार 464 मामलों में से 1 हजार 572 मामलों को फर्जी हैं। यानी मरीजों को फर्जी सर्टिफिकेट जारी कर दिए गए। कमेटी ने माना इन मरीजों के एक्स-रे में सिलिकोसिस के कोई साक्ष्य ही नहीं थे, फिर भी बोर्ड ने इन्हें सिलिकोसिस पीड़ित के रूप में प्रमाणित कर दिया। केवल 821 मामले ही ऐसे मिले जिन्हें सही मायने में सिलिकोसिस पीड़ित माना जा सकता था। हालांकि, इनमें से भी 97 मामलों के एक्स-रे अपलोड करने में अनियमितताएं पाई गईं। इसके अलावा 71 मामलों में कमेटी ने अपनी कोई भी राय नहीं दी, क्योंकि इनमें इतनी गंभीर अनियमितताएं थीं कि यह पहचानना भी मुश्किल था कि एक्स-रे उसी व्यक्ति का है या किसी और का। हर मरीज को 3 लाख रुपए, 12 करोड़ का चूना लगाया जांच में सामने आया कि 2 हजार 464 में से 413 फर्जी सिलिकोसिस पीड़ितों को सर्टिफिकेट जारी कर दिए गए। इसकी एवज में प्रति व्यक्ति 3 लाख रुपए के हिसाब से कुल 12 करोड़ 39 लाख रुपए का भुगतान किया गया। दरअसल, सिलिकोसिस पीड़ित घोषित होने पर सरकार मरीज को 3 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देती है। मरीज की मौत होने पर दो लाख रुपए की मदद परिवार को मिलती है। इसके अलावा सिलिकोसिस पीड़ित 1500 रुपए मासिक सामाजिक सुरक्षा पेंशन के भी हकदार होते हैं। एक ही मरीज का X-Ray कई मरीजों के लिए इस्तेमाल, असली रहे वंचित मरीज की X-Ray रिपोर्ट में एक तरफ उसका नाम और दिनांक होती है। लेकिन जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि कई मामलों में प्राथमिक एक्स-रे और बोर्ड के पास भेजे गए एक्स-रे पर अलग-अलग लोगों के नाम दर्ज कर रखे थे। वहीं, एक ही व्यक्ति के एक्स-रे को कई अलग-अलग मरीजों के नाम पर अपलोड कर रखा था। जांच कमेटी ने पाया कि जहां एक तरफ स्वस्थ लोगों को सिलिकोसिस पीड़ित बता दिया गया, वहीं दूसरी तरफ रेडियोलॉजिस्ट ने उन स्पष्ट मामलों को भी खारिज कर दिया जिनमें सिलिकोसिस के साफ लक्षण दिख रहे थे। मिलीभगत में शामिल इनको किया था एपीओ जनवरी 2024 में दौसा जिले में सिलिकोसिस के रोगियों को अनियमित भुगतान किए जाने के मामले में एसएमएस मेडिकल कॉलेज की चेस्ट रेडियोग्राफ कमेटी और जिला कलेक्टर दौसा द्वारा गठित जिला स्तरीय कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने 9 डॉक्टर और 11 कार्मिकों को एपीओ कर दिया था। जिसमें दौसा के डॉ. बत्तीलाल मीणा, डॉ. देवीनारायण शर्मा, डॉ. दिनेश कुमार, डॉ. मनोज ऊंचवाल, डॉ. प्रेम कुमार मीणा, डॉ. घनश्याम मीणा, सीकर के डॉ. प्रहलाद कुमार दायमा, चौमूं के डॉ. मानप्रकाश सैनी और भीलवाड़ा के डॉ. विजय प्रकाश महेश्वरी को एपीओ कर दिया था। इसी तरह सूरजगढ़ के जयप्रकाश, दौसा के कौशल जोशी, केतन कुमार, मनोहरलाल यादव, संदीप कुमार शर्मा, रामराज मीणा, शंकरलाल मीणा, करौली की पिंकी धाकड़, भिवाड़ी की रिंकू यादव, नाथद्वारा की संगीता शुकवाल और तिजारा के शरद कुमार यादव को एपीओ किया गया था। दलालों के जरिए पैसों का लेनदेन : डीएसपी मामले की जांच कर रहे दौसा डीएसपी बृजेश कुमार ने बताया कि अभी 3 डॉक्टर और एक रेडियोग्राफर गिरफ्तार हुआ है। प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि दलालों के माध्यम से पैसा लिया जाता था। पूरी हकीकत पूछताछ में सामने आएगी। अभी इस मामले में जिसकी भी भूमिका सामने आएगी, गिरफ्तार किया जाएगा। —- यह खबर भी पढ़िए… दौसा में 1 और सरकारी डॉक्टर गिरफ्तार:सिलिकोसिस के फर्जी सर्टिफिकेट जारी कर ठगे थे 12.39 करोड़, अब तक 4 गिरफ्तार
दौसा में सिलिकोसिस के फर्जी प्रमाण पत्र मामले में पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। इसी कड़ी में पुलिस ने 31 मार्च की रात करीब 8 से 9 बजे के बीच एक और सरकारी डॉक्टर को गिरफ्तार किया है…(CLICK कर पढ़ें)


